
महिला की 100 अश्लील फोटो बनाईं, 10 अकाउंट से वायरल: AI टूल्स से तस्वीरों से छेड़छाड़, विदेशी नेटवर्क पर भी सवाल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में बढ़ रहा है, वहीं कुछ लोग इसी तकनीक का दुरुपयोग महिलाओं की तस्वीरों से छेड़छाड़ करने और उन्हें बदनाम करने के लिए भी कर रहे हैं। अहमदाबाद में एक महिला और उसकी मां की तस्वीरों को कथित तौर पर AI टूल्स की मदद से अश्लील रूप में बदलकर सोशल मीडिया पर फैलाने का मामला सामने आया था। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में 100 से ज्यादा आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाए गए तथा कई फर्जी अकाउंट्स के जरिए उन्हें प्रसारित किया गया।
मई 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने इस मामले में दिल्ली के 27 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि महिला की फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट से जुड़ी बात को लेकर इनकार के बाद उसने कथित तौर पर ऑनलाइन उत्पीड़न शुरू किया। पुलिस जांच में कई सोशल मीडिया अकाउंट्स और AI से तैयार की गई सामग्री का पता चलने की बात कही गई थी।
यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति की ऑनलाइन हरकत तक सीमित नहीं है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे AI टूल्स और वेबसाइटों को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिनका इस्तेमाल किसी की अनुमति के बिना उसकी तस्वीरों को यौन रूप से आपत्तिजनक दिखाने के लिए किया जा सकता है।
कैसे बनाई गईं महिला की फर्जी अश्लील तस्वीरें?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी ने महिला और उसकी मां की सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरें डाउनलोड की थीं। इसके बाद कथित तौर पर ऐसे AI टूल्स का इस्तेमाल किया गया, जिनसे तस्वीरों में कपड़ों और शरीर की बनावट को डिजिटल रूप से बदलकर आपत्तिजनक तस्वीरें बनाई जा सकती हैं।
ऐसी तस्वीरें वास्तविक नहीं होतीं, लेकिन देखने वाले व्यक्ति को वे असली लग सकती हैं। तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे को दूसरी तस्वीर या वीडियो पर लगाया जा सकता है, अथवा उसकी मूल तस्वीर में ऐसे बदलाव किए जा सकते हैं जो वास्तव में कभी हुए ही नहीं।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में बनाई गई सामग्री को कई फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपलोड किया गया था। रिपोर्टों में इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर अकाउंट्स बनाए जाने का उल्लेख है। इन अकाउंट्स के जरिए कथित तौर पर महिला की पहचान का इस्तेमाल कर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की गई।
इस तरह की गतिविधि में नुकसान केवल तस्वीरों तक सीमित नहीं रहता। पीड़ित व्यक्ति की निजता, सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
मुफ्त AI टूल्स ने बढ़ाई चिंता
इंटरनेट पर कुछ वेबसाइटें और ऐप ऐसे फीचर उपलब्ध कराने का दावा करती हैं, जिनसे किसी तस्वीर में कपड़ों या शरीर की बनावट को बदला जा सकता है। कुछ सेवाएं सीमित मुफ्त इस्तेमाल की सुविधा देती हैं, जबकि दूसरी सेवाएं भुगतान लेकर अतिरिक्त सुविधाएं देती हैं।
समस्या तब गंभीर हो जाती है, जब इन टूल्स का इस्तेमाल तस्वीर में मौजूद व्यक्ति की सहमति के बिना किया जाता है। किसी की सामान्य फोटो को डाउनलोड करके उसमें अश्लील बदलाव करना और फिर उसे सोशल मीडिया पर फैलाना डिजिटल उत्पीड़न का रूप ले सकता है।
जून 2026 में प्रकाशित एक विस्तृत जांच रिपोर्ट में भारत से जुड़े मामलों के साथ ऐसे टूल्स, वेबसाइटों, बॉट्स और ऑनलाइन समुदायों के नेटवर्क की पड़ताल की गई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ सेवाओं का संचालन अलग-अलग देशों में मौजूद कंपनियों, सर्वरों और तकनीकी ढांचे से जुड़ा हो सकता है। इससे ऐसे मामलों की जांच और सामग्री हटाने की प्रक्रिया जटिल हो जाती है।
चीन और हॉन्गकॉन्ग से जुड़े नेटवर्क पर क्या सामने आया?
