
भारत वीटो पावर लेटेस्ट न्यूज: UNSC स्थायी सदस्यता और ताजा समर्थन की पूरी जानकारी
India veto power latest news in hindi आज अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं से जुड़े हर पाठक के लिए एक अहम विषय बन गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता और वीटो पावर की भारत की मांग को हाल के महीनों में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिले हैं। यूरोप के चार देशों के समूह Visegrad 4 (V4) ने खुलकर भारत का समर्थन किया है, जबकि रूस ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का पुरजोर समर्थन किया है।
हालांकि, भारत को अभी तक वीटो पावर नहीं मिली है और यह रास्ता कई राजनीतिक और संवैधानिक चुनौतियों से भरा हुआ है। इस लेख में हम india veto power latest news in hindi से जुड़ी हर जरूरी जानकारी विस्तार से कवर करेंगे — UNSC में भारत की दावेदारी, किस देश का क्या रुख है, वीटो पावर मिलने पर क्या बदलेगा और आगे की राह में क्या बाधाएं हैं।
UNSC में भारत की दावेदारी: एक नजर
1994 से चल रही है मुहिम
भारत पिछले तीन दशकों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। सबसे पहले 1994 में 49वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत ने स्थायी सीट की आधिकारिक मांग की थी। इसके बाद 2000 में न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्थायी सदस्यता का दावा बेहद मजबूती से पेश किया था।
भारत अब तक 8 बार UNSC का अस्थायी सदस्य रह चुका है, लेकिन स्थायी सदस्यता और वीटो पावर अब तक नहीं मिल पाई है। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) हैं, जिनके पास वीटो पावर है। इसके अलावा 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें दो-दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
1965 के बाद कोई बदलाव नहीं
संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 1945 में हुई थी और इसके बाद से अब तक सुरक्षा परिषद में केवल एक बार (1965 में) विस्तार किया गया है। 1965 में यूएन चार्टर में संशोधन करके 4 गैर-स्थायी सीटें बढ़ाई गई थीं, जिससे कुल सदस्यों की संख्या 11 से बढ़कर 15 हो गई थी। हालांकि, 5 स्थायी सदस्यों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया।
भारत का स्पष्ट मानना है कि बीते छह दशकों में दुनिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपटने में UNSC अपनी प्रासंगिकता और निष्पक्षता खो रहा है।
भारत को वीटो पावर: ताजा समर्थन की स्थिति
V4 देशों का ऐतिहासिक समर्थन
सितंबर 2026 में न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पहली V4-India विदेश मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें यूरोप के चार देशों — स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी और चेक रिपब्लिक — ने भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर समर्थन किया।
स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानर ने कहा कि V4 ग्रुप के सभी सदस्य देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की महाशक्ति भारत का समर्थन करते हैं और भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता दी जानी चाहिए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस समर्थन का स्वागत करते हुए इसे “नया ऐतिहासिक अवसर” बताया।
रूस का पुरजोर समर्थन
सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रूस सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के पक्ष में है।
हालांकि, लावरोव ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद में सुधार के तहत पश्चिमी देशों के लिए अतिरिक्त स्थायी सीटें नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने जर्मनी और जापान को अतिरिक्त स्थायी सीट देने का सख्त विरोध किया।
UN चीफ का समर्थन
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया 1945 वाली दुनिया नहीं है और बदलती आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को वैश्विक संस्थाओं में भी जगह मिलनी चाहिए। गुटेरेस ने खास तौर पर भारत का नाम लेकर कहा कि वह सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग के सबसे आगे रहने वाले देशों में है।
अन्य देशों का समर्थन
भारत को अन्य देशों से भी समर्थन मिल रहा है। मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट समर्थन किया। पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने भी अफ्रीका, ब्राजील और भारत के लिए स्थायी प्रतिनिधित्व की वकालत की।
भारत की राह में सबसे बड़ी बाधा: चीन
चीन का रुख
भारत की UNSC स्थायी सदस्यता की राह में सबसे बड़ी बाधा चीन है। चीन ने अभी तक भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट समर्थन नहीं किया है। चीन आमतौर पर सुरक्षा परिषद सुधार पर व्यापक आम सहमति की बात करता है, न कि भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर समर्थन।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के मुताबिक, चीन भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन नहीं करेगा क्योंकि बीजिंग पांच स्थायी सदस्यों में एकमात्र एशियाई शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को महत्व देता है।
यूएन चार्टर संशोधन की शर्त
स्थायी सदस्यता में किसी भी तरह के बदलाव के लिए यूएन चार्टर में संशोधन जरूरी है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ दो-तिहाई सदस्य देशों के अनुसमर्थन और सभी पांच वर्तमान स्थायी सदस्यों की सहमति आवश्यक है।
इसका मतलब है कि अगर चीन किसी भी स्तर पर अपना वीटो इस्तेमाल करता है, तो भारत की स्थायी सदस्यता का रास्ता अवरुद्ध हो सकता है। जॉन बोल्टन के मुताबिक, चीन संभवतः यूएन चार्टर संशोधन को वीटो कर देगा, भले ही भारत को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल जाए।
भारत को वीटो मिलने पर क्या बदलेगा?
