उत्तराखंड में 136 पर्वतारोही फंसे, यूपी में पुल डूबे; बिहार में 82 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित
उत्तर भारत में लगातार खराब मौसम ने कई राज्यों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तराखंड में ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों में भारी बर्फबारी के कारण 136 ट्रेकर्स, पर्वतारोही और सपोर्ट स्टाफ फंसे हुए हैं। प्रशासन ने मौसम में सुधार होते ही हेलिकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज करने की तैयारी की है। उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में कुल 179 लोगों के फंसे होने की सूचना है। इनमें 136 उत्तरकाशी और 43 बागेश्वर जिले में हैं।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। गोंडा और बदायूं में छोटे पुलों के ऊपर से पानी बहने की रिपोर्ट है। बिहार में नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और सुपौल तथा पश्चिम चंपारण में करीब 82 हजार लोग प्रभावित बताए गए हैं।

उत्तराखंड में 136 लोग ऊंचाई वाले इलाकों में फंसे
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में 136 ट्रेकर्स, पर्वतारोही और सपोर्ट स्टाफ अलग-अलग अभियानों पर हैं। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
ताजा जानकारी के अनुसार 18 लोग कालिंदी पास बेस कैंप और 28 लोग ऑडेन कोल बेस कैंप के आसपास हैं। मौसम में कुछ सुधार के बाद प्रशासन ने फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलिकॉप्टर रेस्क्यू की तैयारी शुरू की है।
बागेश्वर जिले में भी तीन अलग-अलग ट्रेकिंग समूहों के 43 लोग अलग-अलग स्थानों पर फंसे हैं। प्रशासन ने दोनों जिलों में अलग-अलग रेस्क्यू प्लान तैयार किए हैं।
खराब मौसम के कारण हेलिकॉप्टर रेस्क्यू में चुनौती
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी और खराब मौसम के कारण रेस्क्यू अभियान आसान नहीं है। अधिकारियों के अनुसार मौसम में पर्याप्त सुधार होने के बाद हेलिकॉप्टर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण चारधाम यात्रा भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद राफ्टिंग गतिविधियों को भी रोक दिया गया है। राज्य के कई इलाकों में भूस्खलन से सड़कें प्रभावित हुई हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार पिथौरागढ़ के मुन्ना बैंड के पास भूस्खलन के कारण रास्ता बंद हुआ था, जिससे करीब 500 यात्रियों को परेशानी हुई। SDRF ने लोगों को रस्सियों की मदद से सुरक्षित पार कराया।
केदारनाथ मार्ग पर भी बारिश का असर
भारी बारिश और भूस्खलन के कारण केदारनाथ ट्रेक रूट भी प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार चिरबासा इलाके में भूस्खलन की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हुई और एक व्यक्ति घायल हुआ।
पौड़ी जिले में बारिश के कारण मकान ढहने से भी एक व्यक्ति की मौत की सूचना है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी।
प्रशासन की ओर से लोगों और पर्यटकों को मौसम तथा सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी गई है।
उत्तर प्रदेश में गोंडा और बदायूं के पुल डूबे
उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार गोंडा में टेढ़ी नदी के उफान के बाद चंदवतपुर घाट का पुल पानी में डूब गया। पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ और प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही रोकने के निर्देश दिए।
बदायूं में भी लगातार बारिश के बाद अरिल नदी का पुल जलमग्न होने की जानकारी सामने आई है। कई निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश के कारण प्रदेश के कई जिलों में स्कूलों को भी बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी कर रहा है।
यूपी में भारी बारिश से हालात बिगड़े
उत्तर प्रदेश में 25 सितंबर की सुबह से 27 सितंबर की सुबह तक 48 घंटे में 97.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि का संचयी औसत 4.5 मिलीमीटर बताया गया। इस दौरान बारिश से जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत और 46 लोगों के घायल होने की जानकारी राज्य के राहत आयुक्त के हवाले से सामने आई है। 1,020 से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचने की भी रिपोर्ट है।
इससे पहले राज्य के 26 जिलों में बाढ़ की स्थिति से करीब 3.53 लाख लोगों के प्रभावित होने और 17 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने की जानकारी भी अधिकारियों ने दी थी।
बिहार में 82 हजार लोगों पर बाढ़ का असर
बिहार के सीमावर्ती इलाकों में नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। गंडक, कोसी और बागमती जैसी नदियों में पानी बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार सुपौल और पश्चिम चंपारण जिले के कुल 11 प्रखंडों की 23 ग्राम पंचायतों में करीब 82,000 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए नावों को लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 173 नावें लोगों की आवाजाही और सुरक्षित निकासी के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। इसके अलावा सामुदायिक रसोई के माध्यम से प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाया जा रहा है।
गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा
पश्चिम चंपारण में गंडक नदी की स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय बनी हुई है। वाल्मीकिनगर बैराज के पास गंडक का जलस्राव 4,79,100 क्यूसेक दर्ज किया गया, जिसे इस साल का अब तक का सबसे अधिक प्रवाह बताया गया है।
वहीं वीरपुर बैराज के पास कोसी का जलस्राव भी 2,09,085 क्यूसेक दर्ज किया गया। कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं, जिससे प्रशासन ने निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
राहत और बचाव के लिए टीमें तैनात
बिहार में प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए SDRF और NDRF की टीमें तैनात की गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संवेदनशील जिलों में SDRF की 27 और NDRF की 10 टीमें लगाई गई हैं।
प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर नावों के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाए और भोजन तथा जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाए।
उत्तर भारत में मौसम को लेकर अलर्ट
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार में बारिश तथा बाढ़ की अलग-अलग परिस्थितियां बनी हुई हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और भूस्खलन से यात्रियों के लिए खतरा बढ़ा है, जबकि मैदानी इलाकों में नदियों के बढ़ते जलस्तर से गांवों और सड़कों पर पानी पहुंच रहा है।
प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करें।

निष्कर्ष
लगातार बारिश और बर्फबारी ने उत्तर भारत के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित किया है। उत्तराखंड में 136 लोग ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फंसे हैं और कुल 179 ट्रेकर्स, पर्वतारोही व सपोर्ट स्टाफ के लिए रेस्क्यू की तैयारी चल रही है। उत्तर प्रदेश में गोंडा और बदायूं जैसे जिलों में पुलों पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। वहीं बिहार के सुपौल और पश्चिम चंपारण में करीब 82 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
ऐसे मौसम में यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि वे बिना प्रशासन की अनुमति या मौसम की जानकारी के जोखिम वाले इलाकों में जाने से बचें। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।