मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली 18 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी एक मेधावी छात्रा थी। बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली इस लड़की ने अपनी मेहनत के दम पर नीट 2026 की परीक्षा की तैयारी की थी। लेकिन 20 मई 2026 को नागपुर में उसका शव मिला। आकांक्षा ने खुदकुशी कर ली। उसके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला जिसने देश का दर्द बढ़ा दिया। आकांक्षा ने लिखा, ‘मम्मी-पापा, आपने सोचा था कि आपकी बेटी पढ़ेगी और डॉक्टर बनेगी, लेकिन मुझमें अब नीट की परीक्षा दोबारा देने की हिम्मत नहीं है। मैंने आप दोनों को बर्बाद कर दिया। यह मौत सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे देश के शिक्षा तंत्र पर एक बड़ा सवाल है। आकांक्षा पांचवीं ऐसी छात्रा थी, जिसने नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद यह कदम उठाया। पिछले पांच साल में नीट की वजह से 93 से अधिक छात्र खुदकुशी कर चुके हैं।

पिता का बलिदान: तीन लाख का कर्ज और रसोइए की नौकरी
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी एक छोटे किसान हैं। उनकी बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से तीन लाख रुपये का कर्ज लिया। यह रकम उनके लिए बहुत बड़ी थी। लेकिन वह यहीं नहीं रुके। वह खुद नागपुर चले गए, जहां उन्होंने एक होटल में रसोइए के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। उनका तनख्वाह कम था, लेकिन उनकी बेटी नागपुर में कोचिंग कर सके, यही उनकी जीवन की एकमात्र प्राथमिकता थी। आकांक्षा यह सब समझती थी। वह जानती थी कि उसके पिता ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसके लिए कितना कुछ किया है। उसके पिता को पहले भी कई बार हार्ट अटैक आ चुके थे, और उनके इलाज पर भी बहुत पैसा खर्च हुआ था। यही वजह थी कि परीक्षा रद्द होने के बाद आकांक्षा टूट गई थी। वह सोच रही थी कि अगर उसने इस बार परीक्षा पास नहीं की तो उसका परिवार दोबारा इतना खर्चा नहीं उठा पाएगा। इसी दबाव ने उसे अंदर ही अंदर खोखला कर दिया।
परीक्षा की कहानी: तीन मई को उम्मीद, बारह मई को तबाही
तीन मई 2026 को पूरे देश में नीट-यूजी की परीक्षा हुई। 22 लाख से अधिक छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया। आकांक्षा भी इन्हीं में से एक थी। परीक्षा देने के बाद उसने अपने पिता को फोन किया और बहुत खुश थी। उसने कहा कि वह करीब 650 अंक की उम्मीद कर रही है। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं रही। पूरे देश में पेपर लीक की अफवाहें फैलने लगीं। जांच में यह सच साबित हुआ। सीबीआई ने मामला संभाला और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने बारह मई को पूरी परीक्षा रद्द कर दी। पुनः परीक्षा की तारीख 21 जून रखी गई। यह खबर आकांक्षा के लिए झटके जैसी थी। उसने अपने पिता से कहा, ‘मैंने पहली बार में अच्छे अंक लाने की उम्मीद की थी, लेकिन अब कोई गारंटी नहीं है कि मैं दोबारा अच्छा प्रदर्शन कर पाऊंगी। यह अनिश्चितता ही वह जहर थी, जिसने धीरे-धीरे उसकी जान ले ली। वह परिवार से बात करना बंद कर दिया, खाना ठीक से नहीं खाती थी और खुद को कमरे में बंद कर लेती थी। परिवार वालों ने बताया कि उसका व्यवहार पूरी तरह से बदल गया था और वह डिप्रेशन में चली गई थी।
राहुल गांधी का हमला: ‘यह आत्महत्या नहीं, टूटी व्यवस्था का नतीजा है’
जैसे ही आकांक्षा की मौत की खबर फैली, विपक्ष ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं है, यह मोदी जी के भ्रष्ट और टूटे सिस्टम का परिणाम है। उन्होंने आकांक्षा के पिता के संघर्ष की कहानी सुनाई – कैसे एक किसान ने अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए तीन लाख रुपये का कर्ज लिया, रसोइए का काम किया, लेकिन सिस्टम की विफलता के कारण उसकी बेटी चली गई। राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘और धर्मेंद्र प्रधान जी? वो आज भी अपनी कुर्सी पर टिके हुए हैं। वही पुरानी समितियाँ, वही पुरानी जाँच, न कोई सुधार, न कोई न्याय। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि पिछले 12 सालों में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को इतना बर्बाद कर दिया है कि पूरी एक पीढ़ी उसकी कीमत चुका रही है। उनका कहना था कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन शिक्षा का जो नुकसान हुआ है, वह आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
सीबीआई जांच और गिरफ्तारियाँ: नेटवर्क कैसे काम करता था?
नीट पेपर लीक का मामला अब सीबीआई के पास है। एजेंसी ने अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य साजिशकर्ता शुभम खैरनार, मनीषा वाघमारे, प्रहलाद कुलकर्णी समेत कई लोग शामिल हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि पेपर लीक करने वालों का एक बड़ा नेटवर्क था। आरोपियों के बीच 10 से 12 लाख रुपये में पेपर बेचे गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों में से एक यश यादव ने अदालत में याचिका दायर कर किताबें मांगी हैं ताकि वह 21 जून को होने वाली नीट की पुनः परीक्षा की तैयारी कर सके। यानी पेपर लीक करने वाला आरोपी खुद उसी परीक्षा में बैठना चाहता है जिसे उसने खराब किया। यह घटना दिखाती है कि सिस्टम कितना धराशायी हो चुका है। कोर्ट ने उसकी याचिका स्वीकार कर ली है और उसे किताबें रखने की अनुमति दे दी है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि NTA ऐसे आरोपी को परीक्षा में बैठने देगा या नहीं। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन अब तक आरोपियों के खिलाफ सजा या सख्त कार्रवाई की कोई बड़ी खबर नहीं है। जांच जारी है, लेकिन आकांक्षा जैसी मासूम जानें वापस नहीं आएंगी।
सिर्फ एक नहीं: हर साल बढ़ते NEET से जुड़े आंकड़े
इस साल NEET-UG पेपर लीक के बाद अब तक कम से कम 14 छात्रों की मौत हो चुकी है। पिछले पांच सालों में यह आंकड़ा 93 के पार है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि 93 परिवारों की त्रासदी है, 93 सपनों का मिट्टी में मिलना है। NEET परीक्षा पिछले कुछ सालों में घोटालों, पेपर लीक और अनियमितताओं के लिए बदनाम हो चुकी है। इस बार का पेपर लीक इतना बड़ा था कि NTA को पूरी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी। छात्र संगठनों ने देश भर में विरोध प्रदर्शन किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में गंभीरता दिखाई है और परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लेकिन इन सबके बीच, एक बात साफ है – देश की परीक्षा प्रणाली को तुरंत सुधारने की जरूरत है। विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। सरकार के पास अब 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का मौका है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार परीक्षा पारदर्शी होगी? क्या सरकार यह सुनिश्चित कर पाएगी कि दोबारा पेपर लीक न हो? आकांक्षा की मौत हम सबके लिए एक चेतावनी है। अब और अधिक जानें नहीं जानी चाहिए।