लोकमंथन यात्रा जयपुर: दीया कुमारी ने गोविंददेवजी मंदिर से किया शुभारंभ, हवा महल से होते हुए पहुंची महारानी कॉलेज
जयपुर न्यूज़: लोकमंथन-2026 के तहत सोमवार, 21 सितंबर को जयपुर महानगर में ‘लोकमंथन यात्रा’ का आयोजन किया गया। यात्रा की शुरुआत सुबह करीब 8 बजे श्री गोविंद देवजी मंदिर से हुई। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने यात्रा को रवाना किया। इसके बाद यात्रा जयपुर के प्रमुख ऐतिहासिक मार्गों से होते हुए महारानी कॉलेज पहुंची।
यात्रा का उद्देश्य राजस्थान की लोक संस्कृति, लोक परंपराओं, पारंपरिक खेलों, लोक कलाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा की विभिन्न अभिव्यक्तियों को सामने लाना रहा। यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जयपुर की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।

गोविंददेवजी मंदिर से शुरू हुई यात्रा
लोकमंथन यात्रा का शुभारंभ श्री गोविंद देवजी मंदिर से किया गया। कार्यक्रम के अनुसार यात्रा सुबह 8 बजे शुरू हुई और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने इसे रवाना किया।
शुरुआत से ही यात्रा में पारंपरिक खेलों के खिलाड़ी और अखाड़ों के पहलवान शामिल रहे। मलखम्ब तथा अन्य पारंपरिक खेलों के प्रदर्शन को भी यात्रा का प्रमुख आकर्षण बताया गया।
यात्रा में लोक परंपरा से जुड़े ध्वज, लोक वाद्य यंत्र, पारंपरिक परिधान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल रहीं। इससे जयपुर की सड़कों पर राजस्थान की लोक संस्कृति के अलग-अलग रंग देखने को मिले।
हवा महल और बड़ी चौपड़ से होकर गुजरी यात्रा
गोविंददेवजी मंदिर से रवाना होने के बाद लोकमंथन यात्रा हवा महल, बड़ी चौपड़ और अल्बर्ट हॉल होते हुए महारानी कॉलेज की ओर बढ़ी। जयपुर के इन प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों से गुजरने के कारण यात्रा को शहर की पारंपरिक और ऐतिहासिक पहचान से भी जोड़ा गया।
यात्रा के दौरान लोक कलाकारों और प्रतिभागियों की पारंपरिक प्रस्तुतियां भी देखने को मिलीं। आयोजन में राजस्थान की लोक कलाओं और परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
महारानी कॉलेज में हुआ पारंपरिक स्वागत
यात्रा के महारानी कॉलेज पहुंचने के बाद वहां सुबह करीब 10 बजे स्वागत कार्यक्रम और सांस्कृतिक गतिविधियां शुरू हुईं। कॉलेज परिसर में भारतीय रीति-रिवाज और पारंपरिक वेशभूषा के साथ स्वागत की व्यवस्था की गई। छात्राओं की ओर से तिलक, कच्छी घोड़ी नृत्य, शहनाई वादन और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत कार्यक्रम रखा गया।
महारानी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम केवल स्वागत तक सीमित नहीं रहा। यहां लोक नृत्य, लोकगीत, लोक साहित्य और राजस्थान की विभिन्न लोक परंपराओं से जुड़े कई कार्यक्रमों की योजना बनाई गई थी।
लोक नृत्य और लोक कलाओं की प्रस्तुतियां
मुख्य सभागार में वैदिक मंगलाचरण के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें मांड़ गायन, भवई, चरी, कालबेलिया, कच्छी घोड़ी और कठपुतली नृत्य जैसी राजस्थान की प्रसिद्ध लोक कलाओं को शामिल किया गया।
इसके अलावा लोक साहित्य और लोक संस्कृति से जुड़े विषयों पर व्याख्यान और संवाद भी रखे गए। ‘लोक में भारत’ तथा ‘लोक साहित्य और संस्कृति’ जैसे विषयों पर चर्चा कार्यक्रम का हिस्सा रहे।
लोकदेवताओं और लोकनायकों की झांकियां भी रहीं आकर्षण
लोकमंथन यात्रा में राजस्थान की लोक आस्था और परंपराओं से जुड़े विभिन्न सांस्कृतिक प्रतीकों को भी प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में बाबा रामदेवजी, वीर तेजाजी और संत रविदासजी से जुड़ी झांकियां शामिल की गईं।
इसके अलावा महारानी कॉलेज परिसर में राजस्थान की लोक परंपराओं और वीर-वीरांगनाओं से संबंधित प्रदर्शनियां भी लगाई गईं।
तीन अलग-अलग मंचों पर कार्यक्रम
महारानी कॉलेज परिसर में मुख्य सभागार के अलावा सेमिनार हॉल और खुले मंच पर भी अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की गईं।
सेमिनार हॉल में जयपुर की लोक कला एवं संस्कृति पर प्रश्नोत्तरी, लोक परंपराओं पर संवाद और ‘हम भारत के लोग—हमारी भाषा, हमारी पहचान’ विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई।
खुले मंच पर संस्कृत संभाषण, लोक कथा, लोक कविता, लोक रंग और लोक स्मृतियों से जुड़े कार्यक्रमों के साथ ‘हम भारत के लोग : संविधान और लोक संस्कृति का समन्वय’ विषय पर भी कार्यक्रम रखा गया।
लोक कला से लेकर पारंपरिक खेलों तक का प्रदर्शन
लोकमंथन यात्रा और महारानी कॉलेज के कार्यक्रम में केवल नृत्य-संगीत ही नहीं, बल्कि पारंपरिक खेलों और भारतीय ज्ञान परंपरा को भी स्थान दिया गया।
कॉलेज परिसर में लोक कला, लोक विज्ञान, भारतीय संविधान, गुरुकुल एवं भारतीय शिक्षा परंपरा, राजस्थान के वीर-वीरांगनाओं और औषधीय पौधों से संबंधित प्रदर्शनियां लगाई गईं।
खेल मैदान में कबड्डी, रस्साकशी और तीरंदाजी जैसी पारंपरिक खेल गतिविधियां भी कार्यक्रम का हिस्सा रहीं।
लोकमंथन 2026 का व्यापक संदर्भ
यह आयोजन लोकमंथन-2026 से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जयपुर में आयोजित यह यात्रा लोक संस्कृति, लोक परंपरा और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को आम लोगों तथा विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
लोकमंथन यात्रा के माध्यम से राजस्थान के लोक नृत्य, संगीत, वेशभूषा, पारंपरिक खेल, लोक साहित्य और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक परंपराओं को एक ही आयोजन में प्रस्तुत किया गया।

जयपुर में दिखी राजस्थान की सांस्कृतिक झलक
गोविंददेवजी मंदिर से शुरू होकर हवा महल, बड़ी चौपड़ और अल्बर्ट हॉल होते हुए महारानी कॉलेज तक पहुंची लोकमंथन यात्रा ने जयपुर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम से जोड़ा।
यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य, लोक नृत्य, झांकियों और पारंपरिक खेलों के जरिए राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता को सामने रखा गया। महारानी कॉलेज में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों ने इस आयोजन को आगे बढ़ाया, जहां लोक कला, साहित्य, शिक्षा परंपरा और पारंपरिक खेलों से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं।