
नई दिल्ली/मुंबई, 15 सितंबर 2026: समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में कहा कि उन्हें विश्वास है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू/पेश कर दिया जाएगा।
शाह का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UCC लंबे समय से भाजपा के प्रमुख राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों में शामिल रहा है। उत्तराखंड में इसे लागू किया जा चुका है, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। राजस्थान भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा चुका है।
अमित शाह ने UCC को लेकर क्या कहा?
अमित शाह ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि कई राज्यों में UCC की शुरुआत हो चुकी है और उन्हें विश्वास है कि BJP-NDA के 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC पेश किया जाएगा। उन्होंने इसे सरकार द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों में शामिल किया।
शाह ने अपने बयान में तीन तलाक खत्म किए जाने का भी उल्लेख किया और इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से जोड़ा। उनके मुताबिक सरकार का उद्देश्य समान अधिकार और न्याय व्यवस्था को मजबूत करना है।
UCC का मतलब क्या है?
Uniform Civil Code यानी समान नागरिक संहिता का सामान्य अर्थ है कि धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय नागरिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था हो।
इसका संबंध मुख्य रूप से इन विषयों से हो सकता है
- विवाह
- तलाक
- उत्तराधिकार और विरासत
- संपत्ति के अधिकार
- गोद लेना
- भरण-पोषण
- बहुविवाह
- लिव-इन रिलेशनशिप और उसका पंजीकरण
हालांकि UCC का वास्तविक स्वरूप हर राज्य के कानून में अलग हो सकता है। अभी देश में कोई एक केंद्रीय UCC कानून लागू नहीं है।
अभी भारत में UCC की स्थिति क्या है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। अभी पूरे भारत में UCC लागू नहीं है।
वर्तमान स्थिति में उत्तराखंड ऐसा पहला और एकमात्र राज्य है जहां UCC पूरी तरह लागू हो चुका है। उत्तराखंड में UCC 27 जनवरी 2025 से प्रभावी है और इसके बाद 2026 में इसमें संशोधन भी किए गए हैं।
वहीं दूसरे राज्यों में स्थिति अलग-अलग है।
- उत्तराखंड
उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में UCC कानून पारित किया और 27 जनवरी 2025 से इसे लागू कर दिया।
इस कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों के लिए समान नियम बनाए गए हैं। बहुविवाह पर रोक और विवाह पंजीकरण जैसे प्रावधान भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

2. गुजरात
गुजरात ने मार्च 2026 में UCC से संबंधित विधेयक पारित किया। इसका मॉडल काफी हद तक उत्तराखंड की व्यवस्था से जुड़ा है और इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार तथा लिव-इन संबंधों जैसे विषय शामिल हैं।
3. असम
असम मई 2026 में UCC विधेयक पारित करने वाला पूर्वोत्तर का पहला राज्य बना। वहां भी विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों को समान कानूनी ढांचे में लाने की कोशिश की गई है।
- मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश विधानसभा ने जुलाई 2026 में UCC विधेयक पारित किया। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विधानसभा से पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी की आवश्यकता थी, इसलिए इसे उत्तराखंड की तरह पूरी तरह लागू कानून मानना सही नहीं होगा।
राजस्थान में भी UCC पर बड़ा कदम
राजस्थान के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। राजस्थान सरकार ने 2026 में UCC पर काम शुरू किया और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी। समिति को राजस्थान के लिए UCC का प्रारूप तैयार करने और लोगों से सुझाव लेने की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसके बाद 13 अगस्त 2026 को राजस्थान कैबिनेट ने राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी। प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय शामिल हैं। जनजातीय समुदायों की परंपराओं को इसके दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव भी बताया गया है।
इसके बाद अगस्त 2026 में राजस्थान विधानसभा में UCC Bill 2026 पेश किया गया। रिपोर्टों के अनुसार सदन की अगली विस्तृत चर्चा नवंबर में होने की संभावना है।
UCC लागू होने पर क्या बदलाव हो सकते हैं?
UCC का उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों में अलग-अलग धार्मिक व्यवस्थाओं के स्थान पर एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। हालांकि अंतिम बदलाव प्रत्येक राज्य के कानून पर निर्भर करेंगे।
विवाह के नियम
UCC व्यवस्था में विवाह के लिए समान कानूनी शर्तें और पंजीकरण की व्यवस्था हो सकती है।
तलाक की प्रक्रिया
तलाक से जुड़े मामलों में भी धर्म के आधार पर अलग-अलग नियमों की जगह एक समान प्रक्रिया लागू करने का उद्देश्य हो सकता है।
संपत्ति और विरासत
महिलाओं और पुरुषों के संपत्ति तथा उत्तराधिकार अधिकारों को समान बनाने पर विशेष जोर दिया जा सकता है।
बहुविवाह
उत्तराखंड समेत कुछ राज्य UCC व्यवस्थाओं में बहुविवाह पर रोक का प्रावधान कर चुके हैं या प्रस्तावित कर चुके हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप
उत्तराखंड के UCC में लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण की व्यवस्था है। राजस्थान के प्रस्तावित कानून में भी लिव-इन संबंधों को कानूनी ढांचे में लाने की बात कही गई है।

संविधान में UCC का जिक्र कहां है?
समान नागरिक संहिता का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है।
अनुच्छेद 44 राज्य को पूरे देश में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने की बात कहता है।
लेकिन यह समझना जरूरी है कि अनुच्छेद 44 राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है। यह मौलिक अधिकार की तरह सीधे अदालत में लागू कराने योग्य प्रावधान नहीं है।

UCC पर विवाद क्यों है?
UCC को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस लंबे समय से चल रही है।
भाजपा और उसके समर्थकों का तर्क है कि अलग-अलग धर्मों के लिए अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान कानून होने से लैंगिक समानता, नागरिक अधिकार और कानूनी समानता मजबूत हो सकती है।
वहीं विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि UCC लागू करने से पहले विभिन्न धार्मिक, आदिवासी और सामाजिक समुदायों से व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह के बयान की आलोचना करते हुए UCC को लेकर भाजपा की नीति पर सवाल उठाए हैं। CPI(M) ने भी प्रस्तावित विस्तार का विरोध किया है।
NDA के कुछ सहयोगी दल भी इस विषय पर सहमति और व्यापक चर्चा की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।

2029 से पहले UCC क्यों महत्वपूर्ण है?
अमित शाह का 2029 से पहले 21 NDA-शासित राज्यों में UCC लागू करने का बयान इसे अगले लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने ला सकता है।
हालांकि यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि शाह ने राजनीतिक लक्ष्य और विश्वास व्यक्त किया है; इसका मतलब यह नहीं है कि सभी 21 राज्यों में कानून की प्रक्रिया एक ही चरण में पहुंच चुकी है।
कहीं कानून लागू है, कहीं विधेयक पारित हुआ है और कहीं अभी ड्राफ्ट या विधायी प्रक्रिया चल रही है।
अब सबसे ज्यादा नजर उन NDA-शासित राज्यों पर रहेगी जहां अभी UCC कानून लागू नहीं हुआ है। संबंधित राज्यों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों, कानूनी प्रक्रिया और विधानसभा की मंजूरी के अनुसार आगे बढ़ना होगा।
राजस्थान जैसे राज्यों में आने वाले विधानसभा सत्र में UCC पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है। वहीं उत्तराखंड का अनुभव अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।