अपनाघर-शालीमार में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी, 56.60 लाख ऐंठे: दूसरे के प्लॉट को अपना बताकर फंसाया; रजिस्ट्री के लिए करता रहा टालमटोल
राजस्थान के अलवर स्थित अपनाघर-शालीमार से प्लॉट के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति के प्लॉट को अपना बताकर उसे बेचने का सौदा किया और अलग-अलग समय पर कुल 56.60 लाख रुपये ले लिए। रकम लेने के बाद जब प्लॉट की रजिस्ट्री कराने की बात आई तो आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा।
मामले में शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। आरोप है कि काफी समय तक रजिस्ट्री नहीं होने पर जब प्लॉट के दस्तावेज और वास्तविक मालिकाना हक की जानकारी जुटाई गई तो कथित धोखाधड़ी का पता चला। अपनाघर-शालीमार अलवर की प्रमुख आवासीय सोसायटियों में शामिल है।

प्लॉट बेचने का दिया भरोसा
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने पीड़ित को अपनाघर-शालीमार में प्लॉट दिखाया और दावा किया कि वह प्लॉट उसका है तथा वह उसे बेच सकता है। प्लॉट पसंद आने के बाद दोनों पक्षों के बीच सौदा तय हुआ।
इसके बाद पीड़ित ने आरोपी को अलग-अलग समय पर रकम देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे भुगतान की गई कुल रकम 56.60 लाख रुपये तक पहुंच गई। पीड़ित को उम्मीद थी कि तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसके नाम प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी जाएगी।
लेकिन रकम मिलने के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
रजिस्ट्री के लिए करता रहा टालमटोल
आरोप है कि जब पीड़ित ने रजिस्ट्री कराने के लिए आरोपी से संपर्क किया तो वह अलग-अलग बहाने बनाने लगा। कभी दस्तावेज पूरे नहीं होने की बात कही गई तो कभी रजिस्ट्री की तारीख आगे बढ़ाने की बात सामने आई।
काफी समय तक यही सिलसिला चलता रहा। पीड़ित को संदेह होने पर उसने प्लॉट के संबंध में जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान उसे कथित तौर पर पता चला कि जिस प्लॉट को आरोपी अपना बताकर बेच रहा था, वह किसी दूसरे व्यक्ति के नाम था।
इसके बाद पीड़ित ने आरोपी से रकम वापस करने या प्लॉट की वैध रजिस्ट्री कराने की मांग की।
दूसरे व्यक्ति के प्लॉट को अपना बताया
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि आरोपी ने किसी दूसरे व्यक्ति के प्लॉट को अपना बताकर पीड़ित के साथ सौदा किया। यानी जिस संपत्ति को बेचने का दावा किया गया, उसके मालिकाना हक को लेकर ही सवाल खड़ा हो गया।
प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में जमीन के दस्तावेज और वास्तविक मालिकाना हक की जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी संपत्ति का सौदा करने से पहले संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन नहीं होने पर खरीदार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस मामले में भी पीड़ित का आरोप है कि उसने आरोपी के भरोसे पर बड़ी रकम दे दी, लेकिन बाद में उसे पता चला कि प्लॉट के संबंध में आरोपी का दावा संदिग्ध था।
56.60 लाख रुपये देने के बाद बढ़ी परेशानी
पीड़ित ने कथित तौर पर प्लॉट के लिए कुल 56.60 लाख रुपये दिए। इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं होने से मामला गंभीर हो गया।
आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपी ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं की और लगातार समय मांगता रहा। जब पीड़ित को वास्तविक स्थिति का पता चला तो उसने अपने स्तर पर रकम वापस लेने और कानूनी कार्रवाई का प्रयास किया।
इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
पुलिस शिकायत के बाद जांच शुरू
शिकायत मिलने के बाद पुलिस मामले में दस्तावेजों और पैसों के लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। जांच में यह देखा जाएगा कि आरोपी ने प्लॉट पर अपना मालिकाना हक किस आधार पर बताया था और पीड़ित से 56.60 लाख रुपये किस तरीके से लिए गए।
इसके अलावा पुलिस प्लॉट के वास्तविक मालिक, संबंधित दस्तावेजों और रजिस्ट्री रिकॉर्ड की भी जांच करेगी। यदि बैंक ट्रांजैक्शन या अन्य माध्यमों से रकम दिए जाने के प्रमाण हैं तो वे भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं।
प्रॉपर्टी खरीदते समय दस्तावेजों की जांच जरूरी
यह मामला सामने आने के बाद प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए भी सावधानी जरूरी है। किसी भी प्लॉट या जमीन का सौदा करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बेचने वाला व्यक्ति वास्तव में उस संपत्ति का मालिक है या उसे बेचने का वैध अधिकार रखता है।
खरीदार को जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, पूर्व रजिस्ट्री, रिकॉर्ड और अन्य संबंधित कागजात की जांच करनी चाहिए। बड़ी रकम का भुगतान करने से पहले कानूनी सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।
खासकर तब, जब कोई व्यक्ति बाजार मूल्य से अलग कीमत पर जल्दी सौदा करने का दबाव बनाए या दस्तावेज दिखाने में आनाकानी करे।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
अभी इस मामले में सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस यह पता लगाएगी कि आरोपी ने वास्तव में दूसरे व्यक्ति के प्लॉट को अपना बताकर रकम ली थी या संपत्ति से जुड़े विवाद के पीछे कोई अन्य तथ्य है।
जांच में पैसों के लेनदेन, प्लॉट के दस्तावेज और दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो पुलिस कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है।
फिलहाल अपनाघर-शालीमार में प्लॉट बेचने के नाम पर 56.60 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का यह मामला प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। किसी भी जमीन या प्लॉट में बड़ी रकम लगाने से पहले मालिकाना हक और सभी दस्तावेजों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना जरूरी है।