राजस्थान निकाय चुनाव में किसका पलड़ा भारी? वोटिंग पूरी, 14 सितंबर को होगा बड़ा खुलासा

जयपुर। राजस्थान में शहरी सरकार चुनने के लिए हुए नगर निकाय चुनाव का मतदान अब पूरा हो चुका है। प्रदेश में निकाय चुनाव दो चरणों में कराए गए। पहले चरण में 9 सितंबर और दूसरे व अंतिम चरण में 11 सितंबर को मतदान हुआ। अब सभी की नजरें 14 सितंबर 2026 को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं।
इन चुनावों में नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं के पार्षद पदों के लिए मतदाताओं ने अपने प्रतिनिधियों का चुनाव किया है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद नगर निकायों में सभापति और महापौर के चुनाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।

पहले चरण में कहां-कहां हुई वोटिंग?

राजस्थान निकाय चुनाव के पहले चरण में 9 सितंबर को 162 नगर निकायों में मतदान कराया गया। इसमें 4 नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगरपालिकाएं शामिल थीं।

पहले चरण में 5,393 वार्डों के लिए मतदान हुआ और करीब 57.52 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस चरण में 20,623 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

पहले चरण में अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा जैसे नगर निगम भी शामिल रहे। कई शहरों और कस्बों में मतदान के दौरान मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला, हालांकि कुछ स्थानों पर EVM में तकनीकी समस्या, झड़प और फर्जी मतदान के आरोप भी सामने आए।

पहले चरण में कुल मतदान प्रतिशत 76.41% रहा। अरनोद नगर पालिका में 91.98% मतदान दर्ज किया गया, जबकि जयपुर जिले के 18 निकायों में औसतन 86.80% मतदान की जानकारी सामने आई।

दूसरे चरण में किन इलाकों में हुआ मतदान?

दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 11 सितंबर को हुआ। इस चरण में 147 नगर निकायों के 4,774 वार्डों में वोट डाले गए।

इस चरण में प्रदेश के छह बड़े नगर निगम—जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और पाली—भी शामिल रहे। कुल 87,60,884 मतदाता और 18,266 उम्मीदवार इस चरण में चुनावी मैदान में थे। मतदान के लिए 9,758 पोलिंग स्टेशन बनाए गए थे।

बड़े नगर निगमों में कितने वार्ड?

  • जयपुर नगर निगम: 150 वार्ड
  • कोटा नगर निगम: 100 वार्ड
  • जोधपुर नगर निगम: 100 वार्ड
  • अजमेर नगर निगम: 80 वार्ड
  • उदयपुर नगर निगम: 80 वार्ड
  • पाली नगर निगम: 65 वार्ड

जयपुर में 24 लाख से ज्यादा मतदाता थे और यहां का चुनाव खास तौर पर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया।

चुनाव में CM भजनलाल शर्मा की क्या रही भूमिका?

राजस्थान निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बीजेपी के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल रहे। खासतौर पर दूसरे चरण के चुनाव में उन्होंने लगातार रैलियां और रोड शो किए।

चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में मुख्यमंत्री ने पाली और कोटा में रोड शो एवं जनसभा की। इसके बाद दूसरे चरण के प्रचार के आखिरी दिन जयपुर में भी उनका बड़ा रोड शो हुआ।

जयपुर में मुख्यमंत्री का रोड शो सांगानेरी गेट से शुरू होकर जौहरी बाजार और बड़ी चौपड़ होते हुए त्रिपोलिया गेट तक पहुंचा। इस दौरान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ सहित पार्टी के कई नेता उनके साथ मौजूद रहे।

रिपोर्टों के मुताबिक, दूसरे चरण के अंतिम दिनों में मुख्यमंत्री ने लगातार चुनावी प्रचार किया और पांच दिनों में 10 रोड शो किए। बीजेपी ने इस चुनाव को लेकर संगठन और स्थानीय उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पूरी ताकत लगाई।

भजनलाल शर्मा ने किन मुद्दों पर मांगा वोट?

जयपुर में चुनाव प्रचार के अंतिम रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय विकास और अपनी सरकार के कामकाज के साथ-साथ कई राजनीतिक मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने ‘लव जिहाद’, प्रस्तावित Disturbed Areas Bill और ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ जैसे मुद्दों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यकाल में किए गए कामों को भी जनता के सामने रखा और बीजेपी उम्मीदवारों के समर्थन में मतदान की अपील की।

वहीं कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी सरकार के कामकाज और स्थानीय समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। इस तरह निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहे।

जयपुर में क्यों महत्वपूर्ण है मुकाबला?

दूसरे चरण में जयपुर नगर निगम का चुनाव सबसे ज्यादा चर्चित मुकाबलों में रहा। यहां 150 वार्डों में चुनाव हुआ। कई वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला।

सांगानेर के वार्ड 49 को भी हॉट सीट के रूप में देखा गया, जहां बीजेपी के मुकेश शर्मा ‘काका’ और कांग्रेस के धर्मसिंह सिंघानिया के बीच मुकाबला रहा। सांगानेर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विधानसभा क्षेत्र भी है, इसलिए यहां के परिणाम पर राजनीतिक नजरें खास तौर पर टिकी हैं।

मतदान के दौरान विवाद भी रहे चर्चा में

निकाय चुनाव के दौरान कुछ स्थानों पर EVM खराब होने, फर्जी मतदान के आरोप और समर्थकों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आईं। पहले चरण में सीकर के फतेहपुर और जोधपुर के बालेसर दुर्गावतान समेत कुछ स्थानों पर विवाद की घटनाएं सामने आईं।

दूसरे चरण में भी जयपुर सहित कुछ जगहों पर EVM से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। सांगानेर क्षेत्र में फर्जी वोटिंग के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए और जांच की मांग की। हालांकि ऐसे आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए; अंतिम तथ्य चुनाव अधिकारियों की जांच से स्पष्ट होंगे।

अब 14 सितंबर पर टिकी नजरें

दोनों चरणों का मतदान पूरा होने के बाद अब बीजेपी, कांग्रेस और अन्य दलों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवारों की नजरें 14 सितंबर पर हैं।

मतगणना के बाद साफ होगा कि राजस्थान के शहरी निकायों में जनता ने किस पार्टी और किस उम्मीदवार पर भरोसा जताया। खास बात यह भी होगी कि बड़े नगर निगमों—जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और पाली—में किस पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहता है।

अब राजस्थान की शहरी राजनीति का अगला बड़ा अध्याय 14 सितंबर को EVM खुलने के साथ सामने आएगा।

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