जोधपुर में ठगों ने पुलिसकर्मी से 16 लाख कराए ट्रांसफर, 20% कमीशन का दिया लालच
जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर में ऑनलाइन ठगी का एक मामला सामने आया है, जिसमें साइबर ठगों ने एक पुलिसकर्मी को ऑनलाइन सामान ऑर्डर करने के नाम पर 20 प्रतिशत कमीशन का लालच दिया। इसके बाद वॉट्सऐप के जरिए एक लिंक भेजकर पुलिसकर्मी को अपने जाल में फंसाया गया और उससे करीब 16 लाख रुपए अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए ट्रांसफर करा लिए गए।
शुरुआत में यह पूरा मामला सामान्य ऑनलाइन खरीदारी और कमीशन कमाने का अवसर दिखाई दिया। लेकिन जैसे-जैसे पुलिसकर्मी से पैसे ट्रांसफर करवाए गए, उसे ठगी का एहसास हुआ। साइबर ठगी का यह तरीका लोगों को कम समय में ज्यादा कमाई का लालच देकर उनसे पैसे जमा करवाने वाले ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़ा है।
ऑनलाइन सामान ऑर्डर करने पर 20 प्रतिशत कमीशन का लालच
जानकारी के अनुसार, ठगों ने पुलिसकर्मी से संपर्क कर उसे ऑनलाइन सामान ऑर्डर करने से जुड़े काम का ऑफर दिया। उसे बताया गया कि ऑनलाइन सामान ऑर्डर करने के बदले उसे 20 प्रतिशत तक कमीशन मिल सकता है।
कमाई के इस प्रस्ताव के बाद पुलिसकर्मी को एक ऑनलाइन प्रक्रिया में शामिल किया गया। शुरुआत में उसे कुछ ऐसे टास्क दिए गए, जिनसे उसे यह विश्वास हो सके कि यह कोई वास्तविक ऑनलाइन काम या खरीदारी की प्रक्रिया है।
साइबर ठग अक्सर इसी तरह शुरुआत में छोटे टास्क या सीमित लेनदेन के जरिए भरोसा बनाने की कोशिश करते हैं। बाद में पीड़ित को ज्यादा रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
वॉट्सऐप पर भेजा लिंक
पुलिसकर्मी को बातचीत के दौरान वॉट्सऐप पर एक लिंक भेजा गया। इसी लिंक के जरिए उसे ऑनलाइन सामान ऑर्डर करने और भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया।
लिंक पर क्लिक करने के बाद उसे एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या प्रक्रिया में ले जाया गया। इसके बाद ठगों ने अलग-अलग भुगतान करने के लिए कहा।
शुरुआत में यह प्रक्रिया सामान्य ऑनलाइन ऑर्डर जैसी दिखाई दी, लेकिन बाद में रकम बढ़ती चली गई। ठगों ने कथित तौर पर कमीशन और भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया का हवाला देकर पुलिसकर्मी से लगातार पैसे ट्रांसफर करवाए।
16 लाख रुपए से ज्यादा की रकम ट्रांसफर
ठगों के झांसे में आने के बाद पुलिसकर्मी ने अलग-अलग ट्रांजैक्शन के माध्यम से करीब 16 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
साइबर फ्रॉड में अक्सर पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि पैसा किसी ऑर्डर, सिक्योरिटी, टैक्स, कमीशन या रिफंड प्रक्रिया के लिए जमा किया जा रहा है। इसी तरह अलग-अलग चरणों में भुगतान करवाकर ठगी की रकम बढ़ाई जाती है।
इस मामले में भी पुलिसकर्मी को 20 प्रतिशत कमीशन मिलने का लालच दिया गया था। लेकिन जब रकम वापस मिलने या कमीशन प्राप्त करने की स्थिति नहीं आई, तब उसे अपने साथ हुई ठगी का अंदाजा हुआ।
कमीशन की जगह गंवा दिए लाखों रुपए
जिस ऑनलाइन काम से कमाई करने की उम्मीद थी, उसी प्रक्रिया में पुलिसकर्मी को लाखों रुपए का नुकसान हो गया। 20 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर शुरू हुई बातचीत आखिरकार करीब 16 लाख रुपए के ट्रांसफर तक पहुंच गई।
इस तरह के मामलों में ठग पीड़ित को यह भरोसा दिलाने की कोशिश करते हैं कि पहले भुगतान करने के बाद बड़ा लाभ मिलेगा। पीड़ित जब पहले भुगतान कर देता है तो उससे अगले चरण के नाम पर फिर रकम मांगी जा सकती है।
