देश में भारी बारिश का कहर: छत्तीसगढ़ में शराब की बोतलें बहीं, केदारनाथ मार्ग पर 4 हजार श्रद्धालु फंसे

देश के कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से बिगड़े हालात

उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में लगातार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। उत्तराखंड में भारी बारिश के बीच भूस्खलन से केदारनाथ यात्रा मार्ग बाधित हो गया है और करीब 4 हजार श्रद्धालुओं के फंसे होने की खबर है। वहीं उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में करीब 70 घंटे से आंधी-बारिश का दौर जारी रहने से सड़क, बिजली और फसलों पर असर पड़ा है। बिहार में कोसी और गंडक नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं और करीब 500 घरों के जलमग्न होने की रिपोर्ट सामने आई है।

इसी बीच छत्तीसगढ़ के धमतरी इलाके से बारिश और बाढ़ के बीच एक अलग तरह की तस्वीर सामने आई। महानदी का जलस्तर बढ़ने के बाद एक शराब दुकान में पानी घुस गया, जिसके बाद वहां रखी शराब और बीयर की बोतलें पानी के तेज बहाव में बह गईं। बोतलों के नदी में बहने की जानकारी मिलने के बाद कुछ लोग उन्हें जाल और बांस की मदद से पकड़ने की कोशिश करते दिखाई दिए।

केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन, करीब 4 हजार श्रद्धालु फंसे

उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। रुद्रप्रयाग जिले में सिरोबगड़ के पास भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा मलबे और बड़े पत्थरों से ढक गया। इसके कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब 4 हजार श्रद्धालुओं के फंसे होने की जानकारी सामने आई है।

बारिश और लगातार मलबा गिरने की वजह से सड़क खोलने का काम भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग की मशीनें मलबा हटाने में लगी हैं, लेकिन पहाड़ी से लगातार नया मलबा आने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए केदारनाथ यात्रा को अगले आदेश तक रोक दिया है।

मौसम खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। यात्रियों और श्रद्धालुओं को संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान अचानक भूस्खलन और सड़क बंद होने का खतरा बना रहता है।

उत्तराखंड में कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

उत्तराखंड के कई जिलों में मौसम को लेकर अलग-अलग स्तर के अलर्ट जारी किए गए हैं। देहरादून, टिहरी, हरिद्वार और पौड़ी में रेड अलर्ट बताया गया है, जबकि उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग में ऑरेंज अलर्ट है। कुछ अन्य जिलों में येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।

भारी बारिश के कारण अलकनंदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का जलस्तर भी बढ़ा है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। पहाड़ों में लगातार बारिश के दौरान यात्रा करने वालों के लिए सड़क की स्थिति पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।

छत्तीसगढ़ में महानदी में बह गईं शराब की बोतलें

छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। धमतरी जिले के नारी इलाके में महानदी के किनारे स्थित शराब दुकान में बाढ़ का पानी घुसने के बाद वहां रखी शराब और बीयर की बोतलें पानी के तेज बहाव में बह गईं।

बोतलों के नदी में बहने की खबर फैलते ही कुछ लोग उन्हें पकड़ने के लिए नदी और पुल के आसपास पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने बांस और जाल की मदद से पानी में बह रही बोतलों को निकालने की कोशिश की। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा।

हालांकि, बाढ़ के तेज बहाव के बीच नदी के पास जाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे समय में पानी की गहराई और बहाव का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। प्रशासन की ओर से भी लोगों को बाढ़ वाले इलाकों और तेज बहाव वाले पानी से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

रिपोर्टों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में भारी बारिश के कारण पिछले दो दिनों में करीब 5 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कुछ लोगों को हवाई मार्ग से भी निकाला गया।

उत्तर प्रदेश में करीब 70 घंटे से आंधी-बारिश

उत्तर प्रदेश में भी मौसम ने काफी परेशानी बढ़ाई है। कई शहरों और जिलों में लगातार बारिश तथा तेज हवाओं का दौर चल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के कई इलाकों में करीब 70 घंटे से बारिश और आंधी का असर बना हुआ है।

लगातार बारिश के कारण कई जगह पेड़ और बिजली के पोल गिरने, जलभराव और यातायात प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है। तेज हवाओं के कारण खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं।

राज्य के कई इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। बारिश के पानी और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और राहत एजेंसियां संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं।

बारिश के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। स्थानीय प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और जरूरत नहीं होने पर जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

बिहार में कोसी और गंडक नदियों का बढ़ा जलस्तर

बिहार में भी लगातार बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में पानी बढ़ने के कारण बाढ़ का खतरा बना हुआ है। कोसी और गंडक नदियों के जलस्तर में वृद्धि से राज्य के कई जिलों में स्थिति गंभीर हुई है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 17 जिले प्रभावित बताए जा रहे हैं और लगभग 6 हजार गांवों पर बाढ़ का असर पड़ा है।

बाढ़ के कारण करीब 500 घरों के जलमग्न होने की जानकारी सामने आई है। सुपौल सहित उत्तर बिहार के कई इलाकों में पानी बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में परेशानी बढ़ी है। कुछ स्थानों पर सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

नदियों के जलस्तर को देखते हुए प्रशासन की ओर से राहत और बचाव दलों को तैयार रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

नेपाल में भी बाढ़ से हालात गंभीर

बिहार से लगे नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी भारी बारिश का असर दिखाई दे रहा है। नेपाल के सप्तरी जिले में लगातार तीन दिनों की बारिश के बाद बाढ़ का पानी कई बस्तियों में घुस गया। एक रिपोर्ट के अनुसार वहां करीब 500 घर जलमग्न हुए और 2 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।

नेपाल में बढ़ते जलस्तर का असर सीमा से लगे बिहार के इलाकों पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से कोसी और गंडक नदी क्षेत्रों में प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है।

कई राज्यों में एक साथ बारिश से बढ़ी परेशानी

इस समय उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बारिश से जुड़ी अलग-अलग समस्याएं सामने आ रही हैं। कहीं पहाड़ों में भूस्खलन से सड़कें बंद हैं, तो कहीं नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांवों में पानी घुस रहा है।

उत्तराखंड में सबसे बड़ी चिंता पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर है। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से जारी बारिश और तेज हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। बिहार में नदियों का बढ़ता जलस्तर ग्रामीण इलाकों के लिए चुनौती बना हुआ है, जबकि छत्तीसगढ़ में भी बाढ़ के कारण नदी और आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ा है।

मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को देखते हुए लोगों को नदी, नाले, पुल और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की जरूरत है। बारिश के दौरान यात्रा करने वालों को सड़क की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए।

निष्कर्ष

देश के कई हिस्सों में सितंबर के अंतिम दिनों में बारिश ने एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन से करीब 4 हजार श्रद्धालुओं के फंसने, उत्तर प्रदेश में लंबे समय से बारिश और आंधी जारी रहने, बिहार में करीब 500 घरों के जलमग्न होने और छत्तीसगढ़ में बाढ़ के पानी के साथ शराब की बोतलें बहने की घटनाएं मौसम की गंभीर स्थिति को दिखाती हैं।

ऐसे मौसम में लोगों को प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना चाहिए और बाढ़ या तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को सड़क और मौसम की ताजा स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा आगे बढ़ानी चाहिए।