दिल्ली में SIR का विरोध, AAP नेता हिरासत में: जंतर-मंतर पर फोर्स तैनात, 11 मेट्रो स्टेशन बंद; मुंबई में CJP का प्रदर्शन
नई दिल्ली में शुक्रवार यानी 2 अक्टूबर को चुनावी वोटर लिस्ट और Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विरोध-प्रदर्शन का मामला गरमा गया। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
प्रदर्शनकारियों और आयोजकों की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और SIR को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
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जंतर-मंतर पर पहुंचे सौरभ भारद्वाज, पुलिस ने हिरासत में लिया
AAP नेता सौरभ भारद्वाज शुक्रवार सुबह जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
भारद्वाज ने कहा कि वह खुद मेट्रो और ऑटो के जरिए जंतर-मंतर पहुंचे हैं। उन्होंने लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की। उनके मुताबिक, AAP ने प्रदर्शन के लिए पहले ही अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दी गई।
प्रदर्शन के दौरान कई अन्य AAP कार्यकर्ताओं और लोगों को भी हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
SIR को लेकर क्या है प्रदर्शनकारियों की आपत्ति?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। मौजूदा विवाद में प्रदर्शनकारी संगठनों की मुख्य चिंता मतदाता सूची में नामों के जुड़ने, हटने और चुनावी अधिकारों से जुड़ी है।
प्रदर्शन के आयोजकों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। उनका कहना है कि इससे नागरिकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, ये प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के आरोप हैं। इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रिया को लेकर अलग पक्ष रखा गया है।
2 अक्टूबर के प्रदर्शन में AISA, राज्यसभा सांसद मनोज झा और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण से जुड़े आयोजकों की भूमिका बताई गई है। प्रदर्शनकारियों की मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से हटने या इस्तीफे की भी है।
जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात
प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में सुरक्षा बढ़ाई है। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 5,000 पुलिसकर्मी, रिजर्व फोर्स, रैपिड एक्शन फोर्स और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई है और CCTV के जरिए स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर ड्रोन से भी निगरानी की व्यवस्था रखी गई है।
दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं। इसके तहत बिना अनुमति के सार्वजनिक सभा, जुलूस, प्रदर्शन और धरने पर रोक लगाई गई है।
11 मेट्रो स्टेशन के एंट्री-एग्जिट बंद
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी DMRC ने 11 स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को अगली सूचना तक बंद कर दिया।
प्रभावित स्टेशनों की सूची में शामिल हैं:
- जनपथ
- पटेल चौक
- केंद्रीय सचिवालय
- राजीव चौक
- सेवा तीर्थ
- मंडी हाउस
- लोक कल्याण मार्ग
- INA
- चावड़ी बाजार
- रामकृष्ण आश्रम मार्ग
- नई दिल्ली
हालांकि कुछ स्टेशनों पर यात्रियों को मेट्रो बदलने यानी इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई है। DMRC के अनुसार राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय जैसे स्टेशनों पर इंटरचेंज उपलब्ध है।
इसका मतलब यह है कि इन स्टेशनों से बाहर निकलने या अंदर प्रवेश करने पर रोक हो सकती है, लेकिन कुछ स्टेशनों पर यात्री दूसरी मेट्रो लाइन में बदलाव कर सकते हैं।
सड़कों पर भी ट्रैफिक प्रतिबंध
मेट्रो के अलावा मध्य दिल्ली के कई इलाकों में यातायात को नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस, पटेल चौक, GPO, टॉल्स्टॉय मार्ग, संसद मार्ग और आसपास के रास्तों से बचने की सलाह दी है। इन इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन और नियंत्रित आवाजाही लागू की गई है।
इसलिए शुक्रवार को इन इलाकों से गुजरने वाले यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले मेट्रो और ट्रैफिक की ताजा स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।
पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?
दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कारण बताए गए हैं।
पुलिस को बड़ी संख्या में लोगों के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने की आशंका थी। इसी कारण अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई और जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए।
दूसरी ओर, आयोजकों का कहना है कि उन्होंने पुलिस को प्रदर्शन की जानकारी दी थी और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना चाहते थे। दोनों पक्षों के इन दावों को अलग-अलग संदर्भ में समझना जरूरी है।
पहले भी हिरासत में लिए जा चुके हैं प्रदर्शनकारी
SIR को लेकर दिल्ली में इससे पहले भी प्रदर्शन हुए हैं। 25 सितंबर को जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन के दौरान 60 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इनमें AISA नेता नेहा बोरा, राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, वकील प्रशांत भूषण और CPI(M) नेता दीपांकर भट्टाचार्य समेत कई लोग शामिल थे। उस समय भी प्रदर्शनकारी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जुटे थे।
मुंबई में भी CJP का प्रदर्शन
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध का असर मुंबई में भी दिखाई दे रहा है।
Cockroach Janta Party (CJP) ने 2 अक्टूबर को मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन शाम करीब 4 बजे शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 के पास प्रस्तावित है।
हालांकि मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति देने से इनकार किया था। पुलिस ने शिवाजी पार्क के इस्तेमाल से जुड़े नियमों, आवश्यक नागरिक अनुमति नहीं होने तथा ट्रैफिक और आपातकालीन आवाजाही पर संभावित असर का हवाला दिया था।
इसके बाद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन जारी रखने और जरूरत पड़ने पर ‘जेल भरो आंदोलन’ की बात कही थी।
मुंबई में भी सुरक्षा बढ़ाई गई
CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए मुंबई के दादर स्टेशन पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। रेलवे ने अतिरिक्त कर्मचारियों और RPF की तैनाती की है।
दादर स्टेशन शिवाजी पार्क के नजदीक प्रमुख रेलवे स्टेशन है। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम रेलवे और मध्य रेलवे की ओर से अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है, ताकि प्रदर्शन के दौरान यात्रियों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था को संभाला जा सके।
चुनाव आयोग और SIR पर बहस क्यों महत्वपूर्ण है?
SIR को लेकर विवाद सिर्फ एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसका संबंध मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से है। प्रदर्शनकारी संगठन मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और नाम हटाए जाने की आशंकाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को लेकर अपने संस्थागत पक्ष को रखा है। इसलिए इस पूरे विवाद में आरोपों, राजनीतिक दावों और आधिकारिक जानकारी के बीच अंतर करना जरूरी है।
2 अक्टूबर का प्रदर्शन इसी व्यापक बहस के बीच हुआ है। एक तरफ राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अपने सवालों को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं, वहीं प्रशासन सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध लगा रहा है।
दिल्ली में आज क्या स्थिति है?
2 अक्टूबर की उपलब्ध जानकारी के अनुसार जंतर-मंतर और आसपास के मध्य दिल्ली क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी है। कई रास्तों पर बैरिकेडिंग और यातायात नियंत्रण लागू है। 11 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट बंद किए गए हैं, जबकि कुछ स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा जारी है।
AAP नेता सौरभ भारद्वाज समेत कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट है। वहीं मुंबई में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
SIR को लेकर जारी यह विवाद आने वाले दिनों में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का एक महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है। हालांकि, किसी भी आरोप या दावे को अंतिम तथ्य मानने से पहले संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के बयानों को देखना जरूरी होगा।
