बिहार के मशहूर शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर इन दिनों सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार पढ़ाने के कारण नहीं बल्कि एक विवाद के चलते। पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र में स्थित उनके कोचिंग संस्थान ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ में 2 जून की रात हुए हमले और फायरिंग की घटना के बाद से ही स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी। मामले में खान सर का नाम FIR में आने के बाद उनकी गिरफ्तारी की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिससे उनके लाखों चाहने वालों और छात्रों में बेचैनी थी। लेकिन अब एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पटना की अदालत ने मामले में खान सर की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की है। यह फैसला 9 जून को आया, जिसके बाद खान सर के समर्थकों और छात्रों में राहत की लहर दौड़ गई। अदालत ने साफ कहा है कि फिलहाल उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, बशर्ते वह पुलिस जांच में पूरा सहयोग करें। यह घटना शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उसके खतरनाक रूप को भी उजागर करती है।

2 जून की रात कोचिंग सेंटर में क्या हुआ था?
पूरा मामला 2 जून की रात का है, जब करीब 15 से 20 लोगों के एक समूह ने पटना के मुसल्लाहपुर हाट इलाके में खान सर के कोचिंग संस्थान पर हमला कर दिया। आरोप है कि इस समूह ने संस्थान परिसर में जमकर तोड़फोड़ की, पथराव किया और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट की। इस दौरान हमलावरों ने बैनर-पोस्टर भी फाड़ डाले। इस हमले के बाद खान सर ने आरोप लगाया कि यह हमला एक प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान के संचालक रौशन आनंद के इशारे पर किया गया है। हालांकि, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामले ने एक नया मोड़ ले लिया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें खान सर के निजी सुरक्षा गार्डों को हवा में फायरिंग करते देखा गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस ने खान सर के दो गार्डों को हिरासत में ले लिया, और मामले की गंभीरता को देखते हुए खान सर के खिलाफ भी FIR दर्ज कर ली गई।
गार्डों के बयान ने पलटी मामले की कुंजी
इस पूरे विवाद में सबसे अहम मोड़ तब आया जब पुलिस हिरासत में लिए गए खान सर के दो अंगरक्षकों दीपक कुमार और तालेबर सिंह ने चौंकाने वाला बयान दिया। इन गार्डों ने पूछताछ के दौरान बताया कि उन्होंने संस्थान के बाहर फायरिंग खान सर के कहने पर ही की थी। यह कबूलनामा एक बड़ा झटका था, क्योंकि तब तक खान सर खुद को पूरी तरह से निर्दोष बता रहे थे और इस घटना के लिए प्रतिद्वंद्वी संस्थान को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। इन गार्डों के बयान के आधार पर ही पुलिस ने खान सर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (दुष्प्रेरण) और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि, Meta’s plan (अधिकारियों की इस पूरी कार्ययोजना) में अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर फायरिंग के आदेश किसने और किन परिस्थितियों में दिए। पुलिस इस मामले में बैलिस्टिक रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
अदालत में क्या हुआ और क्या मिली राहत?
खान सर ने इस पूरे मामले में अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए पटना की अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रुपेश देव की अदालत ने 9 जून को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने खान सर की गिरफ्तारी पर तब तक के लिए रोक लगा दी, जब तक कि अगली सुनवाई नहीं हो जाती। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि फिलहाल खान सर के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन शर्त यह रखी गई है कि वह जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे और जब भी पुलिस उन्हें बुलाएगी, पेश होंगे अदालत ने मामले की डायरी और खान सर के आपराधिक इतिहास को भी तलब किया है, जो अगली सुनवाई के लिए जरूरी है। यह राहत अस्थायी है, लेकिन फिलहाल के लिए इसने खान सर और उनके समर्थकों को बड़ी राहत पहुंचाई है।
प्रतिद्वंद्वी संस्थान के संचालक की जमानत खारिज
जहां खान सर को राहत मिली है, वहीं इस मामले के दूसरे पहलू में एक और बड़ा फैसला हुआ। प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान ज्ञान बिंदु के संचालक रौशन आनंद को अदालत से कोई राहत नहीं मिल पाई। उनकी नियमित जमानत याचिका को पहले के जिला न्यायाधीश की अदालत ने खारिज कर दिया गौरतलब है कि रौशन आनंद को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इसी तरह, खान सर के जिन दो अंगरक्षकों ने फायरिंग की थी, उनकी जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है। इससे यह साफ हो गया है कि अदालत मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। जहां एक तरफ खान सर को केस डायरी के आधार पर अस्थायी राहत दी गई है, वहीं आरोपी गार्डों और प्रतिद्वंद्वी संस्थान के संचालक को जेल में रहना होगा। विपक्ष का यह भी तर्क है कि खान सर ने अपने पिता की हत्या के बाद सुरक्षा के लिए लाइसेंस लिया था, लेकिन इसका इस्तेमाल प्रोफेशनल सुरक्षा सेवाओं के लिए किया गया
छात्रों का प्रदर्शन और राजनीतिक हलचल
इस पूरे मामले ने पटना की सियासत और सड़कों को भी गर्म कर दिया है। 3 जून को, यानी घटना के अगले ही दिन, खान सर के छात्रों और समर्थकों की एक बड़ी भीड़ उनके कोचिंग संस्थान के बाहर जमा हो गई और प्रदर्शन करने लगी। उन्होंने न्याय और सुरक्षा की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। हालांकि, बाद में जब मामले का रुख बदला और खान सर के खिलाफ FIR दर्ज हुई, तो माहौल और भी उग्र हो गया। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी इस घटना पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि सरकार अगले तीन महीनों में एक नीति बनाएगी, ताकि कोचिंग संस्थानों के बीच इस तरह की प्रतिद्वंद्विता और कानून व्यवस्था की समस्या पर रोक लगाई जा सके। फिलहाल खान सर ने इस FIR को रद्द करने के लिए पटना हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया है, और अदालत ने इस मामले में बिहार सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। अब सबकी निगाहें 20 जून की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां खान सर के भविष्य का फैसला हो सकता है।