नई दिल्ली। बीस साल के इस पेशे में मैंने कई आंदोलन उठते और बिखरते देखे हैं, लेकिन जो माहौल इन दिनों सोशल मीडिया पर बना है, वो किसी भूचाल से कम नहीं है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का यह युवा समूह, जो अभी कुछ दिन पहले तक एक मजाक भरा अकाउंट हुआ करता था, अब सड़कों पर उतरने को तैयार है। तारीख तय है 6 जून 2026, और जगह है दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर मंतर। इस प्रदर्शन की मांग है केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। कारण? लगातार हो रही परीक्षाओं में गड़बड़ी, NEET और CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं का रद्द होना, और पेपर लीक के बढ़ते मामले। देशभर के लाखों युवा और छात्र इस गुस्से को अपने अंदर समेटे हुए हैं, और अब ये गुस्सा 6 जून को राजधानी की सड़कों पर फूट सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस आंदोलन को एक नया चेहरा मिला है – अमेरिका में रहने वाले अभिजीत दीपके, जिन्होंने महज 15 दिनों में ऑनलाइन ये तूफान खड़ा कर दिया

अमेरिका से दिल्ली तक: कौन हैं अभिजीत दीपके?
इस पूरे खेल का सबसे दिलचस्प किरदार है अभिजीत दीपके। वो अमेरिका में रहते हैं, लेकिन उनकी सोशल मीडिया रणनीति ने भारतीय युवाओं के दिलों में आग लगा दी है। उन्होंने अब खुद आने का फैसला किया है। 6 जून को सुबह जैसे ही उनका प्लेन दिल्ली उतरेगा, वो सीधे परेड स्ट्रीट थाने जाएंगे और जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत मांगेंगे। ये एक जुआ है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर सरकार ने सुना नहीं, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। उनके इस साहसिक कदम को युवा हीरो की तरह देख रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे नई सियासी बिसात बिछाने का दांव बता रहे हैं। मजेदार बात यह है कि यह समूह बिना किसी पार्टी के झंडे के प्रदर्शन करने की बात कर रहा है। यानी न कोई कांग्रेस का निशान, न कोई आप का झंडा। सिर्फ शिक्षा व्यवस्था में सुधार की एक साफ आवाज। लेकिन सवाल ये है कि क्या इतनी जल्दी और बिना अनुमति के ये विरोध प्रदर्शन कर पाएंगे?
इजाजत की उलझन और सोशल मीडिया का बवाल
जैसे ही इस प्रदर्शन की खबर फैली, सबसे बड़ा सवाल खड़ा हुआ – क्या 6 जून को जंतर मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत मिल पाएगी? CJP के प्रवक्ता और पत्रकार सौरव दास ने एक इंटरव्यू में यहां तक कह डाला कि ‘हमें इजाजत की क्या जरूरत है? संविधान हमें विरोध का अधिकार देता है। यह बयान वायरल हो गया। एक तरफ लोग कह रहे हैं कि ये सही बात है, आखिर हर बार सरकार से परमिशन क्यों मांगी जाए? तो वहीं दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर उनकी क्लास लग गई। लोगों ने कहा कि बिना अनुमति के भीड़ जुटाने पर पुलिस कार्रवाई होगी और पूरा मामला बिगड़ जाएगा। दिल्ली पुलिस के नियम साफ हैं – जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहले से इजाजत लेना जरूरी है। जब तक ये कागजी काम नहीं होगा, डीजे, लाउडस्पीकर, या बड़े पंडाल की इजाजत नहीं मिलेगी। ऐसे में अब देखना ये होगा कि 6 जून को जब अभिजीत खुद परेड स्ट्रीट थाने पहुंचेंगे, तो पुलिस उन्हें क्या जवाब देती है। अगर इजाजत नहीं मिली, तो क्या फिर भी विरोध होगा? ये मामला अब सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का नहीं, बल्कि लोकतंत्र में प्रदर्शन की आजादी का भी हो गया है।
सोनम वांग्चुक का साथ: बढ़ा मोर्चा
जब से इस आंदोलन से जुड़े सबसे बड़े नाम आए हैं, तब से प्रदर्शन की ताकत दोगुनी हो गई है। लद्दाख के मशहूर शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांग्चुक ने एलान किया है कि अगर 5 जून तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया, तो वो खुद 6 जून को जंतर मंतर पर आ जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘चार दशकों से मैं शिक्षा के क्षेत्र में लड़ रहा हूं। अब समय आ गया है कि हम सब एक साथ आवाज उठाएं।’ उनका ये बयान मानो आग में घी डालने जैसा काम कर गया। सोनम वांग्चुक का भारतीय युवाओं के बीच एक अलग ही कद है। उनके आने से ये आंदोलन अब सिर्फ एक ट्विटर ट्रेंड भर नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक राष्ट्रीय स्तर का रूप ले लिया है। हालांकि, वांग्चुक ने यह भी शर्त रखी है कि उन्होंने अभिजीत से बात करके तसल्ली कर ली है कि कहीं कोई विदेशी ताकत तो इस पीछे नहीं है। उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि ये आंदोलन पूरी तरह से देशभक्त युवाओं का है, जो सिर्फ सुधार चाहते हैं। अब 5 जून की तारीख एक तरह की डेडलाइन बन गई है। अगर उस दिन तक सरकार ने कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया, तो 6 जून को जंतर मंतर पर भारी भीड़ जुट सकती है।
सिर्फ इस्तीफा ही नहीं, सिस्टम सुधार की मांग
हालांकि सबसे बड़ी मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है, लेकिन इससे इतर युवा अब बड़ा सवाल पूछ रहे हैं। NEET का पेपर लीक हुआ, एग्जाम कैंसिल हुए, लाखों छात्रों का साल बर्बाद हुआ। अब तो CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में भी सेंध लगने की बात सामने आई है। युवाओं का कहना है कि सिर्फ एक मंत्री को हटा देने से कुछ नहीं होगा। पूरी परीक्षा प्रणाली को बदलने की जरूरत है। हर बार घोटाला होता है, कुछ दिन तक हंगामा होता है, और फिर सब शांत हो जाता है। लेकिन इस बार मामला गरम है क्योंकि ये प्रदर्शन सिर्फ राजनीतिक दल नहीं कर रहे हैं, बल्कि आम युवा और सोशल मीडिया क्रिएटर इसे अपनी निजी लड़ाई बना रहे हैं। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने साफ कहा, ‘हमने पांच परीक्षाओं में अनियमितताएं देखी हैं। ये हमारी पहली प्राथमिकता है। वे चाहते हैं कि सरकार उनसे बात करे और जवाब दे। उनकी नाराजगी इस बात पर भी है कि अब तक सरकार ने उनसे संपर्क करने की कोशिश तक नहीं की। यानी 6 जून का ये प्रदर्शन उस मूक गुस्से का फटना है, जो पिछले कई महीनों से छात्र अपने अंदर दबाए बैठे थे।
दिल्ली पुलिस की तैयारी और सुरक्षा का समीकरण
जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, दिल्ली पुलिस की निगाहें जंतर मंतर की तरफ टिक गई हैं। पिछले कुछ सालों में जंतर मंतर पर कई बड़े प्रदर्शन हुए हैं, और हर बार पुलिस को भारी तैयारी करनी पड़ी है। इस बार मामला ज्यादा नाजुक है क्योंकि आंदोलनकारी युवा हैं, जो सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव हैं। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि अगर अभिजीत दीपके बिना इजाजत के विरोध करने की कोशिश करते हैं, तो क्या एक्शन लिया जाएगा? अब तक CJP ने यह साफ नहीं किया है कि अगर शुक्रवार को उन्हें इजाजत नहीं मिली, तो क्या वो फिर भी प्रदर्शन करेंगे? अभिजीत ने पहले ही कह दिया है कि वो गिरफ्तारी के लिए भी तैयार हैं। इस तरह के बयानों से पुलिस का इंतजाम और भी मुश्किल हो जाता है। कहीं न कही ये 6 जून का प्रदर्शन इस बात की परीक्षा होगी कि दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की नई राह क्या होगी। क्या सिर्फ रील्स और वायरल वीडियो के दम पर सड़कें भरी जा सकती हैं? या फिर पुलिस की ताकत और नियमों के आगे ये आंदोलन थम जाएगा? फिलहाल तो तैयारियां जोरों पर हैं, और सभी की निगाहें 6 जून की सुबह पर टिकी हैं।