जयपुर में फर्जी RGHS अधिकारी रिश्वत लेते ट्रैप: AI से बनाया फर्जी ID कार्ड
जयपुर, 22 सितंबर 2026: जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने खुद को राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) का अधिकारी बताकर अस्पताल प्रबंधन से रिश्वत मांगने के आरोप में एक व्यक्ति को रंगे हाथों पकड़ा है। आरोपी पर अस्पताल की ऑडिट और विभागीय कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे मांगने का आरोप है। खास बात यह है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी ने AI की मदद से फर्जी पहचान-पत्र और विभागीय पत्र तैयार किए थे।
अस्पताल की ऑडिट के नाम पर मांगी रिश्वत
ACB के मुताबिक आरोपी की पहचान मनीष कुमार शर्मा के रूप में हुई है, जो जयपुर के जगतपुरा क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उसने डीडवाना-नागौर स्थित एसकेआई अस्पताल की ऑडिट करवाने के नाम पर अस्पताल प्रबंधन से रिश्वत की मांग की।
शुरुआत में कथित तौर पर 35 हजार रुपये मांगे गए थे। शिकायत के सत्यापन के दौरान रकम बढ़ाकर 45 हजार रुपये किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद ACB ने शिकायत की पुष्टि कर ट्रैप की कार्रवाई की।

AI से बनाया फर्जी RGHS अधिकारी का ID कार्ड
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात आरोपी द्वारा AI का इस्तेमाल बताया जा रहा है। ACB की प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने ‘संतोष कुमार शर्मा’ के नाम से RGHS में डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर पद का फर्जी ID कार्ड तैयार किया था।
इसके अलावा उसने एसकेआई अस्पताल, डीडवाना के नाम से एक कथित विभागीय पत्र भी तैयार किया। रिपोर्ट के अनुसार इस पत्र पर क्रमांक 3350 और 22 अगस्त 2026 की तारीख दर्ज थी।
इन दस्तावेजों को दिखाकर आरोपी ने खुद को RGHS से जुड़ा अधिकारी बताया और अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई का दबाव बनाने की कोशिश की।
40 हजार रुपये लेते ही ACB ने पकड़ा
शिकायत के सत्यापन के बाद ACB ने ट्रैप की योजना बनाई। मंगलवार को आरोपी ने परिवादी को जयपुर के ज्योति नगर स्थित वित्त भवन के पास रिश्वत की रकम लेकर बुलाया था।
ACB की जयपुर नगर-तृतीय टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। कार्रवाई ACB उप महानिरीक्षक जयपुर-द्वितीय ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्ञान प्रकाश नवल के नेतृत्व में की गई।
जांच में सरकारी अधिकारी नहीं निकला आरोपी
ACB की प्रारंभिक जांच में आरोपी द्वारा बताए गए नाम और पद की पुष्टि नहीं हुई। अधिकारियों के अनुसार आरोपी कोई सरकारी कर्मचारी या लोक सेवक नहीं है।
मामले में फर्जी पहचान-पत्र, कथित सरकारी दस्तावेज और अधिकारी के रूप में पहचान बताकर अस्पताल प्रबंधन से रकम मांगने से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए मामला ज्योति नगर थाना पुलिस को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।
RGHS की ओर से भी आधिकारिक सत्यापन जरूरी
यह मामला अस्पतालों और अन्य संस्थानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। RGHS की आधिकारिक वेबसाइट पर हेल्पडेस्क और संपर्क माध्यम उपलब्ध हैं। किसी व्यक्ति द्वारा खुद को RGHS अधिकारी बताकर निरीक्षण, ऑडिट या किसी विभागीय कार्रवाई के नाम पर पैसे मांगने पर उसके पहचान-पत्र और आदेश की आधिकारिक स्तर पर पुष्टि करना जरूरी है।
ACB ने भी लोगों और संस्थानों से अपील की है कि वे फर्जी अधिकारियों के दबाव में आकर रिश्वत न दें और संदिग्ध मामलों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें। ACB के अनुसार भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के लिए टोल-फ्री नंबर 1064 और व्हाट्सऐप हेल्पलाइन 94135-02834 उपलब्ध हैं।

AI के गलत इस्तेमाल का नया उदाहरण
इस कार्रवाई में AI का इस्तेमाल फर्जी पहचान-पत्र और दस्तावेज तैयार करने के लिए किए जाने का आरोप सामने आया है। इससे यह भी पता चलता है कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल केवल वैध कामों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराधी इसका दुरुपयोग भी कर सकते हैं।