निठारी कांड में बरी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत

हरिद्वार में शुक्रवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब भूपतवाला क्षेत्र में एक चाय की दुकान के अंदर एक व्यक्ति का शव फंदे से लटका मिला। मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में हुई, जिसका नाम करीब दो दशक पुराने चर्चित आपराधिक मामले से जुड़ा रहा था। निठारी कांड में लंबे समय तक आरोपी रहे कोली को बाद में अदालतों से राहत मिली थी और 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे मामले से जुड़े अंतिम मुकदमे में बरी कर दिया था। पुलिस के अनुसार, कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और सप्त सरोवर रोड के पास किराये पर चाय की दुकान चला रहा था। 18 सितंबर की सुबह सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मौके से कोई सुसाइड नोट मिलने की बात सामने नहीं आई है। पुलिस अब मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

हरिद्वार में चाय की दुकान चला रहा था कोली

हरिद्वार पहुंचने के बाद सुरेंद्र कोली ने आम जिंदगी शुरू करने की कोशिश की थी। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक वह भूपतवाला और सप्त सरोवर रोड के आसपास रह रहा था और चाय की छोटी दुकान से अपना गुजारा कर रहा था। निठारी कांड से जुड़े पुराने मुकदमों से बाहर आने के बाद उसका जीवन किस तरह आगे बढ़ रहा था, इसकी जानकारी धीरे-धीरे सामने आ रही है। कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि उसने हाल ही में दुकान शुरू की थी और शुरुआती दिनों में वहां चाय बेचता था। एक रिपोर्ट के अनुसार दुकान शुरू करने से पहले उसने पूजा भी कराई थी और आसपास प्रसाद बांटा था। उसके परिचितों के मुताबिक वह सामान्य तरीके से लोगों से बातचीत करता था और उसके व्यवहार से किसी बड़ी परेशानी का स्पष्ट संकेत नहीं मिला था। पुलिस ने मौके की जांच की और परिवार को सूचना दी। अधिकारियों का कहना है कि मौत के सही कारण और परिस्थितियों को समझने के लिए जांच जरूरी है।

निठारी कांड ने देशभर में खड़े किए थे सवाल

2006 में नोएडा के निठारी इलाके से कई लोगों, खासकर बच्चों और महिलाओं के लापता होने के मामले सामने आए थे। जांच आगे बढ़ने पर सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के आसपास से मानव अवशेष और अन्य सामग्री बरामद होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। निठारी कांड की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई और अलग-अलग मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए। सुरेंद्र कोली और कारोबारी मनिंदर सिंह पंढेर पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। कोली को अलग-अलग मुकदमों में लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा और कई मामलों में उसे मृत्युदंड भी सुनाया गया था। हालांकि बाद की न्यायिक प्रक्रिया में इन मामलों की स्थिति बदलती गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में कई मामलों में कोली को बरी किया। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने जुड़े अंतिम मामले में भी उसकी दोषसिद्धि को कायम नहीं रखा।

सुप्रीम कोर्ट से मिली थी बड़ी राहत

सुरेंद्र कोली की कानूनी कहानी कई वर्षों तक अदालतों में चली। शुरुआती जांच और निचली अदालतों के फैसलों में उसे गंभीर अपराधों का दोषी माना गया था, लेकिन बाद में उच्च न्यायालयों में उन फैसलों पर सवाल उठे। निठारी कांड से जुड़े मामलों में अदालतों ने सबूतों, जांच की प्रक्रिया और अभियोजन की सामग्री को अलग-अलग स्तर पर परखा। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने जुड़े अंतिम मामले में कोली को बरी करते हुए कहा कि दोषसिद्धि के लिए जिन साक्ष्यों पर पिछली अदालतों ने भरोसा किया था, वे कानूनी कसौटी पर पर्याप्त नहीं थे। इस फैसले के बाद कोली लंबे समय तक जेल में रहने के बाद बाहर आया। रिपोर्टों के मुताबिक उसने इसके बाद हरिद्वार में रहकर रोजगार शुरू करने की कोशिश की। उसकी मौत के बाद अब एक अलग सवाल सामने है कि जेल से बाहर आने के बाद उसके जीवन की परिस्थितियां कैसी थीं। हालांकि किसी आर्थिक, सामाजिक या व्यक्तिगत कारण को उसकी मौत का कारण बताना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि पुलिस जांच पूरी होना बाकी है।

मौत के समय पहचान को लेकर भी सामने आई जानकारी

हरिद्वार में सुरेंद्र कोली के अंतिम दिनों को लेकर कई जानकारियां सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार वह वहां दूसरे नाम से रह रहा था और आसपास के लोगों को उसकी पुरानी पहचान के बारे में जानकारी नहीं थी। बाद में पहचान दस्तावेजों की जांच के दौरान पुलिस को उसके सुरेंद्र कोली होने की जानकारी मिली। निठारी कांड से जुड़े उसके पुराने इतिहास के कारण घटना की खबर तेजी से फैल गई। पुलिस के अनुसार शव चाय की दुकान के अंदर मिला और मौके पर जांच के दौरान कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। स्थानीय लोगों और परिचितों से भी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उसके पिछले कुछ दिनों की गतिविधियों और परिस्थितियों को समझा जा सके। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में उसके रोजगार, रहने की जगह और निजी परेशानियों से जुड़ी बातें सामने आई हैं, लेकिन इन बातों को मौत का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

निठारी कांड के बाद की जिंदगी भी बनी चर्चा का विषय

सुरेंद्र कोली की मौत ने एक बार फिर उस मामले को चर्चा में ला दिया है, जिसने 2006 में पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। निठारी कांड की न्यायिक यात्रा यह भी दिखाती है कि किसी आपराधिक मामले में शुरुआती आरोप, अदालतों के फैसले और अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अलग-अलग चरणों में बदल सकते हैं। कोली ने वर्षों जेल में बिताए और अंततः अदालत से राहत मिलने के बाद बाहर आया। इसके बाद हरिद्वार में उसने छोटे स्तर पर काम शुरू किया। अब उसकी मौत की परिस्थितियों की जांच पुलिस कर रही है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं, लेकिन आधिकारिक जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष को अंतिम मानना उचित नहीं होगा। मामले में पोस्टमार्टम, पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। करीब दो दशक पुराने इस मामले से जुड़ी यह नई घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक ऐसे व्यक्ति की मौत से जुड़ी है जिसे न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम चरणों में राहत मिली थी।