
डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग दंपती से 2 करोड़ की ठगी: 20 दिन तक वीडियो कॉल पर रखा बंधक, बीकानेर से 2 आरोपी गिरफ्तार
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया, जहां ठगों ने एक बुजुर्ग दंपती को करीब 20 दिन तक कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 2 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठग ली। आरोपियों ने खुद को पुलिस, आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का अधिकारी बताकर दंपती को गिरफ्तारी और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामले में फंसाने का डर दिखाया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ठगों ने वीडियो कॉल और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बुजुर्ग दंपती पर लगातार मानसिक दबाव बनाया। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बीकानेर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन खातों में पहुंची और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
फोन कॉल से शुरू हुआ 20 दिन तक चलने वाला डर
रिपोर्ट के अनुसार, 17 अगस्त को बुजुर्ग दंपती के पास एक फोन कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस निरीक्षक बताया और दावा किया कि उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ है। इसके बाद कथित तौर पर दंपती की वीडियो कॉल फर्जी ATS अधिकारियों से कराई गई।
ठगों ने दंपती पर आरोप लगाया कि उनके बैंक खातों का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों में हुआ है और उनका नाम आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने वालों की सूची में शामिल है। गिरफ्तारी और जेल जाने का डर दिखाकर उन्हें अपने निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया।
इसके बाद दंपती को लगातार वीडियो कॉल पर रहने और परिवार के दूसरे सदस्यों से घटना के बारे में बात न करने के लिए कहा गया। करीब 20 दिन तक चले इस दबाव के दौरान ठगों ने कथित जांच और पैसों के सत्यापन का बहाना बनाकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई।
फर्जी सरकारी दस्तावेजों से जीता भरोसा
साइबर ठगों ने दंपती का भरोसा जीतने के लिए सरकारी एजेंसियों के नाम और पदों का दुरुपयोग किया। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों ने व्हाट्सऐप पर फर्जी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट और कथित बैंकिंग प्रमाण-पत्र भेजे।
इन दस्तावेजों में सरकारी मुहरों और अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल किया गया, ताकि दंपती को लगे कि उनके खिलाफ वास्तव में कोई जांच चल रही है। ठगों ने इसी डर का फायदा उठाकर उन्हें अपनी बातों पर विश्वास करने के लिए मजबूर किया।
ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर पुलिस, CBI, ED, NIA या RBI का अधिकारी बनकर संपर्क करते हैं। वे गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या संदिग्ध बैंक लेन-देन की कहानी बनाते हैं और फिर जांच से बचाने या रकम का सत्यापन करने के नाम पर पैसे मांगते हैं।
दो करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम कैसे ठगी गई?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दंपती से 2 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई। पुलिस ने लेन-देन की जांच करते हुए उन खातों की पड़ताल की, जिनमें ठगी की रकम पहुंची थी।
जांच में बीकानेर के राजूराम उर्फ राजेश और रतना राम के बैंक खातों का इस्तेमाल सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, राजूराम ने अपना बैंक खाता, चेकबुक और एटीएम कार्ड उपलब्ध कराया था। उसके खाते में आई रकम निकालकर आगे दूसरे व्यक्ति को दी गई। इसके बदले उसे कमीशन मिलने की बात भी सामने आई।
दूसरे आरोपी रतना राम के खाते से भी चेक के जरिए रकम निकाले जाने की जानकारी मिली। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की जांच आगे बढ़ाई।
गिरफ्तारी की स्थिति: उपलब्ध रिपोर्ट में इस खास ₹2 करोड़ वाले मामले में बीकानेर से दो आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि है। तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि करने वाली विश्वसनीय रिपोर्ट उपलब्ध नहीं मिली है, इसलिए इस लेख में तीन गिरफ्तारियों का दावा नहीं किया गया है।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा ठगी की रकम का लेन-देन और बैंक खातों के इस्तेमाल का तरीका है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कुछ लोगों ने अपने खाते, चेकबुक और एटीएम कार्ड दूसरे लोगों को उपलब्ध कराए। इसके बदले कमीशन लेने का आरोप है।
साइबर ठगी में ऐसे बैंक खाते अक्सर रकम प्राप्त करने और उसे आगे निकालने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इससे मुख्य आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किन-किन खातों से होकर गुजरी और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।
राजस्थान में ऑनलाइन ठगी के दूसरे मामलों में भी पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच के आधार पर कार्रवाई की है। उदाहरण के लिए, जोधपुर में पुलिसकर्मी से 16 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी के मामले में भी साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन तरीके से पीड़ित को अपने जाल में फंसाया था। हालांकि, वह इस बुजुर्ग दंपती के मामले से अलग घटना है।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक धोखाधड़ी का तरीका है। भारतीय कानून में वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को इस तरह गिरफ्तार करके घर में रखने की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं है।
इस तरीके में ठग खुद को किसी सरकारी जांच एजेंसी, पुलिस या अदालत का अधिकारी बताते हैं। वे पीड़ित को गंभीर अपराध में फंसाने, गिरफ्तारी करने या संपत्ति जब्त करने की धमकी देते हैं। इसके बाद जांच या सत्यापन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाते हैं।
ठग कई बार पीड़ित को परिवार, दोस्तों और पुलिस से संपर्क करने से भी रोकते हैं। लगातार वीडियो कॉल पर रखने का मकसद व्यक्ति को घबराहट में रखना और उसे स्वतंत्र रूप से सलाह लेने का मौका न देना होता है।
डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए क्या करें?
- घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें: कोई भी असली पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर खाते में पैसे जमा करने का निर्देश नहीं देती।
- कॉल की पुष्टि करें: फोन करने वाले की पहचान पर भरोसा करने से पहले संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें।
- परिवार को जानकारी दें: किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर परिजनों से बात करना बंद न करें।
- पैसे और बैंक जानकारी साझा न करें: OTP, PIN, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- तुरंत शिकायत करें: साइबर ठगी होने पर भारत की साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
यदि रकम ट्रांसफर हो चुकी है, तो बैंक को तुरंत सूचित करें और ट्रांजेक्शन की जानकारी सुरक्षित रखें। जल्दी शिकायत करने से संबंधित खातों में रकम रोकने की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
निष्कर्ष
जयपुर के बुजुर्ग दंपती से करीब 20 दिन तक कथित डिजिटल अरेस्ट के जरिए 2 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का मामला साइबर अपराधियों के नए तरीकों को उजागर करता है। ठगों ने सरकारी अधिकारियों का रूप धारण करके दंपती को डराया और फर्जी दस्तावेजों के जरिए उन पर भरोसा करने का दबाव बनाया। पुलिस ने उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार बीकानेर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच जारी है।
लोगों को याद रखना चाहिए कि डिजिटल अरेस्ट कोई वैध कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई व्यक्ति वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या जांच का डर दिखाकर पैसे मांगता है, तो उसकी बातों में आने के बजाय तुरंत परिवार, बैंक और पुलिस से संपर्क करें।
