राजस्थान: कुएं में छुपाई 5 करोड़ की दवाइयां, मास्टरमाइंड गिरफ्तार; पहले ऑफर कर चुका है 1 करोड़ की रिश्वत
भरतपुर/बयाना: राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र से दवाइयों के अवैध भंडारण का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बयाना तहसील के खटनावाली गांव में एक सूखे कुएं से करीब 5 करोड़ रुपये कीमत की 274 कार्टन दवाइयां बरामद की गई हैं। मामले में अब मुख्य आरोपी और थोक दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में सामने आया है कि दवाइयों को उत्तर प्रदेश के आगरा से राजस्थान लाकर कुएं में छिपाया गया था।
सूखे कुएं से मिलीं 274 कार्टन दवाइयां
औषधि नियंत्रण विभाग को खटनावाली गांव में बड़ी मात्रा में दवाइयां छिपाकर रखे जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद सहायक औषधि नियंत्रक, भरतपुर के नेतृत्व में टीम ने स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों की मदद से सूखे कुएं की तलाशी ली।
तलाशी के दौरान कुएं से 274 कार्टन दवाइयां बरामद हुईं। विभाग ने इनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब ₹5 करोड़ बताई है। बरामद दवाओं में हृदय रोग, डायबिटीज और एलर्जी जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां शामिल हैं। इनमें Losar-50, Janumet, Ketorol-M, Allegra-M और Jalra जैसी दवाओं के नाम सामने आए हैं।
दवाइयां असली हैं या नकली? जांच जारी
इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयों को सूखे कुएं में छिपाकर रखना विभाग के लिए गंभीर और संदिग्ध मामला है। हालांकि अभी यह अंतिम रूप से नहीं कहा गया है कि कुएं से मिली सभी दवाइयां नकली थीं।
औषधि नियंत्रण विभाग दवाओं की गुणवत्ता, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी डेट, स्रोत तथा सप्लाई चेन की जांच कर रहा है। मौके से गुणवत्ता जांच के लिए 10 नमूने भी लिए गए हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि दवाइयां नकली, मिलावटी, एक्सपायरी या किसी अन्य अवैध तरीके से बाजार में पहुंचाने की तैयारी में थीं।
आगरा से राजस्थान तक जुड़ा मामला
जांच के दौरान राजस्थान के इस मामले के तार उत्तर प्रदेश के आगरा से जुड़ते गए। रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिए दवाइयों का स्टॉक आगरा से राजस्थान लाकर खटनावाली गांव के सूखे कुएं में छिपाया गया था।
राजस्थान औषधि विभाग ने मामले की जानकारी उत्तर प्रदेश के औषधि अधिकारियों और संबंधित दवा निर्माताओं के साथ साझा की। इसके बाद आगरा में भी संबंधित दवाइयों के भंडारण को लेकर कार्रवाई हुई और मलपुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
पांच आरोपी गिरफ्तार
मामले में अब तक हिमांशु अग्रवाल, इकरार, शामिन, सलुआ उर्फ मुकीम और आशीष समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां इन लोगों के बीच दवाओं की खरीद, परिवहन, भंडारण और सप्लाई के संबंधों की जांच कर रही हैं।
हिमांशु अग्रवाल को इस मामले का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। उसके खिलाफ पहले भी उत्तर प्रदेश में दवाइयों से जुड़े मामले दर्ज हो चुके हैं।
पहले भी 1 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का आरोप
हिमांशु अग्रवाल का नाम इससे पहले अगस्त 2025 के आगरा नकली दवा मामले में सामने आया था। उस कार्रवाई के दौरान उस पर एसटीएफ अधिकारियों को कार्रवाई से बचने के लिए ₹1 करोड़ की रिश्वत देने की पेशकश करने का आरोप लगा था।
रिपोर्टों के अनुसार उस समय अधिकारियों ने रुपये से भरा बैग जब्त किया था और हिमांशु को गिरफ्तार किया गया था। बाद में वह दिसंबर 2025 में जमानत पर बाहर आया था।
इसलिए मौजूदा भरतपुर मामले में ₹1 करोड़ रिश्वत का जिक्र पिछले आगरा केस के संदर्भ में है, न कि यह दावा कि उसने भरतपुर के अधिकारियों को अभी ₹1 करोड़ की रिश्वत दी थी।
दवाइयां जलाने का वीडियो भी मिला
जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी सलुआ उर्फ मुकीम के मोबाइल से कुछ वीडियो मिलने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार एक वीडियो में दवाइयों पर डीजल डालकर उन्हें जलाते हुए दिखाया गया है। वीडियो की तारीख 27 सितंबर बताई गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दवाइयों को जलाने की जरूरत क्यों पड़ी और इसका कुएं में छिपाए गए स्टॉक से क्या संबंध था।
एक्सपायरी दवाओं को लेकर भी जांच
कुएं से बरामद स्टॉक में कुछ एक्सपायरी दवाइयां मिलने की बात भी सामने आई है। अधिकारियों को यह आशंका है कि कहीं एक्सपायरी दवाओं को दोबारा बाजार में बेचने के लिए उनकी तारीख बदलने या अन्य तरीके से इस्तेमाल करने की योजना तो नहीं थी।
हालांकि यह फिलहाल जांच का विषय है, इसकी पुष्टि अंतिम जांच और दस्तावेजों से ही होगी। विभाग निर्माता कंपनियों से बैच और सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड भी जुटा रहा है।
अब आगे क्या होगी कार्रवाई?
औषधि नियंत्रण विभाग दवाओं की वास्तविकता और पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने में जुटा है। यह भी जांच की जा रही है कि दवाइयां कहां से खरीदी गईं, किसके जरिए राजस्थान पहुंचीं और इन्हें खटनावाली गांव के सूखे कुएं में क्यों रखा गया।
यदि जांच में दवाइयां नकली, मिलावटी, एक्सपायरी डेट से छेड़छाड़ वाली या अवैध तरीके से बाजार में बेचने के लिए रखी मिलीं, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
