नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए मेट्रो किराए में रियायत का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। DUSU चुनाव के बीच छात्र संगठनों की ओर से मेट्रो कन्सेशन पास की मांग प्रमुखता से उठाई जा रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक NSUI ने भी अपने 2026 के घोषणापत्र में छात्रों के लिए किफायती मेट्रो कन्सेशन पास का प्रस्ताव रखा है।
एक हालिया बातचीत में मेट्रो कन्सेशन के मुद्दे पर सवाल किए जाने पर इसे एक लंबी प्रक्रिया बताया गया। जवाब में कहा गया कि यह केवल एक संस्था का मामला नहीं है, बल्कि इसमें राज्य सरकार और अलग-अलग संस्थाओं की भूमिका भी जुड़ी है। संबंधित पक्षों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा होने और प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई।
विपक्ष ने उठाया सवाल
वहीं, इसी मुद्दे पर विपक्ष की ओर से सवाल उठाया गया कि यदि केंद्र, दिल्ली सरकार और नगर निकाय स्तर पर एक ही पार्टी की सरकार है, तो छात्रों के लिए मेट्रो किराए में रियायत लागू करने में देरी क्यों हो रही है।
इस बयान में यह भी कहा गया कि छात्र संगठनों की ओर से लंबे समय से इस मांग को उठाया जा रहा है और सत्ता में नहीं होने के बावजूद वे इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं।
छात्रों के लिए क्यों अहम है मेट्रो कन्सेशन?
दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ने आते हैं। कई छात्र रोजाना लंबी दूरी तय करने के लिए दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे छात्रों के लिए यात्रा खर्च उनकी पढ़ाई और रहने के खर्च के साथ एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है।
हालिया DUSU चुनावी कवरेज में भी छात्रों ने मेट्रो कन्सेशन को अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है।
NSUI ने अपने 2026 घोषणापत्र में भी छात्रों के लिए किफायती मेट्रो कन्सेशन पास की मांग के साथ हॉस्टल, किराये के आवास, 24×7 लाइब्रेरी, छात्रवृत्ति और अन्य छात्र सुविधाओं से जुड़े प्रस्ताव रखे हैं।
पुरानी है छात्रों की मांग
छात्रों के लिए मेट्रो किराए में रियायत की मांग नई नहीं है। 2025 में भी इस मांग को लेकर दिल्ली में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए थे।
अब DUSU चुनाव के दौरान यह मुद्दा फिर प्रमुखता से सामने आया है। फिलहाल छात्रों की नजर इस बात पर है कि मेट्रो कन्सेशन को लेकर सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है।