श्रीनगर, 30 सितंबर 2026: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों को आतंकवाद विरोधी अभियान में बड़ी कामयाबी मिली है। यूसमर्ग के कोराग इलाके में मंगलवार देर रात शुरू हुए एनकाउंटर में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया गया। भारतीय सेना के अनुसार, संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर सुरक्षाबलों ने आतंकियों को चुनौती दी, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। मुठभेड़ के बाद तलाशी अभियान में मूसा का शव और युद्ध में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया।
सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने खुफिया जानकारी के आधार पर यूसमर्ग के कोराग इलाके में यह संयुक्त अभियान शुरू किया था। सेना के चिनार कॉर्प्स के मुताबिक, तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों ने संदिग्ध गतिविधि देखी। चुनौती दिए जाने पर आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ हुई और एक आतंकी मारा गया। अभियान के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया।

यूसमर्ग के जंगल में छिपा था आतंकी
मुठभेड़ बडगाम जिले के यूसमर्ग क्षेत्र में हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने कोराग इलाके में घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया था। यह इलाका पहाड़ी और जंगल वाला होने के कारण ऑपरेशन में सुरक्षाबलों को काफी सावधानी बरतनी पड़ी।
तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों की नजर संदिग्ध गतिविधि पर गई। इसके बाद आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी मारा गया। बाद में तलाशी के दौरान मारे गए आतंकी की पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में की गई। सेना के अनुसार, वह पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा था।
ऑपरेशन कोराग के तहत हुई कार्रवाई
भारतीय सेना ने इस कार्रवाई को ऑपरेशन कोराग के तहत अंजाम दिया। अभियान में भारतीय सेना के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF भी शामिल रहे।
सेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अभियान की शुरुआत विशेष खुफिया इनपुट के आधार पर की गई थी। सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया और संदिग्ध गतिविधि सामने आने के बाद मुठभेड़ शुरू हुई।
मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में तलाशी बढ़ा दी। सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन के दौरान आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए सर्च अभियान जारी रखा गया था।
कौन था हाशिम मूसा?
मारे गए आतंकी की पहचान अलग-अलग रिपोर्टों में अलग नामों और उपनामों के साथ सामने आई है। भारतीय सेना से जुड़ी रिपोर्टिंग में उसकी पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में की गई है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में उसे फौजी मूसा या सुलेमान शाह मूसा के नाम से भी बताया गया है।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, मूसा का एक आतंकी समूह लंबे समय से सुरक्षाबलों के निशाने पर था। इस समूह से जुड़े अन्य आतंकियों के खिलाफ भी पहले कार्रवाई हो चुकी थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से सक्रिय इस समूह के सदस्यों की पहचान सुरक्षा एजेंसियों को पहले बरामद सामग्री से मिली जानकारी के आधार पर हुई थी।
सितंबर में अब तक 5 आतंकियों के मारे जाने की रिपोर्ट
हाशिम मूसा के मारे जाने के साथ सितंबर 2026 में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में मारे गए आतंकियों की संख्या 5 बताई जा रही है।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 17 सितंबर को उधमपुर के मजालता इलाके में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया था। इसके बाद सितंबर में अन्य अभियानों में भी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद महीने में मारे गए आतंकियों की संख्या पांच तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में अभियानों और आतंकियों की पहचान को लेकर विवरण अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी अभियान की अंतिम संख्या के लिए सेना या सुरक्षा एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है।
मुठभेड़ के बाद भी सर्च ऑपरेशन जारी
हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद भी सुरक्षा बलों ने यूसमर्ग और आसपास के जंगलों में तलाशी अभियान जारी रखा। इसका उद्देश्य इलाके में छिपे किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी का पता लगाना था।
सुरक्षा बलों को आशंका थी कि मुठभेड़ के दौरान इलाके में अन्य आतंकी भी मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में जंगल और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त तलाशी की गई। भारतीय सेना के अनुसार, मारे गए आतंकी के शव के साथ युद्ध में इस्तेमाल होने वाला सामान भी बरामद किया गया।
सेना, पुलिस और CRPF ने मिलकर चलाया अभियान
इस कार्रवाई की एक खास बात यह रही कि अभियान में तीन प्रमुख सुरक्षा एजेंसियां शामिल थीं। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने खुफिया इनपुट के आधार पर संयुक्त रूप से ऑपरेशन शुरू किया।
संयुक्त ऑपरेशन में स्थानीय पुलिस की खुफिया जानकारी और इलाके की जानकारी के साथ सेना तथा CRPF की ऑपरेशनल क्षमता का इस्तेमाल किया गया। यूसमर्ग के जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों ने सावधानी से इलाके को घेरा।
सेना के अनुसार, संदिग्ध गतिविधि मिलने के बाद आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने कार्रवाई की। इसी दौरान एक आतंकी मारा गया।
हाशिम मूसा के मारे जाने का क्या महत्व है?
सुरक्षा एजेंसियों के लिए किसी सक्रिय आतंकी कमांडर का मारा जाना इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि ऐसे कमांडर स्थानीय नेटवर्क, हथियारों की व्यवस्था और आतंकियों की गतिविधियों को संचालित करने में भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि किसी कार्रवाई के व्यापक प्रभाव का आकलन केवल एक मुठभेड़ के आधार पर करना उचित नहीं होगा। इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों की आगे की जांच, बरामद सामग्री और आतंकी नेटवर्क से जुड़ी जानकारी सामने आना जरूरी है।
फिलहाल सुरक्षाबलों का ध्यान इलाके में किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी की जांच और क्षेत्र को सुरक्षित बनाने पर है।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा अभियान जारी
हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद भी जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों की तलाशी और आतंकवाद विरोधी गतिविधियां जारी हैं। खुफिया इनपुट के आधार पर समय-समय पर संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं।
यूसमर्ग के कोराग इलाके में हुई यह कार्रवाई भी इसी तरह के एक खुफिया-आधारित संयुक्त अभियान का हिस्सा थी। सेना के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान एक आतंकी को मार गिराया गया और बाद में उसकी पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के तौर पर हुई।
मुख्य बातें एक नजर में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| मारा गया आतंकी | मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा |
| आतंकी संगठन | लश्कर-ए-तैयबा |
| स्थान | कोराग, यूसमर्ग, बडगाम |
| ऑपरेशन | ऑपरेशन कोराग |
| कार्रवाई | भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF |
| अभियान की शुरुआत | खुफिया जानकारी के आधार पर |
| बरामदगी | आतंकी का शव और युद्ध में इस्तेमाल होने वाला सामान |
| सितंबर 2026 में मारे गए आतंकी | रिपोर्टों के अनुसार 5 |

FAQ: हाशिम मूसा एनकाउंटर
हाशिम मूसा कौन था?
भारतीय सेना से जुड़ी रिपोर्टिंग के अनुसार हाशिम मूसा की पहचान मोहम्मद आसिफ के रूप में हुई है और वह पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकी था।
हाशिम मूसा कहां मारा गया?
उसे जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में यूसमर्ग के कोराग इलाके में हुई मुठभेड़ में मारा गया।
एनकाउंटर कब हुआ?
मुठभेड़ मंगलवार, 29 सितंबर 2026 की रात शुरू हुई और बुधवार 30 सितंबर को सुरक्षाबलों ने मारे गए आतंकी की पहचान की।
ऑपरेशन में कौन-कौन शामिल था?
भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चलाया था।
क्या इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी था?
हां। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान जारी रखा गया था, ताकि किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी की जांच की जा सके।
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