कांग्रेस नेता अमित धारीवाल बोले- मेयर में क्या लक्खण है: पार्षदों से कहा- मेयर से ज्यादा आप जानते हो; काम न हो तो अधिकारियों को घेरो
कोटा नगर निगम में मेयर चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर पार्षदों की भूमिका और नगर निगम के कामकाज को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस नेता अमित धारीवाल ने पार्षदों से बातचीत करते हुए मेयर की भूमिका को लेकर सवाल उठाए और कहा कि शहर के कामों को लेकर पार्षद अपने क्षेत्र की समस्याओं को सबसे ज्यादा जानते हैं।
बताया गया कि अमित धारीवाल ने पार्षदों से कहा कि उन्हें अपने वार्ड की समस्याओं और काम की जरूरतों की जानकारी मेयर से ज्यादा है। उन्होंने पार्षदों को अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने और विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगने की बात कही।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कोटा नगर निगम में मेयर का चुनाव हो चुका है और भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी मेयर चुनी गई हैं। चुनाव में उन्हें 65 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की सुनीता कुमारी सुमन को 35 वोट मिले। इसके साथ ही कोटा नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बन गया।
पार्षदों से कहा- अपने क्षेत्र का काम खुद देखो
अमित धारीवाल की ओर से पार्षदों को यह संदेश दिए जाने की बात सामने आई कि अपने-अपने वार्ड में विकास कार्यों की स्थिति पर नजर रखें। यदि किसी काम में परेशानी आती है या अधिकारी काम नहीं करते हैं तो संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाए।
उन्होंने पार्षदों को यह भी कहा कि वार्ड की वास्तविक स्थिति को पार्षद खुद ज्यादा अच्छी तरह जानते हैं। सड़क, नाली, सफाई, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर पार्षदों को लगातार सक्रिय रहने की जरूरत है।
इस तरह की राजनीतिक बातचीत का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि नगर निगम के निर्वाचित पार्षद सीधे अपने वार्ड की जनता से जुड़े होते हैं। इसलिए स्थानीय समस्याओं को निगम प्रशासन तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
‘मेयर में क्या लक्खण है’ वाली टिप्पणी चर्चा में
अमित धारीवाल के बयान में “मेयर में क्या लक्खण है” वाली टिप्पणी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। उन्होंने पार्षदों से कहा कि वे अपने वार्ड और वहां के कामों को लेकर ज्यादा जानकारी रखते हैं।
हालांकि इस टिप्पणी को किस संदर्भ में और किन शब्दों में कहा गया, इसका पूरा आधिकारिक वीडियो या बयान उपलब्ध स्रोतों में स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो पाया है। इसलिए इसे अमित धारीवाल की ओर से मेयर के खिलाफ किसी औपचारिक आरोप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उनकी बातचीत का मुख्य फोकस पार्षदों की भूमिका और अधिकारियों से काम कराने पर बताया जा रहा है।
कोटा में बदल गया नगर निगम का राजनीतिक समीकरण
कोटा नगर निगम में हाल ही में हुए मेयर चुनाव ने राजनीतिक समीकरण बदल दिया है। 25 सितंबर को हुए चुनाव में भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी ने कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता कुमारी सुमन को 30 वोटों से हराया।
नगर निगम के 100 पार्षदों में से गोस्वामी को 65 और कांग्रेस प्रत्याशी को 35 वोट मिले। रिपोर्टों में भाजपा के पक्ष में कांग्रेस और समर्थित पार्षदों की क्रॉस वोटिंग की बात भी सामने आई। भाजपा के पास अपने 57 पार्षद और दो निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बताया गया था, लेकिन अंतिम मतदान में उसके प्रत्याशी को 65 वोट मिले।
इस परिणाम के बाद कांग्रेस के सामने अब विपक्ष में रहकर नगर निगम के कामकाज पर नजर रखने की चुनौती है।
चुनाव से पहले भी अमित धारीवाल की रही सक्रिय भूमिका
मेयर चुनाव के दिन भी अमित धारीवाल कांग्रेस पार्षदों के साथ नजर आए थे। रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के 39 पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद शहर अध्यक्ष राखी गौतम, पीसीसी महासचिव अमित धारीवाल और पूर्व प्रधान नईमुद्दीन गुड्डू के साथ मतदान केंद्र पहुंचे थे।
मतदान से पहले कांग्रेस पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश की गई थी। इसके बावजूद परिणाम में कांग्रेस के पक्ष में 35 वोट ही आए।
चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के अंदर क्रॉस वोटिंग को लेकर भी चर्चा हुई। कुछ रिपोर्टों में पार्टी की ओर से इस मामले में आंतरिक कार्रवाई और जांच की बात सामने आई थी।
अब पार्षदों के सामने क्या चुनौती है?
