UN में एर्दोगन का कश्मीर मुद्दा: 2019 के बाद कई बार उठाया सवाल, फिलिस्तीन पर भी इजरायल को घेरा

तुर्की राष्ट्रपति एर्दोगन का संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण

नई दिल्ली। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन का संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाने का सिलसिला पिछले कुछ वर्षों में चर्चा में रहा है। 2019 के बाद उन्होंने कई UN General Assembly भाषणों में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख किया। हालांकि 2024 में उन्होंने अपने भाषण में कश्मीर का जिक्र नहीं किया था। 2025 में उन्होंने फिर कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद तथा UN प्रस्तावों के आधार पर समाधान की बात कही थी।

2025 में फिर उठाया था कश्मीर का मुद्दा

सितंबर 2025 में UN General Assembly की 80वीं बैठक को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए तनाव के संदर्भ में कश्मीर का जिक्र किया था।

उन्होंने कहा था कि कश्मीर मुद्दे को UN के प्रस्तावों के आधार पर और बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। एर्दोगन ने दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के महत्व पर भी जोर दिया था। उनका यह बयान UN के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

भारत ने इस तरह के बयानों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट है और बाहरी पक्ष की भूमिका स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्रालय ने 2025 में एर्दोगन की टिप्पणी के बाद भारत के इसी रुख को दोहराया था।

2019 के बाद UN में क्या रहा पैटर्न?

2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद एर्दोगन ने लगातार कई वर्षों तक UNGA के अपने भाषणों में कश्मीर का उल्लेख किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने 2019, 2020, 2021, 2022 और 2023 में इस मुद्दे को उठाया था।

इसके बाद 2024 में उन्होंने पहली बार अपने UNGA भाषण में कश्मीर का उल्लेख नहीं किया। उस साल उनका भाषण मुख्य रूप से गाजा और फिलिस्तीन के मुद्दे पर केंद्रित रहा।

2025 में हालांकि कश्मीर फिर उनके भाषण का हिस्सा बना।

2026 में एर्दोगन के भाषण का मुख्य फोकस क्या रहा?

22 सितंबर 2026 को UN General Assembly की 81वीं बैठक में एर्दोगन ने मुख्य रूप से गाजा में मानवीय स्थिति, फिलिस्तीन की मान्यता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा उठाया।

Reuters के अनुसार एर्दोगन ने कहा कि UN Security Council की मौजूदा व्यवस्था में 190 से अधिक देशों की इच्छा पांच स्थायी सदस्यों के फैसलों से प्रभावित होती है। उन्होंने सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग की।

उन्होंने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास की UN में लगातार दूसरे साल अनुपस्थिति का भी उल्लेख किया और उन देशों से फिलिस्तीन को मान्यता देने की अपील की, जिन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है।

इजरायली प्रतिनिधिमंडल ने किया वॉकआउट

एर्दोगन के भाषण के दौरान गाजा और इजरायल से जुड़े मुद्दों पर उनके बयानों के बाद इजरायली प्रतिनिधिमंडल के हॉल से बाहर चले जाने की रिपोर्ट सामने आई है।

The Guardian की लाइव कवरेज के अनुसार एर्दोगन ने गाजा की स्थिति पर कड़ी टिप्पणी की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायल पर दबाव बढ़ाने की अपील की। इसी दौरान इजरायली प्रतिनिधिमंडल के वॉकआउट की जानकारी दी गई।

फिलिस्तीन को मान्यता देने की अपील

एर्दोगन ने अपने भाषण में उन देशों से फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देने की अपील की, जिन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया।

तुर्की लंबे समय से फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन करता रहा है और गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई की आलोचना करता रहा है। इजरायल इन आरोपों को खारिज करता है।

कश्मीर और फिलिस्तीन पर भारत का रुख

भारत कश्मीर मुद्दे पर लगातार यह रुख रखता आया है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े विषय भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से हल किए जाने चाहिए। 2025 में एर्दोगन के UN भाषण के बाद विदेश मंत्रालय ने भी भारत की इसी स्थिति को दोहराया था।

दूसरी ओर, फिलिस्तीन के सवाल पर भारत ने समय-समय पर दो-राष्ट्र समाधान और फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के समर्थन की बात कही है, जबकि भारत के इजरायल के साथ भी व्यापक द्विपक्षीय संबंध हैं।

क्या एर्दोगन ने 2026 में फिर कश्मीर उठाया?

यहां एक जरूरी तथ्यात्मक अंतर है। 22 सितंबर 2026 के ताजा भाषण की उपलब्ध Reuters रिपोर्ट में कश्मीर का उल्लेख नहीं है। इसलिए इसे 2026 के भाषण में कश्मीर मुद्दा उठाने की पुष्टि के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।

हालांकि, 2025 में एर्दोगन ने स्पष्ट रूप से कश्मीर का मुद्दा उठाया था और UN प्रस्तावों तथा भारत-पाकिस्तान संवाद के आधार पर समाधान की बात कही थी।

एर्दोगन और कश्मीर: प्रमुख साल

  • 2019: UNGA में कश्मीर का उल्लेख
  • 2020: कश्मीर मुद्दा उठाया
  • 2021: कश्मीर पर टिप्पणी
  • 2022: कश्मीर का उल्लेख
  • 2023: कश्मीर पर फिर बयान
  • 2024: UNGA भाषण में कश्मीर का उल्लेख नहीं किया
  • 2025: फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया
  • 2026: उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में मुख्य फोकस गाजा, फिलिस्तीन और UN सुधार पर रहा।