
राहुल ने 48 में से 14 घंटे सड़क पर बिताए: जमीन पर बैठकर खाना खाया; तीन बार हिरासत में; पिछले 3 साल में सबसे ज्यादा एक्टिव
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पिछले दो दिनों से दिल्ली में लगातार विरोध-प्रदर्शन के केंद्र में रहे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी को लेकर विपक्षी दलों के प्रदर्शन में राहुल गांधी ने लगातार हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने करीब 14 घंटे सड़क और प्रदर्शन स्थल पर बिताए, जमीन पर बैठकर खाना खाया और दो दिनों में कई बार पुलिस हिरासत में लिए गए।
6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने विपक्षी सांसदों को रोक दिया था। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। राहुल करीब 8-9 घंटे तक वहां डटे रहे। बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
7 अक्टूबर को भी राहुल गांधी विपक्षी सांसदों के साथ जंतर-मंतर की ओर रवाना हुए। रास्ते में पुलिस ने बसों को रोक दिया। इसके बाद नेता सड़क पर बैठकर विरोध करने लगे। पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया और बाद में रिहा कर दिया।
48 घंटे में करीब 14 घंटे प्रदर्शन में रहे राहुल
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने 6 और 7 अक्टूबर के बीच 48 घंटे की अवधि में करीब 14 घंटे प्रदर्शन और सड़क पर बिताए। 6 अक्टूबर को वह लंबे समय तक आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे रहे।
धरने के दौरान राहुल गांधी को जमीन पर बैठकर खाना खाते हुए भी देखा गया। उनके साथ प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्ष के कई सांसद मौजूद थे।
6 अक्टूबर के प्रदर्शन में विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। विपक्ष की मांग थी कि उसे चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात का मौका दिया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर कार्रवाई की जाए।
पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शन का स्थान बदल गया और आकाशवाणी भवन परिसर में धरना शुरू हो गया।
जमीन पर बैठकर खाना खाते दिखे राहुल
लंबे धरने के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शन स्थल पर ही खाना खाया। रिपोर्ट के मुताबिक, वह पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर खाना खाते नजर आए।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच कई बार बातचीत हुई। पुलिस की ओर से प्रदर्शन खत्म कर वहां से हटने के लिए कहा गया, लेकिन विपक्षी नेता चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग पर कायम रहे।
करीब 8-9 घंटे के बाद पुलिस ने परिसर खाली कराया और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया।
7 अक्टूबर को फिर सड़क पर उतरे राहुल
6 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद विपक्ष ने अगले दिन भी आंदोलन जारी रखा। 7 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसद जंतर-मंतर की ओर जाने के लिए बसों में रवाना हुए।
रास्ते में पुलिस ने बसों को रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी समेत कई नेता बसों से उतरकर सड़क पर विरोध करने लगे। प्रियंका गांधी और कुछ महिला नेता सड़क पर बैठ गईं।
कुछ समय बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लेकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। PTI के मुताबिक, करीब 90 लोगों को हिरासत में लिया गया और राहुल गांधी को रात करीब 8 बजे के बाद रिहा किया गया।
दो दिनों में कई बार हिरासत
राहुल गांधी की लगातार दो दिनों की गतिविधियों में हिरासत का मुद्दा भी प्रमुख रहा। 6 अक्टूबर को आकाशवाणी भवन परिसर से हिरासत में लिए जाने के बाद 7 अक्टूबर को उन्हें फिर जंतर-मंतर की ओर जाते समय हिरासत में लिया गया।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, 7 अक्टूबर की कार्रवाई दो दिनों में उनकी तीसरी हिरासत थी। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में हिरासत की गिनती घटनाओं और पुलिस कार्रवाई के अलग-अलग चरणों के आधार पर बताई गई है।
इसलिए इसे गिरफ्तारी के बजाय पुलिस हिरासत के रूप में समझना महत्वपूर्ण है। 7 अक्टूबर की हिरासत के बाद राहुल गांधी को रिहा कर दिया गया था।
प्रदर्शन का मुद्दा क्या है?
विपक्षी दल चुनाव आयोग की मतदाता सूची में चल रहे Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं का आरोप है कि वोटर लिस्ट में बदलाव के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।
विपक्ष इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग और केंद्र सरकार विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया का उद्देश्य डुप्लीकेट और अयोग्य नामों को हटाना तथा पात्र मतदाताओं का रिकॉर्ड सुनिश्चित करना है।
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राहुल ने कहा- प्रदर्शन जारी रहेगा
7 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने से पहले राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर पारदर्शी तरीके से स्पष्टीकरण देना चाहिए।
हालांकि चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। इसलिए SIR और वोटर लिस्ट से जुड़े आरोपों को फिलहाल राजनीतिक दलों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पिछले तीन साल में राहुल की सक्रियता पर चर्चा
इन दो दिनों के लगातार प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। उपलब्ध रिपोर्टों में 2026 में उनके कई बड़े सार्वजनिक प्रदर्शनों का उल्लेख किया गया है।
जुलाई 2026 में वह परीक्षा और पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इससे पहले भी उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सांसदों के साथ प्रदर्शन किए हैं। जुलाई में प्रधानमंत्री आवास के पास पेपर लीक के मुद्दे पर हुए प्रदर्शन में भी उन्हें हिरासत में लिया गया था।
इसी वजह से कुछ रिपोर्टों में 2026 को पिछले कुछ वर्षों की तुलना में राहुल गांधी की अधिक सक्रिय राजनीतिक भागीदारी वाला साल बताया गया है। हालांकि “पिछले तीन साल में सबसे ज्यादा एक्टिव” एक मीडिया विश्लेषण/आकलन है, कोई आधिकारिक राजनीतिक रैंकिंग नहीं।
6 और 7 अक्टूबर को क्या हुआ?
6 अक्टूबर 2026:
संसद से चुनाव आयोग की ओर विपक्षी सांसदों ने मार्च शुरू किया। पुलिस ने रास्ता रोका। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंचे और वहां कई घंटे धरना दिया। शाम को पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया।
7 अक्टूबर 2026:
विपक्षी सांसद जंतर-मंतर की ओर बसों से रवाना हुए। पुलिस ने रास्ते में उन्हें रोक दिया। इसके बाद सड़क पर धरना शुरू हुआ। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। राहुल गांधी को बाद में रिहा कर दिया गया।
आगे क्या होगा?
राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने SIR और चुनाव आयोग को लेकर अपना विरोध जारी रखने की बात कही है। दूसरी ओर चुनाव आयोग और सरकार विपक्ष के आरोपों को खारिज कर चुके हैं।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है। मामले में वास्तविक स्थिति चुनाव आयोग की ओर से दिए गए आधिकारिक स्पष्टीकरण और संबंधित दस्तावेजों से और स्पष्ट होगी।
