राजस्थान में बनेंगे 7 अत्याधुनिक बर्न केयर सेंटर: SMS में हुआ ऐलान; बर्न इंजरी पर एक्सपर्ट्स बोले- जल जाएं तो सबसे पहले पानी डालें
जयपुर: राजस्थान में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज को बेहतर बनाने के लिए सात अत्याधुनिक बर्न केयर सेंटर विकसित किए जाएंगे। राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में बर्न इंजरी के इलाज और विशेषज्ञ सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजस्थान सरकार के 2025-26 बजट में प्रत्येक संभागीय मुख्यालय पर अल्ट्रा-एडवांस्ड बर्न केयर सेंटर स्थापित करने की घोषणा की गई थी। प्रदेश में सात संभागीय मुख्यालय होने के कारण इस योजना के तहत सात सेंटर प्रस्तावित हैं।
बर्न इंजरी यानी जलने की चोट में शुरुआती उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि अगर शरीर का कोई हिस्सा जल जाए तो घबराने के बजाय सबसे पहले प्रभावित हिस्से को साफ बहते पानी से ठंडा करना चाहिए। राजस्थान की चिकित्सा संबंधी मानक उपचार गाइडलाइन में भी burn injury के शुरुआती प्रबंधन में running water से burn को ठंडा करने की सलाह दी गई है।
राजस्थान में बनेंगे 7 आधुनिक बर्न केयर सेंटर
राजस्थान सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के विस्तार के तहत प्रत्येक संभागीय मुख्यालय पर अल्ट्रा-एडवांस्ड बर्न केयर सेंटर स्थापित करने का प्रावधान किया है। इन सेंटरों का उद्देश्य गंभीर रूप से जले मरीजों को बेहतर और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना है।
बर्न मरीजों के इलाज में केवल शुरुआती उपचार ही नहीं, बल्कि आगे की सर्जरी, संक्रमण से बचाव, त्वचा और ऊतक की देखभाल तथा लंबे समय तक पुनर्वास की जरूरत पड़ सकती है। गंभीर मामलों में मरीज को विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की जरूरत होती है।
ऐसे में अलग-अलग संभागीय स्तर पर आधुनिक burn-care facilities विकसित होने से मरीजों को हर गंभीर मामले में दूर के बड़े अस्पताल तक ले जाने की जरूरत कम हो सकती है।
SMS में बर्न इंजरी को लेकर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
जयपुर का सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े अस्पताल राजस्थान की प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं में शामिल हैं। SMS Medical College को National Programme for Prevention and Management of Trauma & Burn Injuries के तहत Centre of Excellence के रूप में भी नामित किया गया है। इसके तहत राज्यभर के डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और पैरामेडिकल स्टाफ की burn और trauma care से जुड़ी क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
इसका उद्देश्य केवल अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाना ही नहीं, बल्कि मरीजों के शुरुआती उपचार और referral system को भी बेहतर बनाना है।
जलने पर सबसे पहले क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी व्यक्ति के जलने पर सबसे पहले प्रभावित हिस्से को साफ बहते पानी के नीचे ठंडा करना चाहिए। राजस्थान की Standard Treatment Guidelines में भी burns को running water से साफ करने और ठंडा करने की बात कही गई है।
जलने के तुरंत बाद कुछ सामान्य सावधानियां भी रखनी चाहिए:
- जले हुए हिस्से पर साफ बहता पानी डालें।
- बर्फ या बहुत ठंडे पानी का इस्तेमाल न करें।
- जले हुए हिस्से पर घी, तेल, टूथपेस्ट या घरेलू पदार्थ न लगाएं।
- अगर कपड़े या आभूषण प्रभावित जगह के आसपास हैं और आसानी से हटाए जा सकते हैं तो उन्हें सावधानी से हटाएं।
- गंभीर जलन होने पर मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल ले जाएं।
- चेहरे, गर्दन, हाथ, पैरों या जननांगों पर गंभीर जलन होने पर विशेष चिकित्सा सहायता जरूरी हो सकती है।
- सांस लेने में परेशानी या धुएं के कारण समस्या हो तो तत्काल आपात चिकित्सा सहायता लें।
गंभीर जलने की स्थिति में घरेलू उपचार करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
बर्फ लगाने से क्यों बचना चाहिए?
