भारत रूस से तेल खरीद: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत के रूस से कच्चे तेल खरीदने के फैसले पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। कीव में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकता और रूस से तेल खरीदने को युद्ध के समाधान से सीधे जोड़ना उचित नहीं है।
रूस से तेल खरीदने पर जयशंकर ने क्या कहा?
यूक्रेन की ओर से भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर जताई गई चिंताओं पर एस. जयशंकर ने कहा कि भारत यूक्रेन के रुख को समझता है, लेकिन भारत की अपनी ऊर्जा जरूरतें भी महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने दुनिया की मौजूदा ऊर्जा परिस्थितियों और भारत की बड़ी आबादी का हवाला देते हुए कहा कि करोड़ों लोगों के लिए लगातार और भरोसेमंद ऊर्जा की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है।
भारत का कहना रहा है कि सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
क्या भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा?
जयशंकर के बयान से संकेत मिलता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर रूस से तेल खरीदने का फैसला जारी रख सकता है।2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद भारत द्वारा रूसी कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से सवाल उठाए गए हैं। इसके बावजूद भारत ने लगातार अपने ऊर्जा हितों को प्राथमिकता देने की बात कही है।नई दिल्ली का तर्क है कि दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल भारत के लिए किफायती और भरोसेमंद तेल आपूर्ति बेहद जरूरी है।
जयशंकर ने कहा- तेल खरीदने से युद्ध का फैसला नहीं होगा
विदेश मंत्री ने रूस-यूक्रेन युद्ध को व्यापार से जोड़ने पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कोई देश तेल, खनिज, धातु या अन्य सामान खरीद रहा है या नहीं, इससे युद्ध का अंतिम परिणाम तय नहीं होगा।
भारत के मुताबिक रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष का स्थायी समाधान बातचीत, कूटनीति और समझौते के जरिए ही संभव है।
ज़ेलेंस्की से जयशंकर की मुलाकात
कीव दौरे के दौरान एस. जयशंकर ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के संभावित रास्तों के साथ-साथ भारत और यूक्रेन के द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने बताया कि उन्होंने यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ हुई बातचीत और दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाओं के बारे में ज़ेलेंस्की को जानकारी दी।
ज़ेलेंस्की ने भारत की शांति पहल का किया स्वागत
मुलाकात के बाद ज़ेलेंस्की ने भारत की ओर से युद्ध समाप्त करने की प्रतिबद्धता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति जरूरी है।
ज़ेलेंस्की ने यह भी दावा किया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल के कीव में मौजूद रहने के दौरान रूस की ओर से ड्रोन लॉन्च किए गए थे। उनके मुताबिक यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने बड़ी संख्या में ड्रोन को रोक दिया और भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा।
भारत का रूस और यूक्रेन को लेकर स्वतंत्र रुख
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने मॉस्को और कीव दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं। भारत ने लगातार कहा है कि युद्ध का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।
साथ ही, भारत ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भी अपने फैसलों को राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ा है।