जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में बैंक लोन घोटाले से जुड़े मामले में माणक चौक थाना पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी करीब 8 साल से फरार थे और उनकी गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस का कहना है कि दोनों लगातार अपने ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस के मुताबिक यह मामला राजलक्ष्मी बैंक लोन घोटाले से जुड़ा है। वर्ष 2018 में दर्ज मामले में फर्जी दस्तावेज और विवादित संपत्तियों के आधार पर बैंक से करोड़ों रुपए के लोन स्वीकृत करवाकर राशि हड़पने के आरोप लगाए गए थे। मामले में बैंक से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों, ऋणियों, गारंटरों, वैल्यूअर्स और अधिवक्ताओं समेत 59 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
राजस्थान में सामने आ रहे अन्य अपराध और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी खबरों के लिए आप राजस्थान की ताजा खबरें भी पढ़ सकते हैं।
8 साल से पुलिस को चकमा दे रहे थे आरोपी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान प्रकाश भारद्वाज (54) और निशा भारद्वाज (48) के रूप में हुई है। दोनों पर इस मामले में लंबे समय से फरार रहने का आरोप था।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे। इस दौरान पुलिस टीम ने तकनीकी अनुसंधान और मुखबिर तंत्र की मदद से उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाई।
जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने संभावित ठिकाने पर दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी जुटा रही है।
जयपुर में हाल के दिनों में पुलिस कार्रवाई से जुड़ी कई खबरें सामने आई हैं। ऐसे ही एक अन्य मामले में जयपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी की मौत के मामले में भी पुलिस और जेल प्रशासन ने जांच शुरू की थी।
फर्जी दस्तावेजों से बैंक लोन लेने का आरोप
पुलिस के मुताबिक वर्ष 2018 में दर्ज इस मामले में आरोप लगाया गया था कि फर्जी दस्तावेज और विवादित संपत्तियों से संबंधित कागजात के आधार पर बैंक से लोन स्वीकृत करवाए गए।
रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे मामले में 13 लोन खातों को स्वीकृत कराने का उल्लेख है। आरोप है कि इन लोन के जरिए बैंक से करोड़ों रुपए की राशि हासिल की गई और बाद में राशि का गलत तरीके से इस्तेमाल या हड़प किया गया।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये पुलिस जांच में सामने आए आरोप हैं। मामले की पूरी सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामले में 59 लोग बनाए गए थे आरोपी
पुलिस की जानकारी के अनुसार यह मामला सिर्फ दो आरोपियों तक सीमित नहीं है। वर्ष 2018 में दर्ज केस में बैंक की तत्कालीन पूर्व अध्यक्षा के साथ-साथ बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों, ऋणियों, गारंटरों, वैल्यूअर्स और अधिवक्ताओं सहित कुल 59 आरोपियों को नामजद किया गया था।
इससे मामले की जांच का दायरा काफी बड़ा होने का पता चलता है। पुलिस अब गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि लोन प्रक्रिया में उनकी कथित भूमिका क्या थी और मामले से जुड़े अन्य लोगों के साथ उनका किस तरह संपर्क था।
बैंकिंग और आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों में दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण होती है। पुलिस ऐसे मामलों में बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और लोन प्रक्रिया से संबंधित कागजात की भी जांच कर सकती है।
तकनीकी जांच और मुखबिर तंत्र से मिली जानकारी
पुलिस के अनुसार लंबे समय से फरार आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी अनुसंधान और मुखबिर तंत्र की मदद ली गई। दोनों आरोपियों के लगातार ठिकाने बदलने के कारण पुलिस के सामने उन्हें पकड़ना चुनौती बना हुआ था।
जांच के दौरान पुलिस टीम ने उपलब्ध तकनीकी सूचनाओं और अन्य इनपुट के आधार पर आरोपियों के संभावित ठिकानों की पहचान की। इसके बाद टीम ने दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
इस तरह करीब आठ साल से लंबित गिरफ्तारी की कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर बैंक लोन से जुड़े दस्तावेजों और कथित लेन-देन के बारे में जानकारी जुटा रही है।
बैंक से करोड़ों रुपए के लोन का मामला
इस मामले में पुलिस की जांच का मुख्य हिस्सा कथित तौर पर बैंक से स्वीकृत कराए गए लोन और उनसे जुड़े दस्तावेज हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लोन के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की वास्तविकता क्या थी और संबंधित संपत्तियों की स्थिति क्या थी।
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय हो सकता है कि लोन की राशि किस तरह इस्तेमाल हुई और रकम के लेन-देन में किन लोगों की भूमिका रही।
ऐसे मामलों में जांच एजेंसी दस्तावेजों के साथ-साथ बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों की जांच करती है। अदालत में आरोपों की पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।
आगे की जांच में क्या सामने आएगा?
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की जांच आगे बढ़ेगी। पूछताछ में पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि कथित फर्जी दस्तावेज किस तरह तैयार किए गए, विवादित संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे हुआ और लोन की रकम से जुड़े लेन-देन में कौन-कौन लोग शामिल थे।
इसके अलावा पुलिस मामले में नामजद अन्य आरोपियों की भूमिका और लंबे समय से फरार आरोपियों के संपर्कों की भी जांच कर सकती है।
बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में दस्तावेज, लोन आवेदन, संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड, बैंक खाते और लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर कथित धोखाधड़ी की कड़ियों को जोड़ती हैं।
पुलिस की कार्रवाई जारी
माणक चौक थाना पुलिस की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद मामले की जांच जारी है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के अनुसार मामले में पहले से नामजद अन्य आरोपियों की भूमिका और केस से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। अदालत में मामले की आगे की प्रक्रिया के दौरान आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।
राजस्थान में अपराध और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी अन्य खबरों के लिए Bulletino की राजस्थान न्यूज कैटेगरी पर ताजा अपडेट देख सकते हैं।
नोट: इस खबर में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप पुलिस और उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित हैं। आरोप सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