कुछ खोजी रिपोर्टों में चीन से जुड़े AI प्लेटफॉर्म और हॉन्गकॉन्ग स्थित कंपनियों से संबंधित तकनीकी सेवाओं का उल्लेख किया गया है। इन रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन नेटवर्क ऐसी सामग्री बनाने या साझा करने के लिए इस्तेमाल किए गए, जिनमें महिलाओं की तस्वीरों को उनकी अनुमति के बिना यौन रूप से आपत्तिजनक रूप दिया गया।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी सेवा का सर्वर चीन में होना, कंपनी का हॉन्गकॉन्ग में पंजीकृत होना और किसी खास अपराध को वहां से संचालित किया जाना—ये तीन अलग-अलग बातें हैं। केवल सर्वर या कंपनी के स्थान के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी विशेष मामले में अपराध का संचालन उसी देश से हुआ था।
अहमदाबाद मामले में आरोपी की गिरफ्तारी से जुड़ी रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय AI टूल्स पर हुई जांचों को एक ही नेटवर्क का हिस्सा मानने के लिए अलग से ठोस सबूत जरूरी होंगे। इसलिए विदेशी नेटवर्क से जुड़े दावों को जांच रिपोर्टों के संदर्भ में ही समझना चाहिए।
फर्जी अकाउंट्स से बार-बार सामग्री फैलाने का खतरा
ऐसे मामलों में कई अकाउंट्स का इस्तेमाल करने से आपत्तिजनक सामग्री अलग-अलग जगहों पर दोबारा दिखाई दे सकती है। एक अकाउंट से पोस्ट हटने के बाद भी दूसरी प्रोफाइल, वेबसाइट या मैसेजिंग समूह पर उसकी कॉपी मौजूद रह सकती है।
इससे पीड़ित व्यक्ति के लिए सामग्री को पूरी तरह हटवाना मुश्किल हो जाता है। कई बार फर्जी अकाउंट्स में पीड़ित की असली तस्वीर, नाम या दूसरी पहचान संबंधी जानकारी का इस्तेमाल भी किया जाता है। इससे लोगों को गलतफहमी हो सकती है कि सामग्री असली है या संबंधित व्यक्ति ने खुद उसे साझा किया है।
ऐसे मामलों में किसी तस्वीर को बिना जांचे आगे भेजना या डाउनलोड करके साझा करना नुकसान को और बढ़ा सकता है। सोशल मीडिया यूजर्स को ऐसी सामग्री को वायरल करने से बचना चाहिए और संबंधित प्लेटफॉर्म पर उसकी रिपोर्ट करनी चाहिए।
पीड़ित महिला क्या कर सकती है?
यदि किसी महिला की तस्वीरों से बिना अनुमति छेड़छाड़ की गई है, तो कुछ जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं:
- सबूत सुरक्षित रखें: पोस्ट का URL, अकाउंट का नाम, तारीख और समय नोट करें। जरूरत के अनुसार स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें, लेकिन आपत्तिजनक तस्वीरों को दूसरों के साथ आगे साझा न करें।
- प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें: संबंधित पोस्ट और फर्जी अकाउंट को गैर-सहमति वाली यौन सामग्री, उत्पीड़न या पहचान के दुरुपयोग की श्रेणी में रिपोर्ट करें।
- साइबर क्राइम की शिकायत करें: भारत में राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। गंभीर मामले में स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम थाने से भी संपर्क किया जा सकता है।
- अपनी ऑनलाइन सुरक्षा बढ़ाएं: सोशल मीडिया की प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा करें, अनजान लोगों की पहुंच सीमित करें और संदिग्ध लिंक या ऐप से सावधान रहें।
यदि मामला किसी फर्जी प्रोफाइल या वायरल पोस्ट से जुड़ा है, तो शिकायत में संबंधित लिंक और उपलब्ध डिजिटल सबूत देना जांच में मददगार हो सकता है।
भारत में ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी दूसरी खबरें पढ़ने के लिए Bulletino की टेक्नोलॉजी न्यूज़ रिपोर्ट भी देख सकते हैं। मोबाइल पर अनजान कॉल और डिजिटल पहचान से जुड़ी सुरक्षा के लिए कॉलर का नाम दिखाने वाले नए नियम की जानकारी भी उपयोगी है।
AI से बनी अश्लील तस्वीरें भी गंभीर डिजिटल उत्पीड़न हैं
किसी व्यक्ति की तस्वीर को AI की मदद से बदल देने से उसकी सहमति का सवाल खत्म नहीं हो जाता। यदि किसी महिला की तस्वीरों को बिना अनुमति अश्लील रूप में तैयार करके फैलाया जाता है, तो इससे उसकी निजता और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान हो सकता है। मामले की परिस्थितियों के आधार पर कानून के तहत कार्रवाई भी हो सकती है।
अहमदाबाद के मामले में पुलिस की जांच और गिरफ्तारी से जुड़ी रिपोर्टें AI के दुरुपयोग की गंभीरता दिखाती हैं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय जांचें बताती हैं कि कुछ ऑनलाइन सेवाओं और तकनीकी नेटवर्क के कारण ऐसी सामग्री का निर्माण और प्रसार सीमाओं के पार भी हो सकता है।
इस समस्या से निपटने के लिए केवल पोस्ट हटाना पर्याप्त नहीं है। सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करनी होगी, AI सेवाओं को सहमति और सुरक्षा संबंधी उपाय मजबूत करने होंगे और यूजर्स को ऐसी सामग्री साझा करने से बचना होगा।
निष्कर्ष: AI से बनाई गई फर्जी अश्लील तस्वीरें वास्तविक तस्वीरें न होने के बावजूद पीड़ित के जीवन पर वास्तविक असर डाल सकती हैं। इसलिए ऐसी सामग्री को मनोरंजन या मजाक समझकर साझा नहीं करना चाहिए। पीड़ित की निजता का सम्मान करना, डिजिटल सबूत सुरक्षित रखना और सही माध्यम से शिकायत करना सबसे जरूरी कदम हैं।