
केमिस्ट्री पढ़ाने के बदले लाखों लेता था आरोपी कोचिंग संचालक, गिरफ्तारी से बचने के लिए देहरादून का पता बनवाया
सीकर/देहरादून। राजस्थान के सीकर में बीएड कराने के नाम पर युवाओं से कथित ठगी करने के मामले में लंबे समय से फरार आरोपी को पुलिस ने देहरादून से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह करीब 18 साल तक गिरफ्तारी से बचता रहा और इस दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में बड़ी कोचिंग संस्थानों में पढ़ाता रहा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी ने अपनी पहचान और ठिकाने को लेकर भी सावधानी बरती, ताकि पुलिस उस तक आसानी से न पहुंच सके।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी कल्याण सिंह वर्ष 2007-08 में सीकर में अपने साथी विकास सक्सेना के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग चलाता था। मामले में बीएड कराने के नाम पर युवाओं से पैसे लेने के आरोप हैं। गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस पुराने मामले की जानकारी जुटाने के साथ आरोपी से पूछताछ कर रही है।
बीएड कराने के नाम पर युवाओं से पैसे लेने का आरोप
पुलिस के अनुसार, कल्याण सिंह और उसके साथी विकास सक्सेना ने सीकर के अशोक विहार इलाके में जनरल एजुकेशन सेंटर नाम से कोचिंग संस्थान चलाया था। यहां विद्यार्थियों को RAS और सरकारी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती थी।
उस समय सरकारी शिक्षक भर्ती में शामिल होने के लिए बीएड की डिग्री आवश्यक थी। आरोप है कि कोचिंग से जुड़े विद्यार्थियों को बीएड कराने के नाम पर पैसे लिए जाते थे और उन्हें नोएडा तथा गाजियाबाद जैसे शहरों में भेजा जाता था।
इस मामले में शिकायतों और कानूनी कार्रवाई के बाद आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा। जांच के दौरान उसकी तलाश जारी रही, लेकिन वह लंबे समय तक पकड़ में नहीं आया।
18 साल तक अलग-अलग राज्यों में पढ़ाने की बात आई सामने
पुलिस के मुताबिक, सीकर में मामला दर्ज होने के बाद आरोपी ने देश के कई हिस्सों में रहकर काम किया। पूछताछ में सामने आया कि उसने हैदराबाद और दिल्ली समेत करीब 17 राज्यों में अलग-अलग कोचिंग संस्थानों में पढ़ाया।
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि आरोपी ने कई प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा और इंजीनियरिंग-चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की कोचिंग संस्थाओं में भी अध्यापन किया। इनमें रिजोनेंस, फिजिक्स वाला और एलन जैसे संस्थानों के नाम सामने आए हैं।
आरोपी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में पुलिस ने बताया कि वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है। विषय की जानकारी और पढ़ाने के अनुभव के कारण उसे कोचिंग क्षेत्र में काम मिलता रहा। हालांकि, अलग-अलग संस्थानों में उसके काम की अवधि और वेतन से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।
देहरादून में छिपे होने की सूचना पर पुलिस ने की कार्रवाई
पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी उत्तराखंड के देहरादून स्थित प्रेम नगर इलाके में रह रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने उसकी लोकेशन की पुष्टि करने के लिए जांच की और उसे गिरफ्तार करने की योजना बनाई।
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिसकर्मी एयरटेल फाइबर टेक्नीशियन बनकर उसके घर तक पहुंचे। आरोपी वहां मौजूद मिला, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया।
इस कार्रवाई में जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश और सीकर एसपी संजीव नैन के निर्देशन में पुलिस टीम ने काम किया। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद पुराने मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
फर्जी या बदले हुए पते के दस्तावेजों की भी जांच
खबर के शीर्षक के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए देहरादून के पते वाले दस्तावेज बनवाए थे। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इन दस्तावेजों की प्रकृति और उनके सत्यापन से संबंधित पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह पुष्टि पुलिस की आधिकारिक जानकारी या जांच रिकॉर्ड के आधार पर ही की जानी चाहिए।
अगर दस्तावेजों में गलत पता या पहचान इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि होती है, तो यह जांच का एक अलग पहलू बन सकता है। फिलहाल इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले पुलिस की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
अदालत ने घोषित किया था भगोड़ा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी को अदालत ने भगोड़ा घोषित कर रखा था और उस पर 35 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। इससे पता चलता है कि पुराने मामले में उसकी तलाश लंबे समय से चल रही थी।
अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, शिकायतकर्ताओं के बयान और कथित लेनदेन की जानकारी की पड़ताल कर सकती है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी की भूमिका क्या थी और उसके साथ काम करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पुराने मामले की जांच को आगे बढ़ाएगी। बीएड कराने के नाम पर कथित रूप से लिए गए पैसों, संबंधित विद्यार्थियों और उस समय के दस्तावेजों की जानकारी जुटाना जांच का हिस्सा हो सकता है।
मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी। केवल गिरफ्तारी या आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
निष्कर्ष: सीकर में बीएड कराने के नाम पर कथित ठगी के पुराने मामले में आरोपी कल्याण सिंह को देहरादून से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, वह कई वर्षों तक अलग-अलग राज्यों में कोचिंग संस्थानों में पढ़ाता रहा और लंबे समय से उसकी तलाश थी। अब पुलिस की जांच से पुराने मामले, कथित आर्थिक लेनदेन और गिरफ्तारी से बचने के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों से जुड़ी अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।