
कोलकाता में चोरबागान दुर्गा पंडाल में भगदड़, 17 मौत: 40 घायल; बारिश से बचने के लिए जमा हुई थी भीड़, 91 साल पुराना है पंडाल
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा के दौरान बड़ा हादसा हो गया। उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ जैसी स्थिति बनने से कम से कम 17 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। कई लोग घायल हुए हैं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। शुरुआती रिपोर्टों में घायलों की संख्या 40 के आसपास बताई गई, हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़े अलग हैं।
यह हादसा उस समय हुआ, जब दुर्गा मां के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पंडाल के बाहर मौजूद थे। इसी दौरान बारिश तेज हो गई और बारिश से बचने के लिए लोग एक साथ पंडाल के अंदर जाने लगे। भीड़ का दबाव बढ़ने से अफरा-तफरी मच गई और कई लोग गिर पड़े। घटना के बाद पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं। सुरक्षा के मद्देनजर पंडाल में श्रद्धालुओं की एंट्री रोक दी गई।
बारिश से बचने के लिए एक साथ पंडाल में घुसे लोग
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शनिवार शाम को कोलकाता में बारिश हो रही थी। चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में पहले से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। बाहर इंतजार कर रहे लोग बारिश तेज होने पर अंदर जाने लगे। अचानक भीड़ बढ़ने से प्रवेश द्वार के आसपास दबाव पैदा हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में पंडाल के प्रवेश क्षेत्र में अफरा-तफरी और लोगों के गिरने की बात कही गई है। कुछ रिपोर्टों में गेट या पंडाल के एक हिस्से को नुकसान पहुंचने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, हादसे की सटीक वजह और घटनाक्रम की आधिकारिक जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
भीड़ बढ़ने के दौरान कई लोग एक-दूसरे से टकराकर गिर गए। ऐसी स्थिति में पीछे से आने वाली भीड़ के दबाव के कारण लोगों के लिए संभलना और बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।
17 लोगों की मौत की खबर, घायलों का इलाज जारी
शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में हादसे में 17 लोगों की मौत की जानकारी दी गई। घायलों को कोलकाता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सहित संबंधित चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचाया गया। अस्पताल में भर्ती लोगों को उपचार दिया जा रहा है।
घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में 25 से 50 तक के आंकड़े सामने आए हैं। इसलिए अंतिम आंकड़े की पुष्टि प्रशासन या अस्पताल की आधिकारिक जानकारी से होना जरूरी है। हादसे के बाद अधिकारियों ने घटनास्थल और अस्पताल में पहुंचकर राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लिया।
ऐसी घटनाओं में शुरुआती घंटों के दौरान मृतकों और घायलों की संख्या बदल सकती है। कुछ लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी मिल सकती है, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती रखना पड़ सकता है। इसलिए अंतिम स्थिति के लिए प्रशासन की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस ने पंडाल में प्रवेश रोका
हादसे के बाद चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में श्रद्धालुओं की आवाजाही रोक दी गई। पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रभावित लोगों को बाहर निकालने तथा घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम किया गया।
घटना के बाद इलाके में भीड़ को नियंत्रित करना और बचाव दलों के लिए रास्ता खुला रखना प्राथमिकता बन गया। ऐसे समय में पुलिस द्वारा प्रवेश रोकने का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और राहत कार्य में बाधा आने से बचाना होता है।
पंडाल में प्रवेश और निकास के रास्तों, भीड़ की संख्या, स्वयंसेवकों की तैनाती और आपातकालीन व्यवस्था जैसे पहलुओं की जांच की जरूरत है। जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि भीड़ का दबाव किस तरह बढ़ा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधार किए जाने चाहिए।
91 साल से आयोजित हो रही है चोरबागान की दुर्गा पूजा
चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा कोलकाता की पुरानी सामुदायिक पूजा आयोजनों में गिनी जाती है। रिपोर्टों में इस पूजा की परंपरा करीब 91 साल पुरानी बताई गई है। हर साल दुर्गा पूजा के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचते हैं।
कोलकाता में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। अलग-अलग इलाकों में सजाए जाने वाले पंडाल, देवी की प्रतिमाएं और विशेष थीम लोगों को आकर्षित करती हैं। सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दौरान कई लोकप्रिय पंडालों में भारी भीड़ रहती है।
इसी वजह से प्रमुख पूजा स्थलों पर प्रवेश और निकास का प्रबंधन, भीड़ की निगरानी और आपातकालीन रास्तों को खुला रखना जरूरी होता है। बारिश या किसी अन्य अचानक बदलाव के समय भीड़ के एक ही दिशा में बढ़ने से जोखिम और बढ़ सकता है।
हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
चोरबागान की घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे आयोजनों में प्रवेश और निकास के लिए पर्याप्त जगह, भीड़ की संख्या पर निगरानी, प्रशिक्षित स्वयंसेवक, पुलिस की तैनाती और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं महत्वपूर्ण होती हैं।
बारिश के दौरान श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित प्रतीक्षास्थल और पानी से बचने के वैकल्पिक इंतजाम भी उपयोगी हो सकते हैं। यदि बड़ी संख्या में लोग एक साथ किसी संकरे प्रवेश द्वार की ओर बढ़ते हैं, तो भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है।
हालांकि, इस मामले में सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर कमी रही, यह जांच के बाद ही तय किया जा सकेगा। अभी किसी व्यक्ति या आयोजन समिति को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले आधिकारिक निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।
प्रशासन की जांच से सामने आएंगे हादसे के कारण
हादसे के बाद पुलिस और संबंधित अधिकारियों की प्राथमिकता घायलों का उपचार, प्रभावित परिवारों को सहायता और घटनास्थल की स्थिति का आकलन करना है। इसके साथ ही यह भी जांचा जा सकता है कि पंडाल में उस समय कितने लोग मौजूद थे, प्रवेश द्वारों पर क्या व्यवस्था थी और बारिश शुरू होने के बाद भीड़ को कैसे नियंत्रित किया गया।
जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है। यदि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल सबसे जरूरी है कि घायलों को बेहतर इलाज मिले और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जाए। चोरबागान पंडाल में हुआ यह हादसा बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन तैयारियों के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है।