राजस्थान हाईकोर्ट रात 10 बजे खुला: पार्षदों की गिरफ्तारी पर रोक, 2 बजे तक चली सुनवाई

राजस्थान हाईकोर्ट में रात 10 बजे हुई विशेष सुनवाई

राजस्थान हाईकोर्ट न्यूज़: राजस्थान में नगर निकाय प्रमुखों के चुनाव से ठीक पहले रविवार रात न्यायपालिका से जुड़ा एक असाधारण घटनाक्रम सामने आया। चुनाव से जुड़े पार्षदों और प्रत्याशियों की गिरफ्तारी की आशंका को लेकर दायर अर्जियों पर सुनवाई के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में विशेष पीठ बैठी। एक मामले की सुनवाई रात करीब 10 बजे शुरू हुई और देर रात तक जारी रही। हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी गई, जबकि बीकानेर के कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद को भी अदालत से राहत मिली।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सोमवार, 21 सितंबर को राजस्थान के 273 नगरीय निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए चुनाव निर्धारित थे। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के चुनाव बाद में 25 सितंबर को होने हैं।

रात 10 बजे शुरू हुई विशेष सुनवाई

रविवार को अदालत का नियमित कामकाज नहीं था, लेकिन निकाय चुनाव से पहले सामने आए तत्काल मामलों को देखते हुए विशेष सुनवाई की व्यवस्था की गई।

Hindustan Times के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर विशेष पीठों का गठन किया गया। हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों की याचिका पर जस्टिस नूपुर भाटी की एकल पीठ ने रात करीब 10 बजे सुनवाई शुरू की और बाद में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, बीकानेर के पार्षद मकसूद अहमद की याचिका पर भी देर रात सुनवाई हुई और उन्हें अंतरिम राहत मिली।

हनुमानगढ़ के 9 पार्षदों को मिली राहत

हनुमानगढ़ नगर निकाय से जुड़े नौ पार्षदों ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी ओर से अदालत में तत्काल राहत की मांग की गई।

सुनवाई के बाद अदालत ने इन पार्षदों को अंतरिम संरक्षण दिया। इसका अर्थ यह है कि संबंधित अवधि में उन्हें उस मामले में गिरफ्तारी से राहत मिली, जबकि मामले की आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

यह राहत ऐसे समय मिली जब नगर निकाय के प्रमुख पद के लिए मतदान होने वाला था और पार्षदों के वोट चुनाव प्रक्रिया में महत्वपूर्ण थे।

बीकानेर पार्षद मकसूद अहमद को भी अंतरिम राहत

बीकानेर नगर निगम के वार्ड 18 से कांग्रेस पार्षद और पूर्व यूआईटी अध्यक्ष मकसूद अहमद ने भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस की ओर से उन्हें और एक अन्य पार्षद को 21 सितंबर की सुबह पूछताछ के लिए उपस्थित होने का नोटिस दिया गया था। इसी बीच उन्होंने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अदालत से राहत मांगी।

हाईकोर्ट ने देर रात उनकी गिरफ्तारी पर भी अंतरिम रोक लगाई। उन्हें पूछताछ में शामिल होने के लिए बाद की तारीख दी गई। Hindustan Times के अनुसार, अदालत ने अहमद को 30 सितंबर को पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को रखी।

कुचेरा और अन्य मामलों में भी अदालत पहुंची

निकाय चुनाव से पहले सिर्फ बीकानेर और हनुमानगढ़ के मामले ही अदालत तक नहीं पहुंचे। नागौर जिले की कुचेरा नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष और निर्वाचित पार्षद तेजपाल मिर्धा को भी हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली।

एक अन्य मामले में श्रीविजयनगर नगरपालिका के चेयरमैन पद के उम्मीदवार सुशील मिर्धा को भी गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई।

इससे स्पष्ट हुआ कि चुनाव से ठीक पहले कई उम्मीदवार और पार्षद अपने खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर अदालत की शरण में पहुंचे।

चुनाव से पहले गिरफ्तारी के मामलों पर क्यों बढ़ी चिंता?

निकाय चुनाव में मेयर, सभापति और अध्यक्ष जैसे पदों का चुनाव निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया जाता है। ऐसे में किसी पार्षद की गिरफ्तारी या उसकी अनुपस्थिति चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

इसी वजह से जिन पार्षदों या प्रत्याशियों को गिरफ्तारी की आशंका थी, उन्होंने हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की।

हालांकि, अदालत ने इन मामलों में केवल अंतरिम राहत दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित मामलों में आरोप समाप्त हो गए या जांच पर अंतिम फैसला हो गया। संबंधित कानूनी मामलों में आगे की सुनवाई और प्रक्रिया जारी रहेगी।

राजस्थान के 273 निकायों में चुनाव

राजस्थान में 21 सितंबर को 273 नगरीय निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के चुनाव होने थे। इनमें बीकानेर, अजमेर, पाली, उदयपुर और अलवर जैसे प्रमुख नगर निकाय भी शामिल हैं।

वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के चुनाव 25 सितंबर को होने हैं। इन चुनावों के चलते प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से पार्षदों की बाड़ेबंदी, कानूनी मामले और राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में रही हैं।

हनुमानगढ़ विधायक गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी भी चर्चा में

इसी चुनावी माहौल के बीच हनुमानगढ़ के निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी भी सामने आई। उन्हें CID-CB और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। पुलिस सूत्रों ने उनके खिलाफ कई मामलों का उल्लेख किया है, जबकि विस्तृत आधिकारिक जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं कराई गई थी।

हाईकोर्ट में हनुमानगढ़ के पार्षदों की ओर से दायर याचिका और बंसल की गिरफ्तारी, दोनों घटनाक्रम निकाय चुनाव से ठीक पहले सामने आए।

अदालत की रात में सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण रही?

रविवार रात हुई सुनवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी तात्कालिकता थी। सामान्य कामकाजी समय के बाहर अदालत ने चुनाव से पहले सामने आए गिरफ्तारी से जुड़े मामलों को सुना।

रिपोर्टों के अनुसार, विशेष सुनवाई के दौरान कुछ मामलों में रात 10 बजे के बाद भी कार्यवाही जारी रही और देर रात तक आदेश पारित किए गए। इसी कारण यह घटना राजस्थान हाईकोर्ट के हालिया न्यायिक घटनाक्रमों में विशेष रूप से चर्चा में रही।

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत अंतिम फैसला नहीं है। जिन पार्षदों को गिरफ्तारी से संरक्षण मिला है, उन्हें संबंधित मामलों में अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना पड़ सकता है।

अदालत आगे की सुनवाई में पुलिस और संबंधित पक्षों से जवाब लेगी। उसके बाद अंतरिम आदेशों को आगे बढ़ाने, बदलने या अन्य कानूनी निर्देश देने का फैसला मामले के तथ्यों और दलीलों के आधार पर होगा।

निष्कर्ष

राजस्थान निकाय चुनाव से ठीक पहले रविवार रात राजस्थान हाईकोर्ट में हुई विशेष सुनवाई ने प्रदेश की चुनावी प्रक्रिया में कानूनी पहलू को भी केंद्र में ला दिया। हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों और बीकानेर के मकसूद अहमद समेत कुछ अन्य मामलों में अदालत ने गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी।

रात में अदालत की विशेष सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि संबंधित पार्षदों और उम्मीदवारों के चुनाव में भाग लेने को लेकर तत्काल कानूनी स्थिति स्पष्ट करनी थी। हालांकि, इन मामलों में अंतिम निर्णय अभी बाकी है और संबंधित जांच व न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।