कई बार पीड़ित पहले से जमा की गई रकम वापस पाने की उम्मीद में और ज्यादा पैसा लगा देता है। इससे नुकसान और बढ़ जाता है।
साइबर ठगी में वॉट्सऐप लिंक से रहें सावधान
इस घटना से यह भी सामने आता है कि वॉट्सऐप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले अनजान लिंक कितने जोखिम भरे हो सकते हैं।
किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। खासकर ऐसे लिंक जो ऑनलाइन कमाई, कमीशन, निवेश, शॉपिंग या रिफंड का लालच देते हैं, उनके मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
जोधपुर पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी साइबर अपराध के लिए 1930/155260 हेल्पलाइन नंबर दिए गए हैं।
पुलिसकर्मी भी बने ऑनलाइन ठगी के शिकार
साइबर अपराधी किसी एक वर्ग को ही निशाना नहीं बनाते। आम लोगों के साथ-साथ पढ़े-लिखे और तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी अलग-अलग तरह के ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं।
इस मामले में पीड़ित खुद पुलिस विभाग से जुड़ा हुआ बताया गया है। इससे यह समझा जा सकता है कि साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और किसी भी व्यक्ति को ऑनलाइन पैसों से जुड़े प्रस्ताव पर सावधानी बरतनी चाहिए।
जोधपुर में पहले भी बड़े साइबर फ्रॉड के मामले सामने आ चुके हैं। मार्च 2026 में जोधपुर पुलिस ने करीब 9.20 करोड़ रुपए की साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार उस मामले में 11 राज्यों के 32 बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को ट्रांसफर करने की भूमिका सामने आई थी।
साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति के बैंक खाते से ऑनलाइन ठगी के जरिए पैसे ट्रांसफर हो गए हैं तो उसे इंतजार नहीं करना चाहिए। सबसे पहले बैंक को इसकी सूचना देकर संदिग्ध लेनदेन पर जरूरी कार्रवाई के लिए कहना चाहिए।
इसके साथ ही 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय पर शिकायत करने से संबंधित बैंक खातों में रकम को होल्ड कराने या आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
जोधपुर पुलिस की वेबसाइट पर भी साइबर क्राइम के लिए 1930/155260 नंबर उपलब्ध कराया गया है।
पीड़ित को वॉट्सऐप चैट, मोबाइल नंबर, भेजे गए लिंक, बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने चाहिए। इन्हें डिलीट नहीं करना चाहिए, क्योंकि जांच में ये साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
ऑनलाइन कमीशन के लालच में पैसे न लगाएं
ऑनलाइन सामान खरीदने, टास्क पूरा करने या कमीशन कमाने के नाम पर अगर कोई व्यक्ति पहले आपसे बड़ी रकम जमा करने को कहता है तो सावधान हो जाएं। खासकर तब जब संपर्क किसी अनजान वॉट्सऐप नंबर या संदिग्ध लिंक के माध्यम से हुआ हो।
किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पैसा ट्रांसफर करने से पहले उसकी कंपनी, वेबसाइट और भुगतान प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए। केवल वॉट्सऐप चैट या सामने वाले के दावे के आधार पर भुगतान करना जोखिम भरा हो सकता है।
जोधपुर के इस मामले में भी कथित तौर पर 20 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर पुलिसकर्मी से करीब 16 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए गए। घटना यह बताती है कि ऑनलाइन कमाई के आकर्षक प्रस्ताव के पीछे साइबर ठगी का जाल हो सकता है। इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने और पैसा ट्रांसफर करने से पहले पूरी जांच करना जरूरी है।
