
जयपुर: पिता ने ही रची 6 साल के बेटे के अपहरण की साजिश! पत्नी और 3 करोड़ की प्रॉपर्टी के दस्तावेजों को लेकर था विवाद, 4 गिरफ्तार
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिवदासपुरा थाना क्षेत्र में छह साल के बच्चे के अपहरण की शिकायत की जांच के दौरान पुलिस ने कथित साजिश का खुलासा किया। पुलिस के मुताबिक, बच्चे के पिता ने ही अपने भाई और अन्य लोगों के साथ मिलकर बेटे के अपहरण की योजना बनाई थी। इस मामले में पिता समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी की पत्नी करीब तीन महीने पहले अपने पड़ोसी के साथ चली गई थी। आरोप है कि वह अपने नाम की लगभग 3 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी साथ ले गई थी। पुलिस का कहना है कि पत्नी को वापस लाने और पड़ोसी व उसके परिवार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से बच्चे के अपहरण की साजिश रची गई।
स्कूल से लौटने के बाद पानी लेने गया था बच्चा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 16 अक्टूबर 2026 को बच्चे के पिता ने शिवदासपुरा थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि छह साल का बच्चा पहली कक्षा में पढ़ता है। स्कूल से घर लौटने के बाद वह अपनी एक रिश्तेदार के साथ घर के पास स्थित आरओ प्लांट पर पानी लेने गया था।
इसी दौरान बाइक पर आए दो नकाबपोश लोगों ने कथित तौर पर बच्चे को अपने साथ ले लिया। बच्चे के साथ मौजूद किशोरी ने शोर मचाया, लेकिन आरोपी मौके से निकल गए। इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी।
शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती तौर पर घटना अपहरण की वारदात लग रही थी। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और संदिग्धों के आने-जाने के रास्ते का पता लगाने की कोशिश की।
48 घंटे के भीतर पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद किया
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए टीम गठित की। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस संदिग्धों तक पहुंची। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि अपहरण के पीछे किसी बाहरी गिरोह के बजाय बच्चे के पिता की भूमिका थी। पुलिस ने इस मामले में पिता समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। अब आरोपियों से पूछताछ कर घटना की पूरी योजना, उसमें शामिल लोगों की भूमिका और इस्तेमाल किए गए साधनों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
बच्चे की पहचान और उससे जुड़ी निजी जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में नाबालिग की सुरक्षा और निजता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पत्नी के जाने के बाद शुरू हुआ था विवाद
पुलिस के मुताबिक, बच्चे की मां करीब तीन महीने पहले घर छोड़कर अपने पड़ोसी के साथ चली गई थी। इस संबंध में पहले गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। पिता का आरोप था कि पत्नी अपने नाम की करीब 3 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी अपने साथ ले गई।
पुलिस की जांच के अनुसार, पत्नी के वापस नहीं आने के बाद पति और उसके परिचितों के बीच विवाद बढ़ गया था। आरोप है कि इसी पारिवारिक विवाद के कारण दूसरे परिवार पर दबाव बनाने की योजना बनाई गई।
हालांकि, संपत्ति के दस्तावेजों और पारिवारिक विवाद को लेकर सामने आई जानकारी पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित है। इन दावों को अंतिम रूप से स्थापित तथ्य मानने से पहले जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है।
भाई और दुकान के कर्मचारियों को भी किया शामिल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने जांच में पाया कि कथित साजिश में बच्चे के पिता के अलावा उसके भाई और दुकान पर काम करने वाले लोग भी शामिल थे। आरोप है कि बच्चे को उठाने के लिए दो लोगों को भेजा गया था, जिन्होंने पहचान छिपाने के लिए हेलमेट पहना और बाइक की नंबर प्लेट हटाई थी।
सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने संदिग्धों की गतिविधियों और उनके रास्ते का पता लगाया। इसके बाद चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि अपहरण की योजना कैसे बनाई गई, किसकी क्या भूमिका थी और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्य क्या संकेत देते हैं।
किसी भी आरोपी को अदालत में दोष सिद्ध होने से पहले दोषी घोषित नहीं किया जा सकता। फिलहाल इस मामले में गिरफ्तारी और जांच से जुड़ी जानकारी को पुलिस के आरोपों और रिपोर्टों के संदर्भ में समझना चाहिए।
बच्चे के अपहरण के मामलों में समय पर सूचना देना क्यों जरूरी?
बच्चे के लापता होने या अपहरण की आशंका होने पर परिवार को तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए। शुरुआती समय में उपलब्ध जानकारी, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
परिवार को बच्चे की हाल की तस्वीर, कपड़ों का विवरण और आखिरी बार देखे जाने का समय जैसी जानकारी पुलिस को देनी चाहिए। खुद से संदिग्धों का सामना करने या सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि किसी की पहचान साझा करने से बचना चाहिए।
इस मामले में भी पुलिस ने शिकायत के बाद सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों की मदद से जांच आगे बढ़ाई। बच्चे का सकुशल मिलना परिवार के लिए राहत की बात है, लेकिन साजिश में शामिल लोगों की भूमिका और अन्य परिस्थितियों की कानूनी जांच आगे जारी रह सकती है।
राजस्थान में अपराध और पुलिस जांच से जुड़ी अन्य खबरें पढ़ने के लिए Bulletino की राजस्थान न्यूज़ रिपोर्टें भी देख सकते हैं।
निष्कर्ष
जयपुर के शिवदासपुरा क्षेत्र में छह साल के बच्चे के अपहरण की शिकायत का मामला पुलिस जांच में एक कथित पारिवारिक साजिश के रूप में सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, पत्नी को वापस लाने और पड़ोसी के परिवार पर दबाव बनाने के लिए बच्चे के अपहरण की योजना बनाई गई थी। इस मामले में पिता समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया और बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया।
करीब 3 करोड़ रुपये की संपत्ति के दस्तावेजों को लेकर विवाद की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है। अब मामले में आरोपियों की भूमिका, कथित साजिश और संपत्ति से जुड़े दावों की जांच महत्वपूर्ण होगी। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।