
सेंसेक्स 500 अंक गिरा, 71,900 के करीब कारोबार: निफ्टी भी 150 अंक नीचे; IT और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को शुरुआती तेजी के बाद गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक टूटकर 71,900 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी करीब 150 अंक गिरकर 22,400 के नीचे कारोबार करने लगा। IT, सरकारी बैंक और कुछ बड़े बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव बढ़ा।
सुबह बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन कुछ ही समय बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
12 अक्टूबर को सुबह करीब 11:30 बजे उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, सेंसेक्स 71,941.36 अंक पर था। इसमें पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले लगभग 500 अंकों की गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 50 करीब 132 अंक नीचे 22,388.30 पर कारोबार कर रहा था।
बाजार में गिरावट इसलिए भी चर्चा में रही, क्योंकि दोनों प्रमुख सूचकांक सुबह अच्छी बढ़त के साथ खुले थे। कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली बढ़ी और शुरुआती बढ़त समाप्त हो गई।
शेयर बाजार में दिन के दौरान सूचकांकों का स्तर तेजी से बदल सकता है। इसलिए यहां दिए गए आंकड़े सुबह के कारोबार के दौरान दर्ज स्तरों पर आधारित हैं, न कि दिन के अंतिम बंद भाव पर।
IT और बैंकिंग शेयरों में ज्यादा बिकवाली
सोमवार को बाजार में IT और बैंकिंग क्षेत्र के कई शेयर दबाव में रहे। टेक महिंद्रा में करीब 4% तक गिरावट की खबर रही। सरकारी बैंक, निजी बैंक और कुछ बड़े लार्ज-कैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली।
बाजार में प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार रहीं:
- टेक महिंद्रा: IT शेयरों में कमजोरी के बीच करीब 4% तक गिरावट।
- सरकारी बैंक: निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में 1% से अधिक की कमजोरी।
- निजी बैंक: निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में भी गिरावट।
- IT सेक्टर: निफ्टी IT इंडेक्स आधे प्रतिशत से अधिक नीचे रहा।
- ऑटो सेक्टर: बाजार की कमजोरी के बीच ऑटो शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी।
हालांकि, सभी शेयरों में गिरावट नहीं रही। कुछ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी भी दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि बाजार में दबाव मुख्य रूप से चुनिंदा बड़े शेयरों और कुछ सेक्टरों में अधिक था।
शेयर बाजार गिरने की 4 बड़ी वजहें
1. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई थीं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा कच्चा तेल देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकता है।
यदि तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो कंपनियों की लागत बढ़ने और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए हुए हैं।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती
अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से निवेशकों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले निवेश विकल्प अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, से विदेशी पूंजी बाहर जाने का दबाव बढ़ सकता है।
ऊंची बॉन्ड यील्ड का असर शेयरों के मूल्यांकन पर भी पड़ सकता है। खासकर उन कंपनियों के शेयर प्रभावित हो सकते हैं, जिनकी भविष्य की कमाई को लेकर निवेशक अधिक उम्मीदें रखते हैं।
3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली भी बाजार की कमजोरी की एक वजह रही। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, बाजार की चाल केवल विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री से तय नहीं होती। घरेलू संस्थागत निवेशकों, कंपनियों के नतीजों, ब्याज दरों और वैश्विक संकेतों का भी असर पड़ता है।
4. RBI के कदमों के बावजूद बाजार में दबाव
भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये पर दबाव कम करने के लिए हाल ही में कुछ कदम उठाए थे। सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ, लेकिन इसका सकारात्मक असर शेयर बाजार में टिक नहीं पाया।
इससे संकेत मिला कि निवेशक केवल रुपये की चाल नहीं, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक ब्याज दरों और विदेशी निवेश के रुझान को भी ध्यान में रख रहे थे।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट से निवेशकों के पोर्टफोलियो पर असर पड़ सकता है, लेकिन हर शेयर की चाल एक जैसी नहीं होती। कुछ कंपनियों के शेयर बाजार से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि कुछ में व्यापक बाजार से ज्यादा गिरावट देखने को मिल सकती है।
ऐसे समय में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसले न लें। निवेश का निर्णय कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं, जोखिम सहने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।
शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग करने वालों को बाजार में उतार-चढ़ाव और अचानक आने वाली खबरों के जोखिम का विशेष ध्यान रखना चाहिए। किसी भी शेयर में खरीदारी या बिकवाली से पहले अपने निवेश उद्देश्य और जोखिम का आकलन करना जरूरी है।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे भी शेयरों की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।
यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार होता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, महंगे तेल और ऊंची बॉन्ड यील्ड का दबाव जारी रहने पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
हालांकि, बाजार की अगली चाल का निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है। निवेशकों को ताजा आंकड़ों और कंपनी से जुड़ी खबरों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