जलने के बाद कई लोग तुरंत बर्फ लगाने की कोशिश करते हैं। लेकिन चिकित्सा गाइडलाइन में burn injury पर ice-cold water से बचने की सलाह दी गई है। इसके बजाय सामान्य साफ बहते पानी से प्रभावित हिस्से को ठंडा करना बताया गया है।
इसका उद्देश्य त्वचा को और नुकसान से बचाना तथा शुरुआती दर्द और गर्मी को कम करना होता है।
इसीलिए किसी व्यक्ति के जलने पर आसपास मौजूद लोगों को घबराकर अलग-अलग घरेलू उपाय करने के बजाय प्राथमिक उपचार के सही तरीके का पालन करना चाहिए।
किन मामलों में तुरंत अस्पताल ले जाना जरूरी?
हर burn injury एक जैसी नहीं होती। जलने की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि शरीर का कितना हिस्सा जला है, जलन कितनी गहरी है और शरीर के किस हिस्से पर चोट लगी है।
राजस्थान की उपचार गाइडलाइन के अनुसार शरीर के बड़े हिस्से पर जलने, चेहरे-गर्दन या संवेदनशील हिस्सों पर जलने, respiratory या inhalation injury और कुछ अन्य गंभीर परिस्थितियों में burn centre में उपचार या referral की जरूरत हो सकती है।
बच्चों और बुजुर्गों में भी burn injury को विशेष सावधानी से देखा जाता है।
गंभीर मरीजों के लिए आधुनिक सुविधाएं जरूरी
गंभीर burn patients के इलाज में शुरुआती प्राथमिक उपचार के बाद कई तरह की विशेषज्ञ सेवाओं की आवश्यकता हो सकती है। इनमें wound management, infection control, fluid management, surgery और rehabilitation शामिल हो सकते हैं।
इसी वजह से अत्याधुनिक बर्न केयर सेंटरों में प्रशिक्षित डॉक्टरों के साथ जरूरी उपकरण और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।
राजस्थान में सात ऐसे सेंटर विकसित करने की योजना इसी दिशा में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का हिस्सा है। बजट दस्तावेजों में प्रत्येक संभागीय मुख्यालय पर ultra-advanced burn care centre की स्थापना का प्रावधान दर्ज है।
राजस्थान में Trauma और Emergency Care पर भी जोर
बर्न केयर को अलग से मजबूत करने के साथ राजस्थान में trauma और emergency care infrastructure को भी विस्तार देने की योजनाएं चल रही हैं। राज्य में trauma care facilities को बेहतर करने, medical staff को प्रशिक्षण देने और life-saving services की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
SMS Medical College का Centre of Excellence इसी व्यापक trauma और burn-care training framework का हिस्सा है। इसके जरिए राज्य के अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है।
SMS अस्पताल में पहले भी बड़ी संख्या में बर्न मरीज पहुंचे
जयपुर के SMS Hospital में पहले भी बड़े हादसों के बाद बड़ी संख्या में burn patients को उपचार के लिए लाया गया है। दिसंबर 2024 में जयपुर-अजमेर हाईवे पर हुए भीषण हादसे के बाद SMS Hospital में झुलसे मरीजों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। अस्पताल में घायल मरीजों के लिए अलग वार्ड और control room भी बनाया गया था।
इस तरह के हादसे बताते हैं कि बड़े सरकारी अस्पतालों में burn और trauma patients के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ सुविधाएं और प्रशिक्षित स्टाफ कितना जरूरी है।
Bulletino पर जोधपुर AIIMS में रेजिडेंट डॉक्टर की मौत से जुड़ी खबर भी पढ़ सकते हैं। अस्पताल और चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े मामलों की कवरेज के लिए यह एक संबंधित internal link है।
लोगों को प्राथमिक उपचार की जानकारी होना जरूरी
बर्न केयर सेंटर बनने के साथ आम लोगों को burn first aid की जानकारी देना भी महत्वपूर्ण है। हादसे के बाद अस्पताल पहुंचने में कुछ समय लग सकता है। ऐसे में शुरुआती मिनटों में सही कदम मरीज की स्थिति के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अगर जलने की चोट गंभीर है तो मरीज को खुद इलाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता दिलानी चाहिए। खासकर चेहरे या सांस की नली से संबंधित चोट, बड़े क्षेत्र में जलना, गहरी जलन या बच्चों में गंभीर burn injury होने पर अस्पताल ले जाने में देरी नहीं करनी चाहिए।
राजस्थान सरकार की योजना के तहत सात संभागीय मुख्यालयों पर अत्याधुनिक बर्न केयर सेंटर विकसित होने से गंभीर burn patients के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा व्यवस्था को राज्यभर में मजबूत करने की दिशा में मदद मिल सकती है। वहीं, आम लोगों के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि जलने की स्थिति में घबराने के बजाय प्रभावित हिस्से को साफ बहते पानी से ठंडा करें और गंभीर चोट में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