वैश्विक निर्णयों में भूमिका बढ़ेगी
अगर भारत को स्थायी सदस्यता और वीटो पावर मिल जाती है, तो अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, प्रतिबंधों और दूसरे बड़े वैश्विक मुद्दों से जुड़े फैसलों में उसकी भूमिका काफी प्रभावशाली हो जाएगी। भारत को दुनिया की सबसे जरूरी फैसले लेने वाली जगह में स्थायी स्थान मिल जाएगा।
वीटो पावर की शक्ति
सबसे बड़ा बदलाव वीटो पावर का होगा। अभी सिर्फ पांच स्थायी सदस्यों के पास यह शक्ति है। स्थायी सीट मिलने के बाद भारत सुरक्षा परिषद के किसी भी बड़े प्रस्ताव के खिलाफ वोट करके उसे रोक सकेगा। भारत का वीटो उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों से जुड़े मुद्दों के लिए काफी अहम हो सकता है।
ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज
स्थायी सदस्यता विकासशील देशों के प्रतिनिधि के तौर पर भारत की भूमिका को और मजबूत कर सकती है। भारत ने अक्सर वैश्विक संस्थानों में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के ज्यादा प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर दिया है। स्थायी सीट मिलने से भारत को एक मजबूत संस्थागत मंच मिलेगा, जहां से वह विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठा सकेगा।
भारत की स्थायी सदस्यता: कौन-कौन करता है समर्थन
समर्थन करने वाले देश
भारत की स्थायी सदस्यता को कई देशों और समूहों का समर्थन प्राप्त है:
फ्रांस: फ्रांस भारत का सबसे मजबूत समर्थक रहा है। फरवरी 2026 के भारत-फ्रांस संयुक्त बयान में पेरिस ने भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपने दृढ़ समर्थन को दोहराया।
ब्रिटेन: ब्रिटेन ने भी भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है और ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान के लिए स्थायी सीटों की वकालत की है।
अमेरिका: अमेरिका ने भी सुधारित UNSC में भारत को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने का समर्थन किया है।
रूस: रूस ने कई बार भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है।
G4 देश: भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के G4 समूह ने एक-दूसरे की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है।
विरोध या अनिश्चितता
चीन: चीन ने अभी तक भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट समर्थन नहीं किया है और यूएन चार्टर संशोधन पर वीटो का इस्तेमाल कर सकता है।
अन्य समूह: अफ्रीकी संघ सहित कई समूह अपनी-अपनी मांगों के साथ सुरक्षा परिषद सुधार की बात करते हैं, जिससे एक साझा सहमति बनाना मुश्किल हो जाता है।
निष्कर्ष
india veto power latest news in hindi में सबसे बड़ा अपडेट यह है कि भारत को V4 देशों, रूस और संयुक्त राष्ट्र महासचिव का खुला समर्थन मिला है। यह भारत की कूटनीतिक जीत है और इससे उसकी दावेदारी और मजबूत हुई है। हालांकि, भारत को अभी वीटो पावर नहीं मिली है और चीन की बाधा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
यूएन चार्टर संशोधन की जटिल प्रक्रिया और अलग-अलग देशों के अलग-अलग हितों के कारण भारत की स्थायी सदस्यता का रास्ता आसान नहीं है। लेकिन वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत और समर्थन को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले समय में और मजबूती से उठेगा। भारत के लिए अगला कदम यह होगा कि वह अपने समर्थन को और व्यापक बनाए और चीन سمیت अन्य देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत जारी रखे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या भारत को वीटो पावर मिल गई है?
नहीं, भारत को अभी तक वीटो पावर नहीं मिली है। भारत लंबे समय से UNSC में स्थायी सदस्यता और वीटो पावर की मांग कर रहा है, लेकिन यह अभी तक संभव नहीं हो पाया है।
2. भारत को किन देशों का समर्थन मिला है?
भारत को फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका, रूस, V4 देशों (स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी, चेक रिपब्लिक) और मॉरीशस जैसे देशों का समर्थन मिला है।
3. भारत की स्थायी सदस्यता में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
सबसे बड़ी बाधा चीन है। चीन ने भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट समर्थन नहीं किया है और यूएन चार्टर संशोधन पर वीटो कर सकता है। इसके अलावा, यूएन चार्टर संशोधन की जटिल प्रक्रिया भी एक बड़ी चुनौती है।
4. वीटो पावर मिलने से भारत को क्या फायदा होगा?
वीटो पावर मिलने से भारत UNSC के किसी भी बड़े प्रस्ताव को रोक सकेगा। इससे भारत की वैश्विक निर्णयों में भूमिका बढ़ेगी और ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में उसकी स्थिति मजबूत होगी।
5. भारत कब से UNSC स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है?
भारत पिछले तीन दशकों से UNSC स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। पहली बार 1994 में 49वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत ने आधिकारिक रूप से स्थायी सीट की मांग की थी।
6. UNSC में कितने स्थायी और अस्थायी सदस्य हैं?
UNSC में 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) हैं, जिनके पास वीटो पावर है। इसके अलावा 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
7. यूएन चार्टर संशोधन की प्रक्रिया क्या है?
यूएन चार्टर संशोधन के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो-तिहाई बहुमत, दो-तिहाई सदस्य देशों के अनुसमर्थन और सभी पांच वर्तमान स्थायी सदस्यों की सहमति आवश्यक है। अगर कोई भी स्थायी सदस्य इसका विरोध करता है, तो संशोधन नहीं हो सकता।
8. क्या भारत को बिना वीटो पावर के स्थायी सदस्यता मिल सकती है?
भारत ने स्पष्ट किया है कि बिना वीटो पावर के स्थायी सदस्यता केवल दूसरे दर्जे की सदस्यता होगी। भारत समान अधिकारों के साथ स्थायी सदस्यता चाहता है। अमेरिका ने कहा है कि वह नए स्थायी सदस्यों को वीटो पावर देने के पक्ष में नहीं है, जिससे यह मुद्दा और जटिल हो जाता है।