नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी में DUSU Election 2026 के लिए 18 सितंबर को मतदान हुआ। नॉर्थ और साउथ कैंपस समेत अलग-अलग कॉलेजों में छात्रों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मतदान के दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पहले चरण में करीब 36 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पिछले साल अधिकांश कॉलेजों में कुल मतदान करीब 39.45 प्रतिशत रहा था।
दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्रसंघ चुनाव हर साल छात्र राजनीति का प्रमुख केंद्र रहता है। इस बार चुनाव में ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन समेत कई संगठनों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। चार केंद्रीय पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—के लिए मुकाबला हुआ।
कैंपस में दिखी चुनावी हलचल
मतदान के दौरान लॉ फैकल्टी और अन्य मतदान केंद्रों के बाहर छात्रों की भीड़ और कतारें देखने को मिलीं। छात्र अपने पसंदीदा उम्मीदवारों के समर्थन में मतदान केंद्रों तक पहुंचे। चुनावी माहौल में विभिन्न छात्र संगठनों के समर्थक भी सक्रिय नजर आए।
चुनाव में कुल 20 उम्मीदवार चार केंद्रीय पदों के लिए मैदान में थे। अध्यक्ष पद के लिए सात, उपाध्यक्ष के लिए पांच तथा सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए चार-चार उम्मीदवार मैदान में थे।
ABVP और NSUI के बीच मुकाबला चर्चा में
इस चुनाव में ABVP और NSUI के बीच मुकाबला प्रमुख रूप से चर्चा में रहा। ABVP ने अध्यक्ष पद के लिए यश डबास, जबकि NSUI ने विजय शंकर मीणा को मैदान में उतारा। AISA-SFI गठबंधन की ओर से अध्यक्ष पद पर अनन्या रतूड़ी उम्मीदवार थीं।
चुनावी प्रचार के दौरान छात्र सुरक्षा, हॉस्टल और आवास, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर, परिवहन और छात्र कल्याण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। हाल में सत्यानिकेतन में हुए हॉस्टल हादसे के बाद छात्र आवास और सुरक्षा का मुद्दा भी चुनावी चर्चा के केंद्र में रहा।
DUSU चुनाव का राष्ट्रीय राजनीति से भी जुड़ता है संदर्भ
DUSU चुनाव को अक्सर दिल्ली की छात्र राजनीति से आगे राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में भी देखा जाता है, क्योंकि कई प्रमुख छात्र संगठन राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों के रूप में सक्रिय हैं। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि छात्र संगठनों की गतिविधियों के दौरान चुनावी नियमों और निर्धारित आचार संहिता का पालन किया जाना चाहिए।
इस चुनाव में प्रचार और चुनावी नियमों को लेकर भी विवाद सामने आए। दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी किए और परिणाम के बाद विजय जुलूस पर रोक लगाई। अदालत के सामने चुनाव प्रचार के दौरान कथित नियम उल्लंघन, वाहनों और अन्य गतिविधियों से जुड़े मामले भी उठे।
अब नतीजों पर नजर
18 सितंबर को मतदान पूरा होने के बाद अब छात्रों और उम्मीदवारों की नजर 19 सितंबर को होने वाली मतगणना पर है। चारों केंद्रीय पदों के नतीजे आने के बाद साफ होगा कि इस बार DUSU की कमान किस पैनल या उम्मीदवारों के हाथ में जाती है।
Bulletino की नजर DUSU Election 2026 के नतीजों और कैंपस से जुड़ी सभी बड़ी अपडेट पर बनी रहेगी।