उदयपुर-घूसखोरी के आरोपी ASP की iPhone ने बढ़ाई ACB की टेंशन: पासवर्ड बताने से इनकार, 2 करोड़ के रिश्वत केस में रिमांड बढ़ा; जानें RPS कैसे फंसा
Udaipur News: राजस्थान के उदयपुर से सामने आए कथित 2 करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के ASP मुकेश कुमार सोनी से पूछताछ जारी है। जांच के दौरान अब उनका iPhone ACB की जांच का अहम हिस्सा बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ASP से मोबाइल का पासवर्ड मांगा गया, लेकिन उन्होंने पासवर्ड बताने से इनकार किया है। ACB को आशंका है कि मोबाइल में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण चैट, कॉल रिकॉर्ड और दूसरे डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं।
यह मामला उदयपुर के चर्चित 272 प्लॉट प्रकरण से जुड़ा बताया जा रहा है। ACB ने पहले कथित बिचौलिए सज्जन सिंह जैन को 2 करोड़ रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इसके बाद SOG के ASP मुकेश कुमार सोनी को भी हिरासत में लिया गया। ACB का आरोप है कि यह रकम मामले में राहत और FIR/FR से जुड़ी कार्रवाई के बदले मांगी गई थी।
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iPhone का पासवर्ड नहीं बता रहे ASP
मामले की जांच में सबसे ज्यादा चर्चा ASP मुकेश कुमार सोनी के iPhone को लेकर है। रिपोर्टों के अनुसार ACB के कब्जे में मोबाइल होने के बावजूद उसका पासवर्ड नहीं मिलने के कारण जांच एजेंसी उसके अंदर मौजूद डेटा तक पहुंचने में परेशानी का सामना कर रही है।
एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद कई दिनों से ACB अधिकारियों ने सोनी से मोबाइल का पासवर्ड पूछने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर पासवर्ड बताने से इनकार किया। जांच एजेंसी को आशंका है कि फोन में रिश्वत मामले से संबंधित महत्वपूर्ण बातचीत या अन्य डिजिटल जानकारी हो सकती है।
मोबाइल में मौजूद WhatsApp चैट, कॉल डिटेल, मैसेज और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि मोबाइल से वास्तव में क्या जानकारी मिलती है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
ACB को फोन से क्या मिलने की उम्मीद?
जांच एजेंसी के लिए आरोपी अधिकारी का मोबाइल इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कथित रिश्वत की मांग और बिचौलिए के साथ संपर्क से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मामले की कड़ियों को जोड़ने में मदद कर सकते हैं।
जांच में मुख्य रूप से यह देखा जा सकता है कि:
- ASP और कथित बिचौलिए के बीच कितनी बातचीत हुई।
- शिकायतकर्ता से संपर्क किस माध्यम से किया गया।
- 2 करोड़ रुपये की रकम को लेकर क्या बातचीत हुई।
- मामले से जुड़े अन्य लोगों से कोई संपर्क था या नहीं।
- WhatsApp या दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कोई बातचीत हुई या नहीं।
- रिश्वत की रकम और 272 प्लॉट मामले के बीच क्या कड़ी है।
हालांकि इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।
ACB के जाल में कैसे फंसा RPS अधिकारी?
इस पूरे मामले की शुरुआत उदयपुर के 272 प्लॉट प्रकरण से जुड़ी शिकायत से हुई। ACB के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसके और उसकी पत्नी से जुड़े मामलों में राहत देने तथा दूसरे मामलों में आरोपी नहीं बनाने के बदले कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये की मांग की गई।
ACB ने शिकायत का सत्यापन कराया। रिपोर्ट के अनुसार सत्यापन के दौरान कथित रिश्वत मांग से संबंधित बातचीत सामने आई। शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर यह भी बताया कि मांग पहले 1 करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया।
इसके बाद ACB ने ट्रैप की कार्रवाई की योजना बनाई।
बिचौलिया 2 करोड़ की रिश्वत लेते पकड़ा गया
ACB की कार्रवाई में कथित बिचौलिए सज्जन सिंह जैन उर्फ ततला को शिकायतकर्ता की फैक्ट्री में रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। ACB के अनुसार यह रकम ASP मुकेश कुमार सोनी के लिए मांगी गई थी।
इसके बाद जांच एजेंसी ने ASP की भूमिका की जांच की और उन्हें भी हिरासत में लिया।
ACB के मुताबिक कथित रिश्वत के बदले शिकायतकर्ता को मामलों में राहत देने और दूसरे मामलों में आरोपी नहीं बनाने का भरोसा दिए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी ने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है।
ASP पर ACB की जासूसी का भी आरोप
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। शिकायतकर्ता ने ACB को बताया कि उसे और उसकी पत्नी को डर था कि ASP मुकेश सोनी उन पर नजर रखवा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता ने ACB को बताया कि उसे इस बात की आशंका थी कि उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। इसी वजह से वह सीधे ACB कार्यालय जाने में भी डर रहा था।
अगर जांच में यह आरोप साबित करने वाले साक्ष्य मिलते हैं, तो यह मामले की एक अलग महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है। फिलहाल इसे शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप और जांच का हिस्सा ही माना जाना चाहिए।
मोबाइल पर 2 करोड़ का मैसेज लिखने का दावा
जांच के दौरान ACB के सत्यापन से जुड़ी एक और जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक शिकायतकर्ता ने जब कथित तौर पर 1 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की मांग को लेकर सवाल किया, तो ASP ने अपने मोबाइल पर कुछ संदेश टाइप किए।
Times of India की रिपोर्ट के अनुसार FIR में दावा किया गया है कि सोनी ने फोन पर ऐसे संदेश लिखे जिनका अर्थ शिकायतकर्ता को सज्जन से संपर्क रखने और तय समय तक चार्जशीट दाखिल करने से संबंधित था।
इस दावे की जांच अब उपलब्ध रिकॉर्ड, बातचीत और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
पूछताछ में रिश्वत मांगने से इनकार का दावा
ताजा रिपोर्ट के अनुसार पूछताछ के दौरान ASP मुकेश सोनी ने कथित रिश्वत मांगने से इनकार किया। इसके बाद ACB ने उन्हें कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग सुनाई।
रिपोर्ट में जांच एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया गया कि रिकॉर्डिंग सुनाए जाने के बाद वह कथित तौर पर चुप हो गए। हालांकि इस तरह की जानकारी जांच एजेंसी के दावे पर आधारित है और मामले की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
बिचौलिए ने पूछताछ में क्या बताया?
कथित बिचौलिए सज्जन सिंह जैन से भी ACB पूछताछ कर रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जैन ने कथित तौर पर बताया कि उसने ASP के कहने पर ही शिकायतकर्ता से संपर्क किया था।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रिश्वत की रकम की मांग और उसके लेनदेन में और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।
इसी वजह से ACB ने दोनों आरोपियों की कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी।
3 अक्टूबर तक बढ़ा पुलिस रिमांड
इस मामले में बुधवार को दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। ACB ने अदालत से आगे की पुलिस कस्टडी की मांग की। जांच एजेंसी का कहना था कि मामले में अभी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने बाकी हैं और अन्य लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच करनी है।
अदालत ने ASP मुकेश कुमार सोनी और कथित बिचौलिए सज्जन सिंह जैन की पुलिस कस्टडी तीन दिन और बढ़ाकर 3 अक्टूबर तक कर दी।
ACB का कहना है कि CCTV फुटेज जुटाने और घटनास्थल से जुड़े कुछ पहलुओं की जांच भी बाकी है।
रीडर जसवंत राव भी ACB के रडार पर
मामले की जांच केवल ASP और कथित बिचौलिए तक सीमित नहीं है। SOG के रीडर जसवंत राव की भूमिका भी जांच एजेंसी की नजर में है।
रिपोर्ट के मुताबिक जसवंत राव 26 सितंबर से कार्यालय में अनुपस्थित हैं और उनका फोन बंद बताया गया है। ACB उदयपुर पुलिस की मदद से उनकी तलाश और मामले में उनकी संभावित भूमिका की जांच कर रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 272 प्लॉट प्रकरण से जुड़े दस्तावेजी काम और कथित रिश्वत की बातचीत में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं।
272 प्लॉट केस क्या है?
यह पूरा रिश्वत प्रकरण उदयपुर के चर्चित 272 प्लॉट मामले से जुड़ा बताया जा रहा है। इसी मामले में राहत या FR से जुड़ी कार्रवाई के बदले कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये की मांग किए जाने का आरोप सामने आया है।
ACB अब कथित रिश्वत की मांग, बातचीत, पैसे के लेनदेन और इससे जुड़े लोगों की भूमिका की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
जांच के दौरान अधिकारियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
ट्रैप में असली और नकली नोटों का इस्तेमाल
इस मामले की ट्रैप कार्रवाई को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक कथित 2 करोड़ रुपये की रकम में 4 लाख रुपये असली और 1.96 करोड़ रुपये के जाली नोट रखे गए थे।
इन नोटों के जरिए ACB ने कथित रिश्वत स्वीकार करने वाले बिचौलिए को ट्रैप किया। इसके बाद ASP की भूमिका की जांच करते हुए उन्हें भी हिरासत में लिया गया।
यह पूरी कार्रवाई ACB की उदयपुर इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब iPhone से खुल सकते हैं कई राज?
जांच का सबसे बड़ा सवाल अब ASP के iPhone को लेकर है। अगर ACB मोबाइल का डेटा हासिल करने में सफल होती है तो मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सामने आ सकते हैं।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मोबाइल से निश्चित रूप से कौन-कौन सी जानकारी मिलेगी। यह जांच के बाद ही पता चलेगा कि उसमें कोई प्रासंगिक चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, दस्तावेज या अन्य डिजिटल सामग्री मौजूद है या नहीं।
जांच एजेंसी के लिए मोबाइल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रिश्वत के मामले में बातचीत और संपर्कों की डिजिटल कड़ी जांच को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।
ACB किन सवालों के जवाब तलाश रही है?
पूछताछ और जांच के दौरान कई सवालों पर फोकस किया जा सकता है:
- कथित 2 करोड़ रुपये की मांग किसके निर्देश पर की गई?
- रकम कितने लोगों के बीच बांटी जानी थी?
- ASP और बिचौलिए के बीच कितनी बातचीत हुई?
- 272 प्लॉट मामले में राहत देने की प्रक्रिया क्या थी?
- क्या इस मामले में और अधिकारी या कर्मचारी जुड़े थे?
- रीडर जसवंत राव की क्या भूमिका थी?
- ASP के iPhone में मामले से जुड़े कौन से डिजिटल साक्ष्य हैं?
- शिकायतकर्ता पर निगरानी रखने के आरोप की वास्तविकता क्या है?
- कथित रिश्वत की मांग और दस्तावेज लौटाने के बीच क्या संबंध था?
इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकते हैं।
राजस्थान ACB क्या करती है?
राजस्थान का Anti-Corruption Bureau यानी ACB सरकारी कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायतों की जांच, ट्रैप कार्रवाई और अभियोजन से संबंधित काम करता है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ACB भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की जांच करता है और ट्रैप, आय से अधिक संपत्ति, गबन तथा पद के दुरुपयोग जैसे मामलों पर कार्रवाई करता है।
उदयपुर का यह मामला भी ACB की इसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल ASP मुकेश कुमार सोनी और कथित बिचौलिए सज्जन सिंह जैन पुलिस कस्टडी में हैं। अदालत ने रिमांड को 3 अक्टूबर तक बढ़ाया है।
अब ACB मोबाइल फोन, CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, कथित रिश्वत की बातचीत और अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसके साथ ही रीडर जसवंत राव की भूमिका की भी जांच जारी है।
मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों और अदालत में रखे गए तथ्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ रही है।
उदयपुर रिश्वत केस: एक नजर में
| मामला | जानकारी |
|---|---|
| जगह | उदयपुर, राजस्थान |
| मामला | कथित 2 करोड़ रुपये रिश्वत |
| आरोपी अधिकारी | SOG ASP मुकेश कुमार सोनी |
| कथित बिचौलिया | सज्जन सिंह जैन |
| संबंधित प्रकरण | 272 प्लॉट मामला |
| कार्रवाई | ACB ट्रैप |
| मोबाइल | iPhone जांच के कब्जे में |
| पासवर्ड | रिपोर्ट के मुताबिक बताने से इनकार |
| रिमांड | 3 अक्टूबर तक |
| अन्य जांच | रीडर जसवंत राव की भूमिका |
| जांच एजेंसी | राजस्थान ACB |
निष्कर्ष
उदयपुर के 272 प्लॉट प्रकरण से जुड़े कथित 2 करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। कथित बिचौलिए की गिरफ्तारी के बाद SOG के ASP मुकेश कुमार सोनी की भूमिका की जांच शुरू हुई और अब उनका iPhone भी जांच का अहम हिस्सा बन गया है।
रिपोर्टों के अनुसार ASP मोबाइल का पासवर्ड बताने से इनकार कर रहे हैं, जबकि ACB को आशंका है कि फोन में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हो सकते हैं। दूसरी ओर, अदालत ने दोनों आरोपियों की पुलिस कस्टडी 3 अक्टूबर तक बढ़ा दी है।
अब जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही हैं कि कथित 2 करोड़ रुपये की मांग के पीछे कौन-कौन लोग थे, रकम का संभावित नेटवर्क कितना बड़ा था और मोबाइल तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों से क्या जानकारी सामने आती है।
यह मामला अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में है। आरोपों को अदालत में अंतिम रूप से साबित होना बाकी है।