नगर निगम में मेयर और बोर्ड बदलने के बाद विपक्षी पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। कांग्रेस पार्षदों के सामने अपने-अपने वार्ड में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने के साथ-साथ निगम प्रशासन से काम कराने की चुनौती रहेगी।
सड़क की खराब स्थिति, सफाई व्यवस्था, सीवरेज, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य स्थानीय सुविधाएं ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें पार्षद नगर निगम की बैठकों और अधिकारियों के सामने उठा सकते हैं।
अमित धारीवाल की ओर से पार्षदों को अधिकारियों से काम कराने के लिए सक्रिय रहने का संदेश इसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
‘काम नहीं हो तो अधिकारियों को घेरो’
अमित धारीवाल ने पार्षदों से कहा कि अगर उनके क्षेत्र में काम नहीं हो रहा है तो उन्हें अधिकारियों के सामने मजबूती से अपनी बात रखनी चाहिए।
इसका मतलब यह है कि पार्षद केवल मेयर या राजनीतिक नेतृत्व पर निर्भर रहने के बजाय निगम के संबंधित अधिकारियों के साथ सीधे समन्वय करें और काम की प्रगति की जानकारी लें।
नगर निगम की व्यवस्था में मेयर के साथ कमिश्नर और अलग-अलग विभागों के अधिकारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसी विकास कार्य के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया, स्वीकृति, बजट और संबंधित विभाग की कार्रवाई जरूरी होती है।
यही कारण है कि किसी वार्ड में काम नहीं होने पर केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय संबंधित विभाग से काम की स्थिति और देरी का कारण पूछना भी पार्षद की जिम्मेदारी का हिस्सा बन सकता है।
कांग्रेस के लिए विपक्ष की नई भूमिका
कोटा नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनने के बाद कांग्रेस अब विपक्ष की भूमिका में है। ऐसे में कांग्रेस पार्षदों के लिए वार्ड स्तर पर जनता की समस्याओं को उठाना पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
मेयर चुनाव में कांग्रेस के 35 वोट आने के बाद पार्टी के सामने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती भी है। चुनाव से पहले कांग्रेस के पास 39 पार्षद और एक निर्दलीय के समर्थन का दावा था, लेकिन मतदान के अंतिम आंकड़ों में यह संख्या 35 रह गई।
ऐसे में अमित धारीवाल का पार्षदों को सक्रिय रहने और अपने वार्ड के कामों पर ध्यान देने का संदेश चुनाव के बाद की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
मेयर की भूमिका और पार्षदों की जिम्मेदारी अलग-अलग
नगर निगम के कामकाज में मेयर का पद महत्वपूर्ण है, लेकिन शहर के हर वार्ड के स्थानीय कामों के लिए पार्षद भी सीधे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होते हैं। वार्ड की समस्याओं को निगम प्रशासन तक पहुंचाना और जनता के साथ संपर्क बनाए रखना उनकी भूमिका का हिस्सा है।
इसलिए अमित धारीवाल की टिप्पणी को पार्षदों की स्थानीय भूमिका पर जोर देने के रूप में भी देखा जा सकता है। हालांकि मेयर और पार्षदों के अधिकार तथा जिम्मेदारियां नगर निगम के कानून और प्रशासनिक नियमों के अनुसार तय होती हैं।
कोटा में अब विकास कार्यों पर रहेगी नजर
मेयर चुनाव के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा निगाह नगर निगम के कामकाज पर रहेगी। नई मेयर अनुसुइया गोस्वामी ने चुनाव के बाद शहर को स्वच्छ बनाने को अपनी प्राथमिकताओं में बताया है और इंदौर की तर्ज पर सफाई व्यवस्था की बात कही है।
वहीं विपक्षी कांग्रेस पार्षदों की भूमिका यह देखने की होगी कि उनके वार्ड में सड़क, सफाई, सीवरेज, लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम किस गति से होते हैं।
यदि किसी वार्ड में काम अटकता है तो पार्षद संबंधित विभाग के अधिकारियों के सामने मुद्दा उठा सकते हैं। इसी दिशा में अमित धारीवाल ने भी पार्षदों को सक्रिय रहने का संदेश दिया है।
आगे कोटा की राजनीति में क्या होगा?
मेयर चुनाव के बाद कोटा नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बन चुका है। कांग्रेस के सामने अब विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका तय करने और अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती है।
अमित धारीवाल का पार्षदों से संवाद इसी बदलते राजनीतिक माहौल के बीच हुआ है। उनका जोर पार्षदों को अपने-अपने वार्ड के कामों पर ध्यान देने और अधिकारियों से जवाब लेने पर बताया गया है।
अब आने वाले समय में नगर निगम की बैठकों, विकास कार्यों और वार्ड स्तर की समस्याओं पर कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।
फिलहाल कोटा नगर निगम में मेयर पद पर भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी के चुने जाने के बाद नया बोर्ड काम शुरू कर चुका है। कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए स्थानीय मुद्दों को किस तरह उठाती है, यह आगे की नगर निगम राजनीति में महत्वपूर्ण रहेगा।
