उदयपुर में 3 चरणों में होंगे पंचायतीराज चुनाव: 20 नवंबर को आएगा रिजल्ट; पढ़िए चुनाव का पूरा शेड्यूल
उदयपुर: राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 का कार्यक्रम जारी हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला परिषद, पंचायत समिति, पंच और सरपंच पदों के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। प्रदेश में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चार चरणों में होंगे, जबकि पंच-सरपंच के चुनाव भी चार चरणों में कराए जाएंगे। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव की सभी चरणों की मतगणना 20 नवंबर 2026 को होगी।
उदयपुर जिले में भी पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जिले में जिला परिषद के 47 वार्ड और 20 पंचायत समितियां हैं। सितंबर में जिला प्रशासन की ओर से इन पदों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
राजस्थान में चार चरणों में होंगे पंचायत चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग के जारी कार्यक्रम के मुताबिक जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए चार चरण तय किए गए हैं। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा।
| चरण | जिला परिषद/पंचायत समिति मतदान |
|---|---|
| पहला चरण | 23 अक्टूबर 2026 |
| दूसरा चरण | 29 अक्टूबर 2026 |
| तीसरा चरण | 4 नवंबर 2026 |
| चौथा चरण | 14 नवंबर 2026 |
इन चुनावों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए EVM से मतदान कराया जाएगा। सभी चरणों की मतगणना एक ही दिन यानी 20 नवंबर 2026 को सुबह 8 बजे से होगी।
पंच और सरपंच चुनाव कब होंगे?
ग्राम पंचायत स्तर पर पंच और सरपंच के चुनाव भी अलग-अलग चरणों में होंगे। इनके लिए मतदान बैलेट पेपर से कराया जाएगा और मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन मतगणना की जाएगी।
| चरण | पंच-सरपंच मतदान |
|---|---|
| पहला चरण | 25 अक्टूबर 2026 |
| दूसरा चरण | 31 अक्टूबर 2026 |
| तीसरा चरण | 6 नवंबर 2026 |
| चौथा चरण | 16 नवंबर 2026 |
पंच और सरपंच पदों के चुनाव में मतदान के बाद स्थानीय स्तर पर ही मतगणना और परिणाम घोषित करने की व्यवस्था है।
उदयपुर में 47 जिला परिषद वार्ड
उदयपुर जिले में जिला परिषद के 47 वार्डों के लिए चुनाव होंगे। इसके अलावा जिले की पंचायत समितियों में सदस्य पदों के लिए भी मतदान कराया जाएगा।
जिला प्रशासन ने सितंबर में आरक्षण की लॉटरी पूरी की थी। इसमें उदयपुर जिला परिषद के सभी 47 वार्डों और 20 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के लिए आरक्षण तय किया गया।
उदयपुर जिले की 20 पंचायत समितियों में गिरवा, कुराबड़, सलूम्बर, कोटड़ा, गोगुंदा, सायरा, खेरवाड़ा, नयागांव, नाई, झाड़ोल, फलासिया, ओगणा, देवला, कल्याणपुर, ऋषभदेव, घासा, बड़गांव, भींडर, वल्लभनगर और मावली शामिल हैं।
आरक्षण व्यवस्था के अनुसार कई पंचायत समितियों में प्रधान पद अलग-अलग श्रेणियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। इससे स्थानीय चुनाव में उम्मीदवारों की तैयारी और दावेदारी भी आरक्षण के अनुसार तय होगी।
8 अक्टूबर से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया
पंचायतीराज चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू होगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए पहले चरण की अधिसूचना 8 अक्टूबर को जारी होगी।
पहले चरण में नामांकन की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर रखी गई है। नामांकन वापस लेने और चुनाव चिन्ह आवंटित करने की प्रक्रिया इसके बाद पूरी होगी।
इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे चरण के लिए अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी होंगी।
20 नवंबर को आएगा जिला परिषद और पंचायत समिति का रिजल्ट
पंचायतीराज चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण तारीखों में 20 नवंबर 2026 शामिल है। इस दिन जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के सभी चरणों की मतगणना की जाएगी।
यानी अलग-अलग तारीखों पर मतदान होने के बावजूद इन पदों का अंतिम रिजल्ट एक ही दिन सामने आएगा। मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू होगी।
इसके बाद निर्वाचित जिला परिषद सदस्य जिला प्रमुख के चुनाव में और पंचायत समिति सदस्य प्रधान के चुनाव में हिस्सा लेंगे।
जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव कब होगा?
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया नवंबर के अंत तक पूरी होगी। जारी कार्यक्रम में जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख, प्रधान और उप प्रधान के चुनाव की तारीखें भी निर्धारित की गई हैं।
- 25 नवंबर 2026: प्रधान/जिला प्रमुख से संबंधित चुनाव प्रक्रिया
- 26 नवंबर 2026: उप प्रधान/संबंधित चुनाव
- 27 नवंबर 2026: जिला प्रमुख/प्रधान से संबंधित निर्धारित चुनाव
- 28 नवंबर 2026: उप जिला प्रमुख/उप प्रधान से संबंधित प्रक्रिया
इन पदों का चुनाव सीधे आम मतदाताओं द्वारा नहीं, बल्कि संबंधित निर्वाचित सदस्यों की प्रक्रिया के तहत होगा।
उदयपुर में पहले ही तय हो चुका है आरक्षण
उदयपुर में पंचायत चुनाव से पहले आरक्षण की लॉटरी पूरी की जा चुकी है। जिला परिषद के 47 वार्डों और 20 प्रधान पदों के लिए आरक्षण निर्धारित किया गया है।
20 प्रधान पदों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ST महिला और अनारक्षित महिला सहित अलग-अलग श्रेणियों के लिए पद निर्धारित किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार गिरवा, कुराबड़, सुलाव, कोटड़ा, गोगुंदा, सायरा, खेरवाड़ा और नयागांव में प्रधान पद ST ओपन श्रेणी में रखा गया है। वहीं नाई, झाड़ोल, फलासिया, ओगणा, देवला, कल्याणपुर और ऋषभदेव में ST महिला श्रेणी तय की गई है।
राजस्थान में 1.69 लाख से ज्यादा प्रतिनिधि चुने जाएंगे
पंचायतीराज चुनाव 2026 के जरिए राजस्थान में बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा। प्रदेश में 41 जिला परिषदों और 457 पंचायत समितियों में चुनाव कराए जा रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार 1,403 जिला परिषद सदस्य और 8,245 पंचायत समिति सदस्य चुने जाएंगे। इसके अलावा 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और करीब 1.30 लाख वार्ड पंचों का चुनाव होगा। कुल मिलाकर लगभग 1.69 लाख पंचायतीराज प्रतिनिधियों के निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होगी।
महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण
पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इस व्यवस्था का असर ग्राम पंचायत से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर तक दिखाई देगा।
राज्य में 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए चुनाव होंगे। आरक्षण व्यवस्था के अनुसार बड़ी संख्या में सरपंच पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। पंचायत समिति और जिला परिषद के स्तर पर भी महिला आरक्षण लागू रहेगा।
मतदान के तरीके में भी अंतर
पंचायतीराज चुनाव में अलग-अलग पदों के लिए मतदान का तरीका अलग रखा गया है।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य: EVM से मतदान होगा।
सरपंच और वार्ड पंच: बैलेट पेपर/मतपेटी से मतदान होगा।
सरपंच और पंच पदों की मतगणना मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद की जाएगी, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना सभी चरणों का मतदान पूरा होने के बाद 20 नवंबर को एक साथ होगी।
उदयपुर के मतदाता रखें इन तारीखों का ध्यान
उदयपुर समेत राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब उम्मीदवारों और राजनीतिक गतिविधियों को चुनाव आयोग के निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
उदयपुर में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव से जुड़े मतदाताओं को अपने क्षेत्र की अंतिम चरणवार मतदान तिथि की जानकारी स्थानीय निर्वाचन अधिकारी और आधिकारिक चुनाव सूचना से जरूर मिलानी चाहिए। क्योंकि राज्य स्तर पर चार चरण निर्धारित हैं, लेकिन किसी जिले या पंचायत समिति को किस चरण में रखा गया है, यह जिला-वार कार्यक्रम से तय होता है।
