‘पेपर पास कर लेंगे, लेकिन सिस्टम के आगे हार जाएंगे’—राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ में छात्रों ने बताई अपनी परेशानियां

नई दिल्ली: शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों की परेशानियां सामने आई हैं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत अलग-अलग जगहों के छात्रों ने वीडियो के जरिए अपनी समस्याएं साझा की हैं। राहुल गांधी ने छात्रों से पूछा था कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसी कौन-सी चीजें हैं, जिसकी वजह से उन्हें अपने भविष्य को लेकर निराशा महसूस होती है।

सरकारी सीटें कम, प्राइवेट शिक्षा महंगी होने की शिकायत

वीडियो में एक छात्र ने कहा कि सरकारी सीटों की संख्या सीमित होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी संस्थानों में पढ़ाई करना मुश्किल है। छात्र ने कोचिंग और हॉस्टल के खर्च का भी जिक्र किया।

छात्र के मुताबिक, दो साल की कोचिंग के लिए करीब 3 लाख रुपये और हॉस्टल के लिए करीब 1.20 लाख रुपये तक खर्च होने की बात सामने आती है। हालांकि ये आंकड़े वीडियो में संबंधित छात्र द्वारा बताए गए हैं और अलग-अलग संस्थानों में वास्तविक फीस अलग हो सकती है।

‘एग्जाम पास कर लेंगे, लेकिन सिस्टम के आगे हार जाएंगे’

एक छात्र ने प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अपनी चिंता बताते हुए कथित पेपर लीक का मुद्दा उठाया। छात्र ने कहा कि युवा लंबे समय तक परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा से जुड़े विवादों के कारण उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत प्रभावित हो सकती है।

उसने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि परीक्षा पास करना संभव है, लेकिन अगर व्यवस्था के स्तर पर समस्याएं बनी रहें तो छात्रों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है।

एग्जाम पास कर लेंगे, लेकिन सिस्टम के आगे हार जाएंगे’

एक छात्र ने प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अपनी चिंता बताते हुए कथित पेपर लीक का मुद्दा उठाया। छात्र ने कहा कि युवा लंबे समय तक परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा से जुड़े विवादों के कारण उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत प्रभावित हो सकती है।

उसने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि परीक्षा पास करना संभव है, लेकिन अगर व्यवस्था के स्तर पर समस्याएं बनी रहें तो छात्रों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है।

योग्यता के बाद भी नौकरी की चिंता

वीडियो में एक अन्य युवक ने अपनी शैक्षणिक योग्यता और शिक्षक बनने की तैयारी का जिक्र किया। उसने कहा कि पात्रता परीक्षा और B.Ed. जैसी योग्यता हासिल करने के बावजूद पर्याप्त संख्या में सरकारी रिक्तियां नहीं निकलने से रोजगार की समस्या बनी हुई है।

यह पहल अब तक कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे समेत अलग-अलग शहरों में आयोजित कार्यक्रमों से जुड़ी रही है। 19 सितंबर 2026 को इसका पांचवां कार्यक्रम इंदौर में आयोजित होने की घोषणा की गई है।

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