जयपुर: राजस्थान में अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण के भीतर भील समुदाय के लिए अलग उप-कोटा देने की मांग अब राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गई है। शंकरलाल दहिया और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार, अनुसूचित जनजाति आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
याचिका में मांग की गई है कि राजस्थान में ST वर्ग के लिए निर्धारित 12 प्रतिशत आरक्षण में से 9 प्रतिशत आरक्षण भील समुदाय के लिए विशेष रूप से निर्धारित किया जाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ST वर्ग के भीतर अलग-अलग जनजातीय समुदायों को आरक्षण का लाभ समान रूप से नहीं मिल रहा है।
याचिका में क्या दावा किया गया?
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि भील समुदाय को ST आरक्षण का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि ST आरक्षण के बड़े हिस्से का लाभ कुछ अन्य समुदायों को मिल रहा है।
हालांकि, 99 प्रतिशत आरक्षण लाभ से जुड़ा आंकड़ा फिलहाल याचिकाकर्ताओं का दावा है, जिसे हाईकोर्ट ने इस स्तर पर तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है। इसलिए इस आंकड़े को अंतिम सरकारी या न्यायिक आंकड़ा बताना सही नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के State of Punjab v. Davinder Singh फैसले का भी हवाला दिया है। इस फैसले में आरक्षित वर्ग के भीतर उप-वर्गीकरण से जुड़े संवैधानिक सवालों पर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी गई थी। याचिका में इसी कानूनी आधार पर ST आरक्षण के भीतर अलग उप-कोटा निर्धारित करने की मांग की गई है।
अब सरकार के जवाब पर नजर
हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने भील समुदाय के लिए 9 प्रतिशत उप-कोटा मंजूर कर दिया है। फिलहाल संबंधित सरकारों और संस्थाओं से जवाब मांगा गया है। इसके बाद मामले में आगे सुनवाई होगी।
इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण होगा कि ST समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़े कौन-कौन से आंकड़े अदालत के सामने रखे जाते हैं और प्रस्तावित उप-वर्गीकरण के लिए क्या संवैधानिक एवं तथ्यात्मक आधार प्रस्तुत किया जाता है।