नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026: संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों में निर्दोष लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। अपने भाषण के दौरान पेजेशकियन ने मारे गए बच्चों की तस्वीरें भी दिखाईं और कहा कि ईरानी जनता आतंकवाद की शिकार हुई है।
यह भाषण ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी है और दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। पेजेशकियन संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे हैं।

पेजेशकियन ने बच्चों की तस्वीरें दिखाईं
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण के दौरान दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की तस्वीर के साथ उन बच्चों की तस्वीरें भी दिखाईं, जिनकी मौत युद्ध के शुरुआती दिनों में हुई थी।
रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने विशेष रूप से उन 150 से अधिक स्कूली बच्चों का जिक्र किया, जिनकी मौत युद्ध के शुरुआती हमलों में बताई गई है। पेजेशकियन ने कहा कि ईरान ने केवल अपनी रक्षा की है और उसके नागरिकों को हमलों का निशाना बनाया गया।
अमेरिका और इजरायल पर लगाए गंभीर आरोप
पेजेशकियन ने अपने भाषण में कहा कि ईरान आतंकवादी नहीं है और उसके लोगों को हमलों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर ईरान पर हमला करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके देश ने अपनी पूरी ताकत के साथ जवाब दिया।
उन्होंने ईरान को इन हमलों का पीड़ित बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपने देश का पक्ष रखने की कोशिश की। ये आरोप ईरानी राष्ट्रपति के बयान हैं और इन्हें उनके पक्ष के रूप में समझना जरूरी है।
ईरान में स्कूल पर हुए हमले का भी जिक्र
पेजेशकियन के बयान का संदर्भ फरवरी में ईरान के मिनाब शहर में हुए स्कूल हमले से भी जुड़ा है। संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने सितंबर में कहा कि उसके पास यह मानने के उचित आधार हैं कि उस हमले में अमेरिका की जिम्मेदारी थी और हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
UN मिशन के अनुसार मिनाब के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले में 156 लोग मारे गए, जिनमें लगभग 120 बच्चे शामिल थे। मिशन ने कहा कि स्कूल एक स्पष्ट रूप से नागरिक स्थल था और हमले से पहले उसके सैन्य लक्ष्य होने की पर्याप्त पुष्टि नहीं की गई।
अमेरिकी अधिकारियों ने पहले कहा था कि अमेरिकी सैन्य अभियान कानून के अनुरूप किए जाते हैं। अमेरिकी पक्ष ने मिनाब हमले को लेकर अलग जांच का भी उल्लेख किया है।
UN रिपोर्ट में ईरान पर भी गंभीर आरोप
संयुक्त राष्ट्र की इसी फैक्ट-फाइंडिंग प्रक्रिया में ईरानी अधिकारियों पर भी गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान गैरकानूनी हत्याओं, यातना, मनमानी हिरासत और जबरन गायब किए जाने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया।
इससे साफ है कि UN की जांच केवल अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर केंद्रित नहीं थी, बल्कि ईरान के भीतर नागरिकों के खिलाफ कथित कार्रवाई की भी जांच की गई।
ट्रंप के भाषण के एक दिन बाद आया पेजेशकियन का बयान
पेजेशकियन का UN भाषण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महासभा संबोधन के एक दिन बाद आया। ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का बचाव किया और कहा कि अमेरिका आगे की स्थिति को लेकर बातचीत का रास्ता भी तलाश सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने ईरान के साथ भविष्य में समझौते की संभावना का संकेत दिया, हालांकि उन्होंने सैन्य विकल्प की चेतावनी भी दी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ सदस्यों ने ट्रंप के भाषण का बहिष्कार किया।
ईरान का संदेश क्या है?
पेजेशकियन का भाषण मुख्य रूप से तीन संदेशों पर केंद्रित रहा—ईरान को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत करना, अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान के पक्ष को सुनने की अपील करना।
ईरान पहले से कहता रहा है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा कर रहा है। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान की सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय भूमिका को लेकर अलग रुख रखते हैं। इसलिए संयुक्त राष्ट्र में दोनों पक्षों के बयानों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

युद्ध के बीच कूटनीतिक रास्ते की तलाश
ईरानी राष्ट्रपति का UN पहुंचना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष के बावजूद कूटनीतिक संपर्क की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। अमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को UN महासभा में हिस्सा लेने की अनुमति दी है, हालांकि उनके आवागमन पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं।
आने वाले दिनों में UN महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच किसी संभावित बातचीत या तनाव कम करने की कोशिशों पर दुनिया की नजर रहेगी।