बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा, सारण में नए इलाकों में घुसा पानी; यूपी में भी नदियां उफान पर
पटना/लखनऊ: बिहार और उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ते नदी जलस्तर के कारण बाढ़ का खतरा एक बार फिर गंभीर हो गया है। बिहार में गंडक समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सारण जिले में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद बाढ़ का पानी नए इलाकों में पहुंच गया है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने बिहार में 28 स्थानों पर गंभीर बाढ़ की स्थिति को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
उत्तर प्रदेश में भी कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में राप्ती और सरयू जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राहत और बचाव कार्य तेज किए गए हैं तथा प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
सारण में नए इलाकों में पहुंचा गंडक का पानी
बिहार के सारण जिले में गंडक नदी का पानी तटबंधों को नुकसान पहुंचने के बाद नए इलाकों में फैल गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पनापुर और मकेर प्रखंडों में क्षतिग्रस्त तटबंधों से पानी आगे बढ़ा और करछुलिया, अमनौर, जगदीशपुर, मकेर और परसा जैसे इलाकों में भी बाढ़ का पानी पहुंचा।
गंडक के जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाई है। पानी के बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में आवागमन और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
28 स्थानों पर ऑरेंज अलर्ट
केंद्रीय जल आयोग ने बिहार में 28 स्थानों पर गंभीर बाढ़ की स्थिति को लेकर ऑरेंज बुलेटिन जारी किया है। CWC के अनुसार ऑरेंज अलर्ट उस स्थिति में जारी किया जाता है जब नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच जाता है, लेकिन अभी उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से नीचे रहता है।
इससे प्रशासन को प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में राहत-बचाव की तैयारी बढ़ाने की जरूरत होती है।
गंगा, गंडक और दूसरी नदियां भी उफान पर
बिहार में सिर्फ गंडक ही नहीं, बल्कि गंगा, गंडक, कोसी, बागमती और घाघरा समेत कई नदियों का जलस्तर अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है।
गंगा का जलस्तर पटना के कई स्थानों पर भी खतरे के निशान से ऊपर बताया गया है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार दानापुर और गांधी घाट समेत कई जगहों पर नदी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है।
नेपाल और यूपी की बारिश का भी असर
बिहार में मौजूदा बाढ़ की स्थिति के पीछे नेपाल और उत्तर प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश को भी एक प्रमुख कारण बताया गया है। हाल के दिनों में नेपाल के गंडक बेसिन में भारी बारिश के बाद वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से बहुत ज्यादा पानी छोड़ा गया था।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 29 सितंबर को वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर 5,43,500 क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया था। इससे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा।
उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ का असर
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। राप्ती और सरयू के उफान के कारण कई गांवों में राहत अभियान तेज किया गया है।
3 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के प्रयास जारी हैं। प्रशासन नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
बाराबंकी में भी हाल के दिनों में सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंची थी और करीब 100 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए गए थे।
राहत और बचाव कार्य तेज
बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगाया गया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी सामान उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।
तटबंधों और नदी के जलस्तर पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। जहां पानी नए इलाकों में पहुंच रहा है, वहां प्रशासन स्थिति के अनुसार राहत कार्य बढ़ा रहा है।
आगे भी निगरानी जरूरी
बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति फिलहाल पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। नदी जलस्तर में उतार-चढ़ाव और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश के कारण आने वाले समय में हालात बदल सकते हैं।
ऐसे में प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों को नदी, तटबंध और तेज बहाव वाले पानी के आसपास जाने से बचने तथा स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की जरूरत है।
