उदयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने उदयपुर की स्थानीय राजनीति में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दबदबा कायम कर दिया है। उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों के लिए हुए चुनाव में BJP ने 53 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं कांग्रेस को 23 वार्डों में जीत मिली। इसके अलावा 3 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि 1 वार्ड में CPI(M) ने जीत दर्ज की।
इस परिणाम के साथ उदयपुर नगर निगम में BJP का बोर्ड बनना लगभग तय हो गया है। 80 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 41 पार्षदों की जरूरत होती है, जबकि BJP अकेले ही 53 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है। यानी पार्टी ने बहुमत के आंकड़े से 12 सीट ज्यादा हासिल की हैं।
उदयपुर में BJP का लगातार मजबूत प्रदर्शन
उदयपुर नगर निगम के इस चुनाव परिणाम को BJP के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने 80 में से 53 वार्ड जीतकर न केवल स्पष्ट बहुमत हासिल किया, बल्कि कांग्रेस से काफी आगे निकल गई।
स्थानीय राजनीति में इस जीत का महत्व इसलिए भी है क्योंकि उदयपुर राजस्थान के प्रमुख शहरों में शामिल है और यहां का नगर निगम चुनाव शहर की स्थानीय राजनीतिक दिशा के साथ-साथ बड़े राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत देता है।
BJP की बड़ी जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। वहीं कांग्रेस के लिए 23 वार्डों का परिणाम एक चुनौती के रूप में सामने आया है।
11 सितंबर को हुआ था मतदान
उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों के लिए 11 सितंबर 2026 को मतदान कराया गया था। यह राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण का हिस्सा था। उदयपुर नगर निगम में मतदान के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने पहुंचे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उदयपुर नगर निगम क्षेत्र में मतदान करीब 67.26 प्रतिशत रहा।
चुनाव के बाद EVM में बंद प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला 14 सितंबर 2026 को मतगणना के दौरान हुआ। जैसे-जैसे वार्डों के नतीजे सामने आए, BJP की बढ़त लगातार मजबूत होती गई और अंत में पार्टी 53 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल करने में सफल रही।
कांग्रेस के लिए बड़ा झटका
उदयपुर में कांग्रेस ने 23 वार्डों में जीत हासिल की, लेकिन BJP की तुलना में पार्टी काफी पीछे रह गई। 53 के मुकाबले 23 सीटों का अंतर बताता है कि इस बार नगर निगम चुनाव में BJP का प्रदर्शन कांग्रेस से काफी मजबूत रहा।
कांग्रेस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपने जीते हुए वार्डों में संगठन को मजबूत करना और नगर निगम में प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाना होगी। दूसरी तरफ BJP के सामने चुनाव के दौरान किए गए स्थानीय विकास से जुड़े वादों को जमीन पर उतारने की चुनौती रहेगी।
अब मेयर की कुर्सी पर नजर
वार्डों के नतीजे सामने आने के बाद अब उदयपुर की राजनीति में अगला बड़ा सवाल नगर निगम का नया मेयर कौन बनेगा? है।
BJP के पास 53 पार्षद होने के कारण मेयर चुनाव में पार्टी की स्थिति बेहद मजबूत है। 80 सदस्यीय निगम में स्पष्ट बहुमत होने के कारण BJP के लिए बोर्ड बनाना आसान रहेगा। अब पार्टी के भीतर मेयर पद के संभावित दावेदारों को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है।
मेयर पद के लिए कौन सा नाम सामने आता है और पार्टी किस पार्षद पर भरोसा जताती है, इस पर उदयपुर की राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
चार वार्डों में अलग तस्वीर
हालांकि BJP ने पूरे नगर निगम में बड़ी जीत हासिल की, लेकिन चार वार्डों में पार्टी और कांग्रेस के अलावा दूसरे उम्मीदवारों ने भी अपनी जगह बनाई।
3 वार्ड निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गए, जबकि 1 वार्ड CPI(M) ने जीता। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उदयपुर के कुछ इलाकों में स्थानीय उम्मीदवारों और स्थानीय मुद्दों का प्रभाव रहा।
राजस्थान के निकाय चुनाव में BJP का प्रदर्शन
उदयपुर का परिणाम राजस्थान के व्यापक नगरीय निकाय चुनाव के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। राज्य के 309 शहरी स्थानीय निकायों में 10,245 पार्षद पदों के लिए चुनाव हुआ था। चुनाव दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को कराया गया और मतगणना 14 सितंबर को हुई।
राज्य स्तर पर भी BJP ने कांग्रेस से अधिक वार्डों पर जीत दर्ज की है। इससे शहरी क्षेत्रों में BJP के संगठन और राजनीतिक प्रभाव को मजबूती मिलने का संकेत मिलता है। हालांकि कई निकायों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उदयपुर का चुनावी संदेश क्या है?
उदयपुर नगर निगम के परिणाम से सबसे बड़ा संदेश यह है कि शहर की स्थानीय राजनीति में BJP ने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है। 80 में 53 वार्ड जीतना पार्टी के लिए बड़ी सफलता है। दूसरी तरफ कांग्रेस को 23 सीटों के साथ विपक्ष की भूमिका निभानी होगी।
अब जनता की नजर सिर्फ बोर्ड गठन पर नहीं बल्कि अगले पांच वर्षों में नगर निगम के कामकाज पर भी रहेगी। शहर में सड़क, सफाई, ट्रैफिक, जल निकासी, पार्किंग, पेयजल और अन्य नागरिक सुविधाएं प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे।

