जोधपुर फैक्ट्री ब्लास्ट: 2 दमकलकर्मियों की मौत, तीसरा 90% झुलसा वेंटिलेटर पर
राजस्थान के जोधपुर में जोधपुर फैक्ट्री ब्लास्ट हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। बासनी औद्योगिक क्षेत्र की एक केमिकल फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान हुए जोरदार धमाके में 14 दमकलकर्मी घायल हुए थे। इनमें कई कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए थे। हादसे के बाद इलाज के दौरान अब तक दो दमकलकर्मियों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल फायर फाइटर का इलाज जारी है।
शुरुआत में गंभीर रूप से झुलसे तीन दमकलकर्मियों को वेंटिलेटर पर रखा गया था। छह गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए जयपुर के SMS अस्पताल भी भेजा गया था।

कैसे हुआ जोधपुर फैक्ट्री ब्लास्ट?
यह हादसा 23 सितंबर की शाम बासनी औद्योगिक क्षेत्र की गणेश नगर स्थित एक हस्तशिल्प/केमिकल फैक्ट्री में हुआ। फैक्ट्री में शाम करीब 5:30 बजे आग लगने की सूचना मिली थी।
आग बुझाने के लिए अलग-अलग फायर स्टेशनों से करीब 10 दमकल वाहन मौके पर भेजे गए थे। करीब 35 फायर कर्मचारियों की टीम आग पर काबू पाने में जुटी थी।
इसी दौरान फैक्ट्री परिसर में रखे ज्वलनशील केमिकल के ड्रमों में आग पहुंच गई और एक के बाद एक धमाके होने लगे। इसी दौरान एक जोरदार विस्फोट हुआ, जिसकी चपेट में वहां मौजूद दमकलकर्मी आ गए।
14 दमकलकर्मी हुए थे घायल
धमाके में कुल 14 दमकलकर्मी घायल हुए थे। शुरुआती मेडिकल जानकारी के मुताबिक इनमें से आठ कर्मचारी 50 प्रतिशत से ज्यादा झुलसे थे।
घायलों को पहले AIIMS जोधपुर ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से झुलसे कर्मचारियों को महात्मा गांधी अस्पताल की बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए अलग बर्न ICU की व्यवस्था की गई थी और मेडिकल टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी।
छह गंभीर दमकलकर्मियों को जयपुर भेजा गया
घटना के अगले दिन छह गंभीर रूप से घायल दमकलकर्मियों को जोधपुर से जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल रेफर किया गया।
घायलों को जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए यातायात पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया। अलग-अलग एंबुलेंस में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी मौजूद था।
उस समय महात्मा गांधी अस्पताल की ओर से बताया गया था कि सात अन्य घायल कर्मचारियों का जोधपुर में इलाज चल रहा था और उनमें से तीन की हालत गंभीर थी।
इलाज के दौरान प्रीतेश की मौत
हादसे में गंभीर रूप से झुलसे फायर फाइटर प्रीतेश प्रजापत की 26 सितंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद परिवार में शोक की स्थिति बन गई। घटना के बाद फायर विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने भी दुख जताया।
90 प्रतिशत झुलसे दूसरे फायर फाइटर ने भी दम तोड़ा
28 सितंबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, हादसे में करीब 90 प्रतिशत झुलसे फायर फाइटर प्रीतेश परमार का भी निधन हो गया। उनके पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया और फायर सर्विस के फ्लैग के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
इस तरह हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल दमकलकर्मियों में से दो की मौत की पुष्टि करने वाली रिपोर्टें सामने आ चुकी हैं।
तीसरे गंभीर दमकलकर्मी की हालत चिंताजनक
हादसे के बाद अस्पताल से सामने आई जानकारी के अनुसार तीन गंभीर रूप से घायल दमकलकर्मियों को वेंटिलेटर पर रखा गया था। इनमें से एक कर्मचारी करीब 90 प्रतिशत तक झुलसा था।
गंभीर जलने की चोटों के कारण ऐसे मरीजों को लंबे और विशेषज्ञ उपचार की जरूरत होती है। अस्पताल में बर्न यूनिट और ICU में डॉक्टरों की विशेष टीम इलाज में जुटी थी।
फैक्ट्री में ज्वलनशील केमिकल क्यों रखे थे?
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने फैक्ट्री में रखे केमिकल तथा उनके भंडारण को लेकर जांच शुरू की।
पुलिस के अनुसार यह पता लगाया जा रहा है कि फैक्ट्री में किस प्रकार के केमिकल रखे गए थे, उन्हें वहां रखने की अनुमति थी या नहीं और सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
पुलिस ने फैक्ट्री के मालिक के खिलाफ मामला भी दर्ज किया है। फैक्ट्री के मालिकाना हक, पंजीकरण और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
रिहायशी इलाके में चल रही थी फैक्ट्री
रिपोर्टों के मुताबिक जिस जगह आग लगी, वह रिहायशी क्षेत्र के आसपास स्थित थी। आग और धमाकों के खतरे को देखते हुए आसपास के लोगों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
आग की तीव्रता के कारण आसपास के कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी।
पत्थर गिरने से केमिकल ड्रम फटने की बात भी सामने आई
PTI की रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि आग बुझाने के दौरान फैक्ट्री की छत से एक पत्थर नीचे रखे केमिकल ड्रम पर गिरा और इसके बाद विस्फोट हुआ। हालांकि, हादसे के अंतिम कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
प्रशासन ने शुरू की जांच
घटना के बाद जोधपुर कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर, नगर निगम आयुक्त और मेडिकल कॉलेज के अधिकारी अस्पताल पहुंचे थे। अधिकारियों ने घायलों के इलाज की स्थिति की जानकारी ली और गंभीर मरीजों के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
साथ ही फैक्ट्री में आग लगने, केमिकल के भंडारण और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की गई है।
दमकलकर्मियों ने जोखिम लेकर बुझाई थी आग
इस हादसे में घायल हुए दमकलकर्मी उस समय अपनी ड्यूटी निभा रहे थे और फैक्ट्री में लगी आग को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे। केमिकल ड्रमों में विस्फोट के बाद स्थिति अचानक बेहद खतरनाक हो गई।
घटना ने औद्योगिक और रिहायशी इलाकों में ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण से जुड़े सुरक्षा सवालों को भी सामने ला दिया है।

निष्कर्ष
जोधपुर फैक्ट्री ब्लास्ट में 23 सितंबर को 14 दमकलकर्मी घायल हुए थे। इनमें कई कर्मचारी 50 प्रतिशत से ज्यादा झुलसे थे और छह गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए जयपुर भेजा गया था।
इलाज के दौरान पहले फायर फाइटर प्रीतेश प्रजापत की मौत की रिपोर्ट सामने आई और 28 सितंबर को करीब 90 प्रतिशत झुलसे दूसरे फायर फाइटर प्रीतेश परमार की मौत की भी जानकारी मिली। तीसरे गंभीर दमकलकर्मी की स्थिति को लेकर शुरुआती अस्पताल रिपोर्ट में उसे वेंटिलेटर पर बताया गया था।
फिलहाल हादसे की परिस्थितियों, फैक्ट्री में रखे केमिकल और सुरक्षा नियमों के पालन की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोट के कारण और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।