अलवर। राजस्थान के अलवर नगर निगम निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने शहर की सियासत की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। सोमवार, 14 सितंबर को हुई मतगणना के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) 28 वार्डों में जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस ने 23 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि BSP को 1 वार्ड में सफलता मिली। अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने कुल 13 वार्डों में जीत हासिल की।
65 वार्डों में हुआ था मुकाबला
अलवर नगर निगम के कुल 65 वार्डों के लिए चुनाव हुआ था। मतदान दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को कराया गया था, जबकि मतगणना 14 सितंबर को शुरू हुई। चुनाव मैदान में कुल 344 उम्मीदवार थे।
अलवर नगर निगम क्षेत्र में 65.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुल 2,68,292 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,76,402 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
BJP 28 सीटों के साथ सबसे आगे
चुनाव परिणाम में BJP ने 28 वार्डों पर जीत हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। कांग्रेस 23 वार्डों में जीत के साथ दूसरे स्थान पर रही।

इन आंकड़ों से साफ है कि किसी भी एक पार्टी को 33 वार्डों का स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में अब अलवर नगर निगम में महापौर के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। उपलब्ध परिणाम विश्लेषण के अनुसार महापौर पद के लिए निर्दलीय और छोटे दलों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।
किन वार्डों में BJP के प्रत्याशियों ने दर्ज की जीत?
मतगणना के दौरान कई वार्डों के परिणाम सामने आए। वार्ड नंबर 7 से BJP की सुमन लता अग्रवाल विजयी रहीं। वहीं वार्ड नंबर 49 से BJP प्रत्याशी अजय पूनिया ने 1,600 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। वार्ड 48 से नेहा और वार्ड 36 से अपूर्णा ने भी जीत हासिल की।
अब महापौर की कुर्सी पर नजर
अलवर नगर निगम चुनाव में किसी भी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिलने से अब सबसे बड़ा सवाल महापौर कौन बनेगा? है।
BJP 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत होगी। ऐसे में निर्दलीय और अन्य दलों से जीते पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। आने वाले दिनों में समर्थन और राजनीतिक समीकरणों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
अलवर निकाय चुनाव का बड़ा संदेश
अलवर नगर निगम चुनाव परिणाम में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, जबकि कांग्रेस ने भी 23 वार्ड जीतकर मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। हालांकि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से अलवर नगर निगम की सत्ता का अगला अध्याय अब पार्षदों के समर्थन और राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा।
