नई दिल्ली: भारत में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आगाज हो चुका है। 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई प्रमुख नेता दिल्ली पहुंचे हैं।
सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग
BRICS Summit 2026 में सबसे ज्यादा चर्चा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे की हो रही है। शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बाद अपने द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं।
शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच BRICS सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बातचीत भी निर्धारित है। इस मुलाकात को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गलवान के बाद बदले रिश्ते, अब फिर बढ़ रही बातचीत
भारत और चीन के रिश्तों में 2020 के गलवान संघर्ष के बाद गंभीर तनाव आया था। दोनों देशों के बीच सीमा पर सैन्य गतिरोध के साथ-साथ व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संपर्क पर भी असर पड़ा।
हालांकि अक्टूबर 2024 में हुए समझौते के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर सैन्य तनाव कम करने की दिशा में कदम उठे। इसके बाद राजनयिक और आर्थिक संपर्क भी धीरे-धीरे बढ़े हैं। भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानों और कारोबार से जुड़े संपर्कों को फिर से बेहतर बनाने के प्रयास हुए हैं।
फिर भी सीमा विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हिमालयी सीमा पर दोनों देशों की सैन्य मौजूदगी बनी हुई है और अरुणाचल प्रदेश समेत कई मुद्दे अब भी संवेदनशील हैं। इसलिए मोदी-शी बातचीत को सिर्फ औपचारिक मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
मोदी और शी जिनपिंग की बातचीत में भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने, सीमा पर स्थिरता बनाए रखने, व्यापार और आर्थिक सहयोग तथा क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
चीन की ओर से भी भारत के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने तथा मतभेदों को उचित तरीके से संभालने पर जोर दिया गया है।
हालांकि दोनों नेताओं की बैठक में कौन-कौन से मुद्दे उठे और क्या ठोस निर्णय हुए, इसका अंतिम आकलन बैठक के आधिकारिक विवरण के बाद ही किया जाना उचित होगा।
BRICS में भारत का बड़ा एजेंडा
इस बार BRICS सम्मेलन सिर्फ भारत-चीन संबंधों के कारण महत्वपूर्ण नहीं है। भारत इस मंच के जरिए Global South की आवाज को मजबूत करने पर भी जोर दे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS Summit के उद्घाटन सत्र में कहा कि Global South आज दुनिया की कई बड़ी चुनौतियों के केंद्र में है, लेकिन वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका अभी भी सीमित है। उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टालने के खिलाफ बात रखी।
मोदी ने BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए समुद्री नाविकों की सुरक्षा से जुड़े एक नेटवर्क का प्रस्ताव भी रखा। साथ ही तकनीक और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया गया।
BRICS में 11 देश, बढ़ा वैश्विक प्रभाव
BRICS अब अपने शुरुआती पांच देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—से काफी आगे बढ़ चुका है। संगठन में अब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और इंडोनेशिया समेत कुल 11 सदस्य देश हैं।
इस विस्तार के कारण BRICS का आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव पहले की तुलना में काफी बढ़ा है। सम्मेलन में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, तकनीक, वैश्विक शासन और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा प्रमुख है।
दुनिया की नजर मोदी-शी मुलाकात पर
BRICS Summit 2026 में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की बातचीत भारत-चीन संबंधों को किस दिशा में ले जाती है।
दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय में संवाद बढ़ा है, लेकिन सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक से रिश्तों में आगे की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है।
BRICS का यह सम्मेलन भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली एक तरफ रूस और चीन जैसे देशों के साथ BRICS मंच पर काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी देशों के साथ भी अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत कर रही है।
BRICS Summit 2026 से जुड़े अगले बड़े फैसलों और मोदी-शी बातचीत के आधिकारिक नतीजों पर अब दुनिया की नजरें टिकी हैं